दोस्तों की छाया

सुबह की धूप बालकनी से छनकर आ रही थी, और मैं अपनी चाय की प्याली थामे बैठी थी। रोज की तरह, अजय ऑफिस जाने की तैयारी में लगा था, जबकि मैं घर के कामों की लिस्ट बना रही थी। दिल्ली का यह छोटा सा अपार्टमेंट हमारा दुनिया था, जहां हर दिन एक जैसा लगता था – नाश्ता बनाना, कपड़े धोना, और शाम को अजय की वापसी का इंतजार।

आज शनिवार था, इसलिए अजय थोड़ा रिलैक्स्ड लग रहा था। वह किचन में आया और मेरे कंधे पर हाथ रखकर बोला, "रिया, आज शाम विक्रम और रोहन आने वाले हैं। पुराने दिनों की यादें ताजा करेंगे। तुम कुछ स्पेशल बनाओ न?" मैंने मुस्कुराकर हामी भरी, क्योंकि मुझे पता था कि उसके दोस्तों का आना मतलब घर में हंसी-मजाक की महफिल सजना।

विक्रम और रोहन अजय के कॉलेज के दोस्त थे, और हमारी शादी के बाद भी वे हमारे जीवन का हिस्सा बने रहे। विक्रम एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, हमेशा जोक्स मारने वाला, जबकि रोहन बिजनेस करता था और थोड़ा शांत स्वभाव का था। मैंने कभी उनके साथ ज्यादा समय नहीं बिताया था, लेकिन अजय की खुशी के लिए मैं हमेशा उन्हें अच्छे से होस्ट करती थी।

दोपहर में मैंने बाजार से सामान लाकर खाना तैयार किया। चिकन करी, नान और सलाद – सब कुछ वैसा जैसा अजय को पसंद था। घर को साफ-सुथरा किया, और खुद को एक साधारण साड़ी में सजाया। शाम होने से पहले अजय घर लौटा और बोला, "रिया, तुम हमेशा की तरह परफेक्ट हो। दोस्त आएंगे तो इम्प्रेस हो जाएंगे।"

दरवाजे की घंटी बजी, और विक्रम ने जोर से आवाज दी, "अजय भाई, खोलो दरवाजा!" मैंने दरवाजा खोला तो दोनों अंदर आए, हाथों में बीयर की बॉटल्स लिए। विक्रम ने मुझे देखकर मुस्कुराया और कहा, "भाभी, आप तो दिन-ब-दिन खूबसूरत होती जा रही हैं।" रोहन ने भी सिर हिलाकर अभिवादन किया।

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हम सब लिविंग रूम में बैठे। अजय ने बीयर खोली और सबको दी। मैंने अपना जूस का ग्लास लिया, क्योंकि मुझे शराब पसंद नहीं थी। बातें शुरू हुईं – कॉलेज की यादें, पुरानी ट्रिप्स, और हंसी-मजाक। विक्रम ने एक जोक सुनाया, जिस पर सब हंस पड़े। मैं भी शामिल थी, लेकिन ध्यान रख रही थी कि खाना समय पर सर्व हो।

रात गहराने लगी थी। डिनर के बाद अजय ने कहा, "चलो, एक गेम खेलते हैं। ट्रुथ ऑर डेयर?" विक्रम और रोहन उत्साहित हो गए, लेकिन मैं थोड़ा हिचकिचाई। फिर भी, अजय की खुशी के लिए मैंने हां कह दी। पहला राउंड विक्रम का था, और उसने ट्रुथ चुना। अजय ने पूछा, "कभी किसी दोस्त की वाइफ पर क्रश आया?" विक्रम हंसकर बोला, "हां, लेकिन बताऊंगा नहीं!"

माहौल थोड़ा गर्म हो रहा था। रोहन की बारी आई, और उसने डेयर चुना। विक्रम ने कहा, "भाभी को एक कॉम्प्लिमेंट दो, लेकिन कुछ स्पेशल।" रोहन ने मेरी ओर देखा और कहा, "रिया, तुम्हारी मुस्कान ऐसी है कि पूरा कमरा रोशन हो जाता है।" मैंने शरमाकर नजरें झुका लीं, लेकिन अंदर से एक अजीब सा एहसास हुआ।

अजय की बारी पर उसने ट्रुथ चुना। विक्रम ने पूछा, "अजय, अगर रिया को कोई और छुए तो क्या करोगे?" अजय हंसकर बोला, "दोस्त अगर हो तो शेयरिंग इज केयरिंग!" सब हंस पड़े, लेकिन मुझे लगा कि यह मजाक थोड़ा आगे बढ़ रहा था। फिर मेरी बारी आई, और मैंने ट्रुथ चुनी। रोहन ने पूछा, "कभी अजय के अलावा किसी पर आकर्षण महसूस किया?"

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मैंने झिझकते हुए कहा, "नहीं, कभी नहीं।" लेकिन विक्रम ने जोर देकर कहा, "सच बोलो भाभी!" अजय ने मुझे देखा और कहा, "आराम से रिया, यह सिर्फ गेम है।" रात और गहरा रही थी, और बीयर की बॉटल्स खाली हो रही थीं। मैंने महसूस किया कि नजरें अब मुझ पर ज्यादा टिक रही थीं।

गेम जारी रहा, और अब डेयर ज्यादा हो रहे थे। विक्रम ने अजय से कहा, "डेयर: रिया को किस करो सबके सामने।" अजय ने हंसकर मुझे अपनी ओर खींचा और एक हल्का सा किस किया। लेकिन फिर रोहन की बारी पर विक्रम ने कहा, "रोहन, रिया के साथ डांस करो।" रोहन ने मेरा हाथ पकड़ा, और हमने लिविंग रूम में धीमे संगीत पर डांस किया। उसका हाथ मेरी कमर पर था, और मैंने महसूस किया कि अजय देख रहा था, लेकिन कुछ नहीं बोला।

मुझे अंदर से एक कशमकश हो रही थी। यह सब मजाक लग रहा था, लेकिन रोहन की सांसें मेरे करीब आ रही थीं। डांस खत्म होने पर विक्रम ने ताली बजाई और कहा, "वाह भाभी, तुम तो प्रो हो!" अजय ने भी हंसकर कहा, "हां, मेरी वाइफ है ही ऐसी।" लेकिन उसकी आंखों में कुछ अलग चमक थी, जैसे वह इसे एंजॉय कर रहा हो।

रात के ग्यारह बज चुके थे। विक्रम ने कहा, "अजय, आज रुक जाते हैं यहां। ड्राइव करने का मूड नहीं।" अजय ने सहमति दी, और मैंने गेस्ट रूम तैयार किया। लेकिन सोने से पहले वे फिर बैठे और बातें करने लगे। मैं चाय बनाने किचन गई, तो विक्रम पीछे आया और बोला, "भाभी, मदद करूं?" मैंने मना किया, लेकिन वह रुका रहा, मेरी ओर देखते हुए।

उसकी नजरें अब अलग लग रही थीं। उसने कहा, "रिया, तुम सच में बहुत सुंदर हो। अजय लकी है।" मैंने अनसुना करने की कोशिश की, लेकिन दिल तेज धड़क रहा था। वापस लिविंग रूम में आकर मैंने चाय दी, और अजय ने मुझे अपनी बगल में बैठाया। रोहन ने कहा, "अजय, याद है कॉलेज में हम शेयरिंग करते थे सब?" अजय हंस पड़ा, "हां यार, वो दिन!"

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मुझे लगा कि बातें अब पर्सनल हो रही थीं। विक्रम ने अजय से कहा, "अब तो शादीशुदा हो, लेकिन क्या कभी सोचा कि..." वह रुक गया, लेकिन अजय ने पूरा किया, "शेयरिंग?" सब हंस पड़े, लेकिन मैं असहज हो गई। अजय ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहा, "रिया, रिलैक्स। ये सिर्फ मजाक है।" लेकिन उसकी आंखों में चुनौती थी।

धीरे-धीरे बातें और गहरी होने लगीं। विक्रम ने कहा, "अजय, अगर हम रिया को थोड़ा टच करें तो?" अजय ने देखा मुझे और बोला, "अगर रिया को कोई ऐतराज न हो।" मैं स्तब्ध थी। क्या कहूं? अंदर से विरोध था, लेकिन अजय की उम्मीद भरी नजरों ने मुझे चुप कर दिया। रोहन ने मेरी ओर बढ़कर मेरा हाथ पकड़ा और कहा, "रिया, तुम्हें बुरा तो नहीं लग रहा?"

मैंने सिर हिला दिया, लेकिन दिल में तूफान था। विक्रम अब मेरे दूसरी तरफ आ गया, और उसने मेरे बालों को छुआ। "कितने सॉफ्ट हैं," वह बोला। अजय देख रहा था, और उसकी सांसें तेज हो रही थीं। मुझे लगा कि यह सब उसकी फैंटसी का हिस्सा था, जो वह कभी मुझसे शेयर नहीं किया।

कमरे में सन्नाटा छा गया। रोहन ने मेरी गर्दन पर हाथ फेरा, और मैंने आंखें बंद कर लीं। विक्रम ने मेरे ब्लाउज के बटन को छुआ, और धीरे से खोलने लगा। अजय ने कहा, "रिया, अगर नहीं चाहती तो रुक जाओ।" लेकिन उसकी आवाज में उत्साह था। मैं चुप रही, और यह मेरी सहमति बन गई।

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विक्रम ने मेरे ब्लाउज को उतारा, और मेरी ब्रा नजर आई। रोहन ने मेरे स्तनों को छुआ, हल्के से दबाया। मैं सिहर उठी। अजय अब खड़ा हो गया और हमें देखने लगा। विक्रम ने कहा, "अजय, तेरी वाइफ कितनी हॉट है यार।" रोहन ने मेरी साड़ी खोलनी शुरू की, और मैं नंगी होने लगी।

अब मैं बिस्तर पर थी, तीनों पुरुषों के बीच। विक्रम ने मेरे होंठों पर किस किया, गहरा और जोशीला। रोहन मेरे शरीर के निचले हिस्से को सहला रहा था। अजय ने मेरे पैरों को चूमा, और कहा, "रिया, तुम मेरी हो, लेकिन आज शेयर कर रहा हूं।" मुझे अपमान महसूस हो रहा था, लेकिन साथ ही एक अजीब उत्तेजना भी।

विक्रम ने अपना शर्ट उतारा और मुझे अपनी ओर खींचा। उसका शरीर मजबूत था, और वह मेरे ऊपर आ गया। रोहन ने मेरी जांघों को फैलाया, और अपनी जीभ से मुझे छुआ। मैं कराह उठी, दर्द और सुख के मिश्रण में। अजय देख रहा था, अपना हाथ नीचे ले जाते हुए।

विक्रम ने प्रवेश किया, धीरे लेकिन गहराई से। मैंने चीख मारी, लेकिन वह रुका नहