भाई की छुअन

सुबह की धूप कमरे में झांक रही थी, और मैं अपनी किताबों के बीच बैठी हुई थी। कॉलेज का पहला साल चल रहा था, और हर रोज की तरह, मैं नाश्ता करने से पहले अपनी नोट्स को एक बार फिर से देख रही थी। घर में सब कुछ सामान्य था – माँ रसोई में चाय बना रही थीं, पापा अखबार पढ़ते हुए तैयार हो रहे थे, और अक्षय भैया ऊपर अपने कमरे में शायद अभी सो ही रहा था।

मैं रिया हूँ, उन्नीस साल की, और हमारा परिवार दिल्ली के एक छोटे से फ्लैट में रहता है। पापा सरकारी नौकरी करते हैं, माँ घर संभालती हैं, और अक्षय भैया इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करके अब जॉब की तलाश में है। हम दोनों बचपन से ही बहुत करीब हैं – साथ खेलना, पढ़ना, और कभी-कभी झगड़ना भी। लेकिन अब बड़ी हो गई हूँ, तो चीजें थोड़ी बदल गई हैं, फिर भी वो मेरे लिए हमेशा वही बड़ा भाई है जो मुझे हर मुश्किल से बचाता है।

उस दिन कॉलेज से लौटकर मैं थक गई थी। बैग फेंककर बिस्तर पर लेट गई, और सोच रही थी कि शाम को क्या करूँ। तभी दरवाजे पर नॉक हुई, और अक्षय भैया अंदर आए। "रिया, क्या कर रही है? माँ ने कहा है कि शाम को बाजार जाना है, साथ चलोगी?" उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा। मैंने हाँ में सिर हिलाया, और हम दोनों तैयार होकर निकल पड़े।

बाजार में घूमते हुए हमने सब्जियाँ लीं, कुछ फल, और रास्ते में आइसक्रीम भी खाई। अक्षय भैया हमेशा की तरह मजाक कर रहे थे, और मैं हँसती जा रही थी। घर लौटकर जब हम थककर बैठे, तो माँ ने कहा कि वे और पापा किसी रिश्तेदार के यहाँ जा रहे हैं, रात को देर से आएँगे। "तुम दोनों खाना खा लेना," कहकर वे चले गए। अब घर में सिर्फ हम दोनों थे।

रात का खाना हमने साथ बनाया। अक्षय भैया रोटियाँ सेंक रहे थे, और मैं सब्जी बना रही थी। किचन में हमारी बातें चल रही थीं – कॉलेज की, उनकी जॉब की, और पुरानी यादों की। कभी-कभी हमारी नजरें मिलतीं, और मैं महसूस करती कि कुछ अलग सा है आज। लेकिन मैंने उसे अनदेखा किया, सोचा कि थकान की वजह से होगा।

खाना खाने के बाद हम लिविंग रूम में बैठे टीवी देखने लगे। कोई पुरानी फिल्म चल रही थी, और हम दोनों सोफे पर आराम से बैठे थे। अक्षय भैया ने अपना हाथ मेरे कंधे पर रखा, जैसे हमेशा रखते हैं, लेकिन इस बार मेरे शरीर में एक अजीब सी सिहरन हुई। मैंने कुछ नहीं कहा, बस फिल्म देखती रही। धीरे-धीरे रात गहराने लगी, और घर की चुप्पी बढ़ गई।

इसे भी पढ़ें: भाई की छुअन

फिल्म खत्म होने के बाद मैंने कहा, "भैया, मैं सोने जा रही हूँ। गुडनाइट।" लेकिन वे बोले, "रुक जा थोड़ी देर, बातें करते हैं।" हम बैठे रहे, और बातें पुरानी यादों पर आ गईं। कैसे हम बचपन में साथ खेलते थे, कैसे वे मुझे स्कूल छोड़ने जाते थे। उनकी आवाज में एक गर्माहट थी, जो मुझे अच्छी लग रही थी।

फिर अचानक उन्होंने मेरे हाथ को छुआ, और कहा, "रिया, तू बड़ी हो गई है न? अब पहले जैसी नहीं रही।" मैंने शरमाते हुए हँस दिया, लेकिन मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई। उनकी उँगलियाँ मेरे हाथ पर फिर रही थीं, और मैं कुछ कह नहीं पा रही थी। यह सब इतना अजीब लग रहा था, लेकिन रोकना भी नहीं चाह रही थी।

हम दोनों चुप हो गए, और बस एक-दूसरे को देखते रहे। अक्षय भैया का चेहरा मेरे करीब आया, और उन्होंने धीरे से मेरे गाल पर हाथ रखा। मेरी साँसें रुक सी गईं। "भैया, ये क्या..." मैंने फुसफुसाते हुए कहा, लेकिन वे बोले, "शशश, कुछ मत कह।" उनकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जो मैंने पहले कभी नहीं देखी।

मैं कन्फ्यूज थी, डरी हुई भी, लेकिन उनके स्पर्श में एक सुकून था। हमारा रिश्ता हमेशा से प्यारा था, लेकिन आज यह कुछ और ही दिशा में जा रहा था। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं, और महसूस किया कि उनके होंठ मेरे होंठों पर हैं। पहला चुंबन, इतना नरम, इतना गहरा। मेरे मन में सवाल उमड़ रहे थे – ये गलत है, लेकिन क्यों इतना सही लग रहा है?

उस चुंबन के बाद हम दोनों अलग हुए, लेकिन अक्षय भैया ने मुझे अपनी बाहों में खींच लिया। "रिया, मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ," उन्होंने कहा। मैंने कुछ नहीं कहा, बस उनकी छाती से लगी रही। मेरे अंदर एक तूफान था – परिवार की सोच, समाज की, लेकिन इस पल में सब कुछ भूल जाना चाहती थी।

इसे भी पढ़ें: भाई की छुअन

धीरे-धीरे他们的 हाथ मेरे शरीर पर घूमने लगे। मेरी कमीज के ऊपर से उन्होंने मेरी पीठ सहलाई, और मैं सिहर उठी। यह सब नया था, अनजाना, लेकिन रोमांचक। मैंने उन्हें रोका नहीं, बल्कि खुद भी उनके कंधे पर हाथ रख दिया। हम दोनों अब बेडरूम की तरफ बढ़ रहे थे, मेरा कमरा।

कमरे में पहुँचकर अक्षय भैया ने दरवाजा बंद किया, और मुझे बिस्तर पर बैठाया। उनकी आँखें मेरी आँखों में थीं, और उन्होंने धीरे से मेरी कमीज उतारनी शुरू की। मैं शरमा रही थी, लेकिन उत्सुक भी। मेरे शरीर की हर कोशिश में एक नई अनुभूति थी – उनकी उँगलियाँ मेरी त्वचा पर, गर्म और नरम।

"भैया, मुझे डर लग रहा है," मैंने कहा। वे बोले, "डर मत, मैं हूँ न। सब ठीक होगा।" उनकी बातों ने मुझे थोड़ा सहारा दिया, और मैंने खुद को उनके हवाले कर दिया। उन्होंने मेरे ब्रा को खोला, और मेरे स्तनों को छुआ। पहली बार किसी ने मुझे ऐसे छुआ था, और वह सनसनी अवर्णनीय थी – दर्द और सुख का मिश्रण।

मैंने उनकी शर्ट उतारी, और उनके मजबूत शरीर को देखा। हम दोनों अब नग्न थे, एक-दूसरे के सामने। अक्षय भैया ने मुझे लिटाया, और मेरे पूरे शरीर पर चुंबन करने लगे। गर्दन से शुरू करके नीचे की तरफ, हर जगह। मेरी सिसकियाँ निकल रही थीं, और मैं अपने आप को रोक नहीं पा रही थी।

फिर उन्होंने मेरी जाँघों को छुआ, और धीरे से मेरी योनि पर हाथ फेरा। मैं उत्तेजित हो गई, मेरी साँसें तेज। "भैया, प्लीज..." मैंने कहा, लेकिन क्या कहना चाहती थी, खुद नहीं जानती। वे समझ गए, और अपनी उँगली अंदर डाली। दर्द हुआ, लेकिन साथ में एक मीठा एहसास भी।

इसे भी पढ़ें: माँ की छुअन

कुछ देर ऐसे ही चलता रहा, और फिर अक्षय भैया ने कहा, "रिया, अब मैं अंदर आऊँगा। तैयार है?" मैंने हाँ में सिर हिलाया, डरते हुए। उन्होंने अपना लिंग मेरी योनि पर रखा, और धीरे से धक्का दिया। पहली बार, दर्द भयानक था। मैं चीख उठी, लेकिन उन्होंने मुझे चुप कराया, "बस थोड़ी देर, सहन कर।"

