भाई की छुअन

सुबह के नौ बजे थे, जब मैं अपनी छोटी सी रसोई में चाय की केतली चढ़ा रही थी। बाहर बारिश की बूंदें खिड़की पर टपक रही थीं, और घर में वो सुकून भरी शांति थी जो केवल छुट्टी के दिन मिलती है। मैंने कॉलेज की किताबें टेबल पर रखीं और सोचा कि आज का दिन आराम से गुजरेगा, बस पढ़ाई और थोड़ी टीवी।

राहुल, मेरा बड़ा भाई, अभी-अभी जागा था। वो कमरे से निकलकर आया, बाल बिखरे हुए, और मुस्कुराते हुए बोला, "रिया, चाय बन रही है? मुझे भी एक कप देना।" मैंने हंसकर कहा, "हां, बन रही है। तू जाकर ब्रश कर ले, मैं लाती हूं।" हमारा घर छोटा सा था, दिल्ली के एक अपार्टमेंट में, जहां मम्मी-पापा सुबह जल्दी काम पर निकल जाते थे।

हम दोनों ही घर में थे आज, क्योंकि राहुल की छुट्टी थी और मेरा कॉलेज बंद। मैं 22 साल की थी, बीए फाइनल ईयर में, और राहुल 24 का, एक आईटी कंपनी में जॉब करता था। बचपन से हम साथ बड़े हुए थे, झगड़े, हंसी-मजाक, सब कुछ शेयर करते। वो मेरे लिए हमेशा एक दोस्त जैसा रहा, जो हर मुश्किल में साथ खड़ा होता।

चाय लेकर मैं लिविंग रूम में आई, जहां राहुल सोफे पर बैठा फोन देख रहा था। मैंने उसके बगल में बैठकर कप थमाया और खुद भी सिप करने लगी। बाहर की बारिश अब तेज हो गई थी, और कमरे में हल्की ठंडक फैल रही थी। हमने बातें शुरू कीं, जैसे हमेशा करते थे – उसकी जॉब के बारे में, मेरे कॉलेज के दोस्तों के बारे में।

"तू तो अब बड़ी हो गई है रिया, कॉलेज खत्म होते ही शादी की बातें शुरू हो जाएंगी," राहुल ने मजाक में कहा। मैंने हंसकर जवाब दिया, "अरे, अभी कहां? मुझे तो पहले जॉब करनी है। तू अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में बता ना।" वो थोड़ा शरमाया और बोला, "कहां है कोई? काम में इतना बिजी हूं कि मौका ही नहीं मिलता।"

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बातें करते-करते समय निकलता गया। दोपहर हुई, हमने साथ में लंच बनाया – साधारण सी दाल-चावल। किचन में काम करते हुए मैंने महसूस किया कि राहुल आज कुछ ज्यादा ही मेरे करीब आ रहा था। कभी सब्जी काटते वक्त उसका हाथ मेरे हाथ से छू जाता, तो कभी प्लेट उठाते हुए वो मेरे पीछे से गुजरता। लेकिन वो सब इतना नॉर्मल लग रहा था कि मैंने ध्यान नहीं दिया।

लंच के बाद हम सोफे पर बैठे फिल्म देखने लगे। बारिश अभी भी जारी थी, और घर में अंधेरा सा छा गया था। मैंने ब्लैंकेट ओढ़ लिया, और राहुल भी मेरे बगल में आकर बैठ गया। फिल्म रोमांटिक थी, लेकिन मैं उसमें ज्यादा खोई नहीं थी। मेरे मन में कुछ और चल रहा था – पिछले कुछ दिनों से मैं राहुल को अलग नजरों से देख रही थी।

बचपन में हम साथ खेलते थे, लेकिन अब वो बड़ा हो गया था, मजबूत कंधे, गहरी आंखें। मैं खुद को रोकती थी, सोचती कि ये गलत है, वो मेरा भाई है। लेकिन कभी-कभी रात को अकेले में, उसके बारे में सोचकर एक अजीब सी उत्तेजना महसूस होती। आज भी, फिल्म देखते हुए, जब उसका कंधा मेरे से टकराया, तो मैंने खुद को थोड़ा सा हिलाया नहीं।

राहुल ने अचानक कहा, "रिया, तू ठीक है न? आज कुछ चुप-चुप सी लग रही है।" मैंने मुस्कुराकर जवाब दिया, "हां, बस थोड़ी थकान है।" लेकिन अंदर से मेरा दिल तेज धड़क रहा था। वो मेरी तरफ मुड़ा, और उसकी आंखों में कुछ था – एक गहराई, जो मैंने पहले नहीं देखी थी। उसने अपना हाथ मेरे कंधे पर रखा, जैसे सहारा दे रहा हो।

उस छुअन में कुछ था, जो सामान्य नहीं लग रहा था। मैंने उसकी तरफ देखा, और हमारी नजरें मिलीं। समय जैसे रुक सा गया। राहुल ने धीरे से कहा, "तू जानती है, मैं हमेशा तेरे लिए हूं।" मैंने कुछ नहीं कहा, बस उसकी आंखों में खो गई। फिर, बिना सोचे, मैंने अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया।

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वो पल इतना शांत था, लेकिन अंदर तूफान उठ रहा था। राहुल ने अपना हाथ मेरी कमर पर सरका दिया, और मैंने विरोध नहीं किया। मेरे मन में सवाल घूम रहे थे – ये क्या हो रहा है? लेकिन शरीर मानने को तैयार नहीं था। धीरे-धीरे, उसने मुझे अपनी ओर खींचा, और हमारे होंठ करीब आए।

पहला चुंबन इतना नरम था, जैसे कोई सपना। राहुल के होंठ मेरे होंठों पर रखे गए, और मैंने आंखें बंद कर लीं। वो स्वाद, वो गर्माहट, सब कुछ नया था। मैंने खुद को उसके हवाले कर दिया, और हम दोनों एक-दूसरे में खो गए। लेकिन फिर, अचानक मुझे होश आया – वो मेरा भाई है। मैं पीछे हटी और बोली, "राहुल, ये गलत है।"

उसने मेरी आंखों में देखा और कहा, "रिया, मैं जानता हूं। लेकिन ये जो महसूस हो रहा है, वो झूठ नहीं है। तू भी तो महसूस कर रही है।" मैं चुप रही, क्योंकि वो सही था। मेरे अंदर एक संघर्ष था – समाज की नजरें, परिवार का डर, लेकिन साथ ही एक गहरी चाहत। आखिरकार, मैंने हार मान ली और फिर से उसके करीब आई।

उस रात, जब मम्मी-पापा अभी घर नहीं लौटे थे, हम अपने कमरे में चले गए। राहुल ने दरवाजा बंद किया, और हम बिस्तर पर बैठे। उसने धीरे से मेरे कपड़े उतारने शुरू किए, हर स्पर्श में प्यार था। मैंने उसकी शर्ट खोली, और उसके सीने को छुआ। वो गर्माहट मुझे मदहोश कर रही थी।

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हमारे शरीर एक-दूसरे से मिले, और वो पल अविस्मरणीय था। राहुल ने मुझे इतनी नजाकत से छुआ, जैसे मैं कोई नाजुक फूल हूं। मेरी सांसें तेज हो गईं, और हर स्पर्श में एक नई सनसनी थी। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, "राहुल, धीरे।" वो मुस्कुराया और बोला, "तू चिंता मत कर, मैं हूं।"

जैसे-जैसे हम आगे बढ़े, वो आनंद बढ़ता गया। उसके हाथ मेरे शरीर पर घूम रहे थे, हर जगह एक नई उत्तेजना पैदा कर रहे थे। मैंने खुद को पूरी तरह खो दिया, और वो लय इतनी परफेक्ट थी कि समय का पता नहीं चला। लेकिन अंदर से एक अपराधबोध भी था, जो मुझे रोकने की कोशिश कर रहा था।

फिर भी, वो रात हमारी थी। सुबह होने से पहले, हम कई बार एक-दूसरे में डूबे। हर बार कुछ नया था – कभी तेज, कभी धीमा। राहुल ने मुझे ऐसे प्यार किया, जैसे कोई और नहीं कर सकता। मैंने महसूस किया कि ये सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक बंधन था।

अगले दिन, सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन हम दोनों जानते थे कि कुछ बदल गया है। शाम को, जब हम अकेले थे, राहुल ने मुझे फिर से अपनी बाहों में लिया। इस बार, कोई हिचक नहीं थी। हमने फिर से वो पल जीए, लेकिन अब ज्यादा गहराई से। उसके स्पर्श में अब एक परिचितता थी, जो और ज्यादा आनंद दे रही थी।

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मैंने उसके शरीर को एक्सप्लोर किया, हर हिस्से को छुआ, और वो मेरे लिए वैसे ही था। हमारी सांसें मिलीं, और वो चरम इतना तीव्र था कि मैं चीख पड़ी। राहुल ने मुझे शांत किया, अपने होंठों से मेरे होंठ बंद किए। वो पल इतना इंटेंस था कि मैं भूल गई सब कुछ।

दिन बीतते गए, और हमारा रिश्ता गहराता गया। कभी रात को, कभी दोपहर में, जब घर खाली होता। हर बार, भावनाएं नई होतीं – कभी प्यार की गहराई, कभी जुनून की आग। लेकिन साथ ही, डर भी था कि कहीं किसी को पता न चल जाए।

एक शाम, बारिश फिर से हो रही थी। हम बालकनी में खड़े थे, और राहुल ने मुझे पीछे से गले लगाया। उसकी सांस मेरे कान पर लग रही थी, और मैंने महसूस किया वो उत्तेजना। हम अंदर आए, और बिस्तर पर लेट गए। इस बार, मैंने पहल की – उसके ऊपर चढ़ी, और खुद को उसके साथ जोड़ा।

वो आनंद अलग था, कंट्रोल मेरे हाथ में था। राहुल ने मेरी कमर पकड़ी, और हम साथ में हिले। हर मूवमेंट में एक नई सनसनी थी, गर्माहट, दबाव, सब कुछ। मैंने अपनी आंखें बंद कीं और बस महसूस किया। वो चरम के करीब पहुंचा, और मैं भी।

उसके बाद, हम लेटे रहे, एक-दूसरे की बाहों में। राहुल ने कहा, "रिया, मैं तुझे कभी नहीं छोड़ूंगा।" मैंने मुस्कुराकर जवाब दिया, "मैं भी।" लेकिन अंदर से जानती थी कि ये रिश्ता मुश्किल है, फिर भी वो आनंद सब कुछ भुला देता था।

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कुछ हफ्ते बाद, एक रात हम फिर साथ थे। इस बार, ज्यादा एक्सपेरिमेंटल – अलग-अलग पोजीशंस, नई जगहें छूना। राहुल ने मेरे शरीर के ऐसे हिस्सों को छुआ, जहां पहले कभी नहीं। वो सनसनी इतनी तेज थी कि मैं कांप उठी। हम दोनों ने एक-दूसरे को पूरी तरह एक्सप्लोर किया, और वो रात सबसे लंबी लगी।

हर बार, भावनाएं गहराती जातीं। अपराधबोध कम होता गया, और प्यार बढ़ता गया। मैं सोचती कि शायद ये हमारा राज रहेगा, हमेशा।

फिर एक दिन, जब हम साथ लेटे थे, नंगे शरीर एक-दूसरे से चिपके, राहुल ने मेरे कान में फुसफुसाया, "तू मेरी जिंदगी है रिया।" मैंने उसके सीने पर सिर रखा और महसूस किया वो दिल की धड़कन, जो मेरी अपनी लग रही थी।