बहन और ननद की छुपी चाहतें

सुबह के नौ बजे का समय था, जब मैं अपने घर की बालकनी में खड़ा होकर चाय की चुस्की ले रहा था। दिल्ली की इस व्यस्त कॉलोनी में, हर रोज की तरह गाड़ियों की आवाज़ और पड़ोसियों की बातचीत का शोर सुनाई दे रहा था। मैं राकेश हूँ, तेईस साल का, और पिछले कुछ महीनों से घर पर ही फ्रीलांस ग्राफिक डिजाइनिंग का काम कर रहा हूँ। आज का दिन भी वैसा ही था—नाश्ता करने के बाद कंप्यूटर पर काम शुरू करने की तैयारी, और शाम को दोस्तों से मिलने का प्लान।

घर में सब कुछ सामान्य चल रहा था। मेरी बहन रिया, जो मुझसे दो साल छोटी है, अपने पति के साथ ऊपर वाले फ्लोर पर रहती है। रिया की शादी को अभी एक साल ही हुआ है, और वो अब एक छोटी सी बुटीक चलाती है। उसका पति, अमित, एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, जो ज्यादातर घर से ही काम करता है। आज अमित किसी मीटिंग के लिए बाहर गया था, और रिया नीचे किचन में कुछ बना रही थी। मैं बालकनी से नीचे देखता हुआ सोच रहा था कि आज का काम जल्दी निपटा लूँ, ताकि शाम को आराम से घूम सकूँ।

तभी रिया की आवाज़ आई, "भैया, चाय पी ली? नीचे आओ न, मैंने नाश्ता बनाया है।" मैं मुस्कुराया और नीचे चला गया। रिया हमेशा की तरह हंसमुख थी, उसके चेहरे पर वो बचपन वाली शरारत अब भी दिखती थी। हम दोनों बचपन से ही बहुत करीब थे—स्कूल के दिनों में साथ खेलना, होमवर्क करना, और अब बड़े होकर भी वही दोस्ती। "हाँ, पी ली, लेकिन तेरे हाथ का नाश्ता मिस नहीं कर सकता," मैंने कहा और टेबल पर बैठ गया।

उस वक्त सोनिया भी वहाँ थी। सोनिया रिया की ननद है, अमित की छोटी बहन, जो कॉलेज में पढ़ रही है। वो इधर कुछ दिनों से हमारे घर पर ही रुकी हुई थी, क्योंकि उसका हॉस्टल बंद था। सोनिया उन्नीस साल की है, गोरी और स्लिम, लेकिन मैंने कभी उसके बारे में कुछ गलत नहीं सोचा। वो हमेशा घर में मदद करती, और रिया से बहुत घुली-मिली थी। "भैया, आज क्या प्लान है?" सोनिया ने पूछा, जबकि वो प्लेट्स सेट कर रही थी। मैंने बताया कि काम है, और हम तीनों ने साथ बैठकर नाश्ता किया।

नाश्ते के बाद मैं अपने कमरे में चला गया। काम में व्यस्त हो गया, लेकिन दिमाग में घर की छोटी-छोटी बातें घूम रही थीं। रिया और सोनिया की हंसी की आवाज़ नीचे से आ रही थी। वे दोनों बहुत अच्छी दोस्त बन गई थीं—रिया सोनिया को अपनी छोटी बहन जैसा मानती थी। मैं सोच रहा था कि परिवार कितना खुश है, कोई टेंशन नहीं, सब कुछ स्मूद चल रहा है। शाम को अमित लौटा, और हम सबने साथ डिनर किया। वो दिन ऐसे ही बीत गया, बिना किसी खास घटना के।

इसे भी पढ़ें: ननद की शादी में छिपी चाहतें

अगले कुछ दिनों में, घर का माहौल वैसा ही रहा। मैं अपना काम करता, रिया अपनी बुटीक जाती, सोनिया घर पर पढ़ाई करती या रिया की मदद करती। एक दोपहर, जब मैं लंच के लिए नीचे आया, तो देखा कि रिया और सोनिया सोफे पर बैठकर टीवी देख रही थीं। अमित बाहर था। "क्या देख रही हो?" मैंने पूछा। रिया ने कहा, "एक पुरानी फिल्म, तू भी बैठ न।" मैं उनके बीच में बैठ गया। फिल्म रोमांटिक थी, लेकिन हम तीनों हंसते-बोलते देख रहे थे।

उस वक्त मैंने पहली बार कुछ महसूस किया। सोनिया मेरे बगल में थी, और उसकी बांह मेरी बांह से छू रही थी। ये सामान्य था, लेकिन मेरे मन में एक अजीब सी हलचल हुई। मैंने खुद को झिड़का, ये क्या सोच रहा हूँ? रिया भी वहाँ थी, और वो मेरी बहन है। लेकिन वो पल गुजर गया, और हमने फिल्म खत्म की। शाम को सब कुछ नॉर्मल था। रात को सोते वक्त, मैं सोच रहा था कि शायद मैं ज्यादा सोच रहा हूँ। परिवार में ऐसे पल आते-जाते हैं।

फिर एक शाम हुई, जब अमित को अचानक ऑफिस से कॉल आया और उसे रात भर बाहर रहना पड़ा। रिया थोड़ी उदास थी, लेकिन सोनिया ने उसे चीयर किया। हम तीनों ने साथ डिनर किया। डिनर के बाद, रिया ने कहा, "भैया, आज रात हम लोग साथ में कोई गेम खेलें?" मैं सहमत हो गया। हम लूडो खेलने लगे। हंसी-मजाक में समय बीत रहा था। सोनिया की हंसी बहुत मीठी थी, और रिया की शरारतें हमें हंसाती रहीं।

इसे भी पढ़ें: परिवार की छिपी इच्छाएँ

खेलते-खेलते रात के ग्यारह बज गए। रिया थक गई थी, लेकिन सोनिया और मैं अभी भी एनर्जेटिक थे। रिया ने कहा, "मैं सोने जा रही हूँ, तुम लोग खेलो।" वो ऊपर चली गई। अब मैं और सोनिया अकेले थे। हमने खेल जारी रखा, लेकिन अब बातें पर्सनल होने लगीं। सोनिया ने पूछा, "भैया, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?" मैंने हंसकर मना किया। उसने अपनी कॉलेज लाइफ के बारे में बताया, कैसे लड़के उसके पीछे पड़ते हैं।

उसकी बातें सुनकर मेरे मन में एक अजीब सी उथल-पुथल हुई। वो इतने करीब बैठी थी कि उसकी सांस की गर्माहट महसूस हो रही थी। मैंने खुद को कंट्रोल किया, लेकिन वो पल लंबा खिंचता गया। अचानक सोनिया ने कहा, "भैया, तुम बहुत अच्छे हो। रिया दीदी कितनी लकी हैं कि उनका ऐसा भाई है।" उसके शब्दों में कुछ था जो मुझे छू गया। मैंने उसकी आँखों में देखा, और वहाँ एक चमक थी।

उस रात मैं सो नहीं पाया। मन में सोनिया की बातें घूम रही थीं। अगले दिन, अमित वापस आ गया, और सब नॉर्मल हो गया। लेकिन अब मैं सोनिया को अलग नजर से देखने लगा था। रिया से तो हमेशा की तरह बातें होतीं, लेकिन सोनिया के साथ एक अनकहा तनाव था। एक दोपहर, जब घर में कोई नहीं था सिवाय हम तीनों के, रिया किचन में थी, और सोनिया मेरे कमरे में आई। "भैया, तुम्हारा कंप्यूटर इस्तेमाल कर सकती हूँ? मेरा लैपटॉप चार्ज नहीं है।"

मैंने हाँ कहा, और वो मेरे बगल में बैठ गई। जैसे ही वो टाइप करने लगी, उसकी उंगलियाँ मेरी उंगलियों से छुईं। वो रुक गई, और हमारी नजरें मिलीं। उस पल में कुछ हुआ—एक चिंगारी जैसा। मैंने अपना हाथ पीछे खींचा, लेकिन सोनिया ने मुस्कुराकर कहा, "सॉरी भैया।" लेकिन उसकी आँखों में वो मुस्कान कुछ और कह रही थी। रिया की आवाज़ आई, और वो चली गई।

इसे भी पढ़ें: ननद की शादी में छिपी आग

उस घटना के बाद, मेरे मन में कन्फ्लिक्ट बढ़ गया। सोनिया मेरी बहन की ननद है, परिवार का हिस्सा। लेकिन वो आकर्षण रोक नहीं पा रहा था। रिया से भी मैं करीब महसूस करने लगा था—बचपन की वो दोस्ती अब कुछ और रंग ले रही थी। एक शाम, जब अमित बाहर था, रिया और सोनिया दोनों मेरे कमरे में आईं। हम बातें करने लगे। रिया ने कहा, "भैया, याद है बचपन में हम कैसे साथ सोते थे?" सोनिया ने हंसकर कहा, "मैं भी शामिल होना चाहती हूँ ऐसी यादों में।"

बातों-बातों में माहौल गर्म होने लगा। रिया मेरे बगल में लेट गई, जैसे पुराने दिनों में, और सोनिया दूसरी तरफ। हमारी बॉडीज छू रही थीं, लेकिन कोई कुछ नहीं बोल रहा था। मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई। रिया ने धीरे से मेरी छाती पर हाथ रखा, "भैया, तुम्हें पता है न, मैं तुमसे कितना प्यार करती हूँ?" सोनिया ने भी अपना हाथ मेरे कंधे पर रखा।

उस पल में सब कुछ बदल गया। मैंने रिया को अपनी तरफ खींचा, और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो चौंकी नहीं, बल्कि जवाब दिया। सोनिया देख रही थी, और फिर वो भी करीब आई। मैंने सोनिया को भी吻 किया। हम तीनों के बीच एक अजीब सी ऊर्जा थी—प्यार, इच्छा, और एक गुप्त बंधन। रिया के कपड़े धीरे-धीरे उतरने लगे, उसके शरीर की गर्माहट मुझे मदहोश कर रही थी।

सोनिया ने मेरी शर्ट उतारी, और उसके हाथ मेरे शरीर पर घूमने लगे। रिया की चूचियाँ नरम और गर्म थीं, मैंने उन्हें चूसा, और वो सिसक उठी। "भैया... आह..." उसकी आवाज़ में वो पुराना प्यार था, लेकिन अब वो इच्छा में डूबा हुआ। सोनिया की चूत को मैंने छुआ, वो गीली हो चुकी थी। हम तीनों बिस्तर पर थे, एक-दूसरे को छूते, चूमते।

इसे भी पढ़ें: देवर की छिपी आग

मैंने रिया को नीचे लिटाया, और अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटा। वो कराह रही थी, "भैया, और... пожалуйста..." सोनिया मेरे लंड को मुँह में ले रही थी, उसकी जीभ की हरकत मुझे पागल कर रही थी। फिर मैंने सोनिया को घुमाया, और उसकी चूत में अपना लंड डाला। वो चीखी, लेकिन खुशी से। रिया देख रही थी, और खुद को छू रही थी।

हमारा ये खेल घंटों चला। कभी मैं रिया को चोदता, कभी सोनिया को। उनके शरीर की खुशबू, उनकी सिसकियाँ, सब कुछ नया और रोमांचक था। रिया ने कहा, "भैया, ये हमारा राज रहेगा।" सोनिया ने सहमति में सिर हिलाया। उस रात के बाद, हमारे बीच एक नया रिश्ता बन गया।

अगले दिनों में, मौके मिलते ही हम मिलते। एक दोपहर, जब अमित बाहर था, रिया और सोनिया मेरे कमरे में आईं। इस बार हमने और एक्सप्लोर किया। मैंने रिया की गांड में उंगली डाली, और वो उछल पड़ी। सोनिया ने मेरे लंड पर अपनी चूत रगड़ी, बिना डाले। हमारी इच्छाएँ बढ़ती जा रही थीं, हर बार कुछ नया।

इसे भी पढ़ें: माँ और चाची की गहराई

एक शाम, हम तीनों ने साथ में शावर लिया। पानी की बौछार के नीचे, उनके गीले शरीर को छूना अविस्मरणीय था। रिया की चूत को मैंने वहाँ चाटा, पानी के साथ उसका रस मिश्रित। सोनिया ने मुझे पीछे से पकड़ा, और हमने वहाँ ही सेक्स किया। भावनाएँ उफान पर थीं—प्यार, गिल्ट, लेकिन सबसे ज्यादा सुख।

समय बीतता गया, लेकिन हमारा ये बंधन मजबूत होता गया। हर मिलन में नई गहराई आती, नई भावनाएँ। रिया की आँखों में वो बहन वाला प्यार अब प्रेमिका जैसा हो गया था। सोनिया की शरारतें अब कामुक हो गई थीं। हम जानते थे ये गलत है, लेकिन रोक नहीं पा रहे थे।

एक रात, अमित के बाहर होने पर, हम फिर मिले। इस बार रिया ने सोनिया की चूत चाटी, और मैं देखता रहा। फिर मैंने दोनों को एक साथ चोदा। उनकी सिसकियाँ कमरे में गूंज रही थीं। "भैया... सोनिया... आई लव यू..." रिया की आवाज़। हम थककर लेटे, एक-दूसरे को गले लगाए।

उस पल में सब कुछ शांत था, सिर्फ हमारी सांसें और दिल की धड़कनें।