धीरे-धीरे दर्द कम हुआ, और सुख की लहरें आने लगीं। हम दोनों का शरीर एक लय में चल रहा था, जैसे कोई नृत्य। लेकिन फिर अक्षय भैया रुके, और बोले, "रिया, क्या मैं पीछे से ट्राई करूँ? सुना है वो और मजा देता है।" मैं कन्फ्यूज थी, लेकिन उनकी बात पर भरोसा किया। "ठीक है, भैया," मैंने कहा।

उन्होंने मुझे घुमाया, और मेरी गांड पर अपना लिंग रखा। पहले तो डर लगा, लेकिन उन्होंने क्रीम लगाई, और धीरे से दबाया। दर्द फिर से हुआ, लेकिन इस बार अलग तरह का – तीव्र, लेकिन उत्तेजक। अंदर जाते ही मैंने महसूस किया कि यह अनुभव बिल्कुल नया है, जैसे शरीर का कोई छिपा हिस्सा जाग रहा हो।

अक्षय भैया धीरे-धीरे हिलने लगे, और मैं अपनी सिसकियाँ रोक नहीं पा रही थी। "भैया, और तेज," मैंने कहा, खुद को हैरान करते हुए।他们的 गति बढ़ी, और हर धक्के के साथ एक नई ऊँचाई छू रही थी। मेरे मन में अपराधबोध था, लेकिन इस सुख ने सब ढक दिया।

इसे भी पढ़ें: माँ की छुअन

हम दोनों पसीने से तर थे, और कमरे में सिर्फ हमारी साँसों की आवाज थी। अक्षय भैया ने मेरे कान में फुसफुसाया, "रिया, तू मेरी है।" मैंने जवाब दिया, "हाँ, भैया, हमेशा।" यह पल अनंत लग रहा था, जैसे समय रुक गया हो।

फिर उन्होंने अपनी गति और तेज की, और मैं महसूस कर रही थी कि कुछ बड़ा होने वाला है। मेरे शरीर में एक विस्फोट सा हुआ, और मैं चरम पर पहुँच गई। अक्षय भैया भी थोड़ी देर बाद रुक गए,和我 को कसकर पकड़े हुए। हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे, साँसें सामान्य होने का इंतजार करते हुए।

उस रात के बाद हमारी दुनिया बदल गई, लेकिन हम दोनों जानते थे कि यह राज रहेगा। अगली सुबह जब माँ-पापा लौटे, सब कुछ सामान्य था, लेकिन मेरी आँखों में एक नई चमक थी। अक्षय भैया ने मुझे देखकर मुस्कुराया, और मैंने शरमाकर नजरें झुका लीं।

दिन बीतते गए, और हमारे बीच यह closeness बढ़ती गई। कभी-कभी रात को जब घर वाले सो जाते, हम चुपके से मिलते। हर बार कुछ नया लगता, जैसे पहली बार हो। लेकिन उस पहली रात की याद हमेशा ताजा रहती।

एक शाम, जब हम अकेले थे, अक्षय भैया ने कहा, "रिया, क्या तुझे पछतावा है?" मैंने ना में सिर हिलाया, "नहीं भैया, बस डर लगता है कि कहीं किसी को पता न चल जाए।" उन्होंने मुझे गले लगाया, और बोले, "कुछ नहीं होगा, हम सावधान रहेंगे।"

इसे भी पढ़ें: पापा के दोस्त की छुअन

उस रात फिर हम एक हो गए, लेकिन इस बार और ज्यादा passion के साथ। मैंने खुद initiative लिया, उनके शरीर को छुआ, और उन्हें खुश किया। गांड मराई का अनुभव अब आदत बन रहा था, हर बार ज्यादा सुखद। दर्द कम, मजा ज्यादा।

हमारे रिश्ते में अब भावनाएँ गहरी हो गई थीं – प्यार, lust, और एक secret bond। मैं जानती थी कि यह गलत है, लेकिन रोक नहीं पा रही थी। हर छुअन में एक कहानी थी, हर चुंबन में एक वादा।

फिर एक दिन, जब हम साथ थे, अक्षय भैया ने कहा, "रिया, मैं तुझे कभी नहीं छोड़ूँगा।" मैंने उनकी आँखों में देखा, और महसूस किया कि यह सच्चाई है। हमारा प्यार अब सिर्फ शारीरिक नहीं था, बल्कि आत्मिक।

उस पल में, जैसे हम दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे, उनके हाथ मेरी कमर पर, मेरे होंठ उनके गले पर। सुख की लहरें फिर से उठ रही थीं, और मैं बस