बहन की सीख
सुबह की धूप कमरे में हल्की-हल्की झांक रही थी, और मैं बिस्तर पर लेटा हुआ अलार्म की आवाज़ से जागा। रोज की तरह, कॉलेज जाने से पहले चाय बनानी थी, क्योंकि घर में सिर्फ मैं और प्रिया दीदी थे। मम्मी-पापा गांव गए हुए थे हफ्ते भर से, और हम दोनों ही घर संभाल रहे थे।
मैं उठकर किचन में गया, जहां प्रिया दीदी पहले से चाय बना रही थीं। वो मुस्कुराकर बोलीं, "राहुल, आज जल्दी उठ गया? अच्छा है, कॉलेज टाइम से पहुंच जाएगा।" मैंने हंसकर कहा, "हां दीदी, कल रात देर तक पढ़ाई कर रहा था।" हम दोनों साथ बैठकर चाय पीते थे, और ये हमारी रोज की आदत थी।
प्रिया दीदी 23 साल की थीं, और शहर में ही एक छोटी कंपनी में जॉब करती थीं। मैं 19 का था, कॉलेज का पहला साल चल रहा था। घर छोटा सा था, दो कमरे, और हम भाई-बहन हमेशा से करीब थे। बचपन से ही दीदी मेरी हर समस्या सुलझाती थीं, चाहे स्कूल की पढ़ाई हो या दोस्तों के झगड़े।
उस दिन कॉलेज से लौटकर मैं थका हुआ था। दीदी शाम को घर आईं, और हमने साथ डिनर बनाया। वो बताती रहीं अपने ऑफिस की कहानियां, और मैं सुनता रहा। रात को टीवी देखते हुए हम सोफे पर बैठे थे, और बाहर बारिश शुरू हो गई थी।
बारिश की आवाज़ कमरे में गूंज रही थी, और हम दोनों चुपचाप बैठे थे। दीदी ने अचानक कहा, "राहुल, तू बड़ा हो गया है न? कभी सोचा है लाइफ के बारे में?" मैंने चौंककर पूछा, "क्या मतलब दीदी?" वो हल्के से मुस्कुराईं, "बस ऐसे ही, रिलेशनशिप वगैरह।"
मैं थोड़ा झिझका, क्योंकि ऐसी बातें हम कभी नहीं करते थे। लेकिन दीदी हमेशा ओपन माइंडेड थीं। मैंने कहा, "दीदी, कॉलेज में लड़कियां हैं, लेकिन मैं ज्यादा बात नहीं करता। शायद डर लगता है।" वो बोलीं, "डरना कैसा? मैं तुझे बताती हूं, लड़कियों से कैसे बात करनी चाहिए।"
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उस रात हम देर तक बातें करते रहे। दीदी ने अपने एक्सपीरियंस शेयर किए, कैसे रिलेशनशिप में ट्रस्ट जरूरी होता है। मैं सुनता रहा, और पहली बार महसूस किया कि दीदी सिर्फ बहन नहीं, एक दोस्त भी हैं। अगले दिन सुबह, सब नॉर्मल था, लेकिन मेरे मन में कुछ बदलाव आया था।
शाम को दीदी ने कहा, "राहुल, आज हम घर पर ही मूवी देखें।" हमने एक रोमांटिक फिल्म लगाई, और सोफे पर बैठे। फिल्म में कुछ सीन ऐसे थे जो थोड़े इंटीमेट थे, और मैं असहज हो गया। दीदी ने नोटिस किया, "क्या हुआ? ऐसे शर्मा क्यों रहा है?"
मैंने हंसकर टाल दिया, लेकिन दीदी ने कहा, "अरे, ये सब नॉर्मल है। तू अभी बच्चा है क्या?" मैंने कहा, "नहीं दीदी, लेकिन मुझे इन चीजों का ज्यादा पता नहीं।" वो चुप हो गईं, फिर बोलीं, "अगर तू चाहे, तो मैं तुझे समझा सकती हूं।"
मेरा दिल तेज धड़कने लगा। मैंने पूछा, "कैसे?" दीदी ने मेरी आंखों में देखा, "ट्रस्ट कर, मैं तेरी बहन हूं। कभी गलत नहीं सिखाऊंगी।" उस पल में कुछ अनकहा सा था, जैसे कोई बॉन्ड और गहरा हो रहा था।
अगली शाम, घर में सन्नाटा था। दीदी ने कहा, "राहुल, आ कमरे में।" मैं गया, और वो बिस्तर पर बैठी थीं। "बैठ, बात करनी है।" मैं बैठ गया। दीदी ने धीरे से कहा, "लाइफ में फिजिकल इंटीमेसी भी जरूरी है। तुझे पता है न?"
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मैंने सिर हिलाया, लेकिन मन में घबराहट थी। दीदी ने मेरे हाथ पर हाथ रखा, "डरो मत। मैं तुझे स्टेप बाय स्टेप बताती हूं। सबसे पहले, टच का मतलब समझ।" उनका हाथ गर्म था, और मैं चुप रहा।
धीरे-धीरे दीदी ने बातें शुरू कीं। "देख, जब कोई लड़की तेरे करीब आए, तो ऐसे छूना चाहिए कि वो कम्फर्टेबल फील करे।" वो अपना हाथ मेरे कंधे पर रखकर दिखा रही थीं। मेरा मन उलझा हुआ था, लेकिन दीदी की आंखों में विश्वास था।
उस रात हम ज्यादा आगे नहीं बढ़े, सिर्फ बातें कीं। लेकिन अगले दिन, दीदी ने कहा, "आज प्रैक्टिस करें।" मैं हैरान था, "कैसे दीदी?" वो बोलीं, "मुझसे ही। मैं तेरी टीचर हूं।"
कमरे में लाइट हल्की थी। दीदी ने मुझे पास बुलाया, और मैं उनके बगल में बैठ गया। "सबसे पहले, आंखों में देखो।" मैंने देखा, और उनका चेहरा इतना करीब था। मन में एक अजीब सी उथल-पुथल थी, जैसे गलत और सही का द्वंद्व।
दीदी ने धीरे से मेरे गाल पर हाथ फेरा, "ऐसे टच करो, प्यार से।" मैंने वैसा ही किया। उनका स्पर्श नरम था, और मेरे शरीर में कुछ जाग रहा था। "अब किस," दीदी ने कहा, और अपना चेहरा पास किया।
मैं झिझक रहा था, लेकिन दीदी ने मुझे प्रोत्साहित किया। हमारा पहला किस हल्का सा था, जैसे कोई नया अनुभव। मन में गिल्ट था, लेकिन दीदी की आवाज़ ने शांत किया, "ये सब नॉर्मल है, राहुल। हम भाई-बहन हैं, लेकिन मैं तुझे सिखा रही हूं।"
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धीरे-धीरे हमारी बातें गहरी होती गईं। दीदी ने अपने कपड़े थोड़े ढीले किए, "देख, बॉडी को समझ।" मैंने पहली बार इतने करीब से देखा। उनका शरीर सुंदर था, और मैं कांप रहा था। दीदी ने कहा, "टच कर, फील कर।"
मेरा हाथ उनके स्तनों पर गया, और वो नरम थे। दीदी की सांसें तेज हो रही थीं। "अब नीचे," वो बोलीं। मैंने धीरे से उनके गुप्तांग को छुआ, और वो गीला लग रहा था। मन में उत्तेजना थी, लेकिन डर भी।
दीदी ने मुझे गाइड किया, "ऐसे मसाज करो, धीरे-धीरे।" मैं वैसा कर रहा था, और उनका शरीर प्रतिक्रिया दे रहा था। "अब इंसाइड," दीदी ने कहा। मेरा दिल जोर से धड़क रहा था। मैंने उंगली डाली, और वो गर्म थी।
दीदी कराह रही थीं, "हां, ऐसे। अब तू समझ।" हम दोनों के बीच का बॉन्ड अब अलग था। मैंने पूछा, "दीदी, ये सही है?" वो बोलीं, "ये हमारा सीक्रेट है, राहुल। मैं तुझे प्यार से सिखा रही हूं।"
उस रात हमने ज्यादा नहीं किया, लेकिन अगली शाम दीदी ने कहा, "आज पूरा सिखाती हूं।" कमरा अंधेरा था, सिर्फ एक लैंप जल रहा था। दीदी ने मुझे नंगा किया, और खुद भी। उनका नग्न शरीर देखकर मैं स्तब्ध था।
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दीदी ने मुझे बिस्तर पर लिटाया, "सबसे पहले फोरप्ले।" वो मेरे शरीर पर किस कर रही थीं, नीचे तक। मेरा लिंग सख्त हो गया था। दीदी ने उसे मुंह में लिया, और वो सेंसेशन अविश्वसनीय था। मैं कराह उठा।
"अब तू मेरे साथ," दीदी बोलीं। मैंने वैसा ही किया, उनके गुप्तांग को चाटा। वो स्वाद अजीब लेकिन उत्तेजक था। दीदी की आवाज़ें कमरे में गूंज रही थीं, "हां राहुल, ऐसे।"
फिर दीदी ने कहा, "अब मुख्य हिस्सा।" वो मेरे ऊपर आईं, और धीरे से मेरा लिंग अपनी चूत में डाला। वो गर्मी और कसावट अवर्णनीय थी। दीदी हिल रही थीं, "ऐसे मूव करो, धीरे-धीरे।"
मैंने वैसा किया, और हम दोनों के शरीर एक लय में थे। दीदी की आंखों में प्यार था, और मेरे मन में मिला-जुला भाव। हर थ्रस्ट के साथ नया अनुभव आ रहा था, जैसे कोई नई दुनिया।
दीदी ने गति बढ़ाई, "अब तेज, राहुल।" मैं तेज हो गया, और हम दोनों का क्लाइमेक्स करीब था। दीदी चीखीं, और मैं भी झड़ गया। हम हांफते हुए लेटे रहे, उनके शरीर की गर्मी मुझे घेरे हुए।
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उसके बाद कई रातें ऐसी ही गुजरीं। हर बार दीदी कुछ नया सिखातीं, जैसे अलग पोजीशन या ज्यादा इमोशनल कनेक्शन। एक रात, दीदी ने कहा, "आज पीछे से ट्राई करें।" मैंने वैसा किया, और वो अनुभव अलग था, ज्यादा इंटेंस।
दीदी की कराहें अब परिचित लगती थीं, लेकिन हर बार नई भावना जुड़ती। "राहुल, तू अब एक्सपर्ट हो गया," वो हंसकर बोलीं। मन में अब गिल्ट कम था, सिर्फ क्लोजनेस।
एक शाम, बारिश फिर हो रही थी। हम बिस्तर पर थे, और दीदी ने मुझे गले लगाया। "ये हमारा बॉन्ड है, राहुल। कभी मत भूलना।" मैंने उन्हें चूमा, और हम फिर एक हो गए।
उनकी चूत अब परिचित लगती थी, लेकिन हर बार नई उत्तेजना। मैंने धीरे-धीरे एंटर किया, और हमारी सांसें मिलीं। दीदी की आंखें बंद थीं, और मैं उनके चेहरे पर प्यार देख रहा था।
हम हिलते रहे, धीमे से तेज, और क्लाइमेक्स के बाद शांत लेटे। दीदी का हाथ मेरे सीने पर था, और बाहर बारिश की आवाज़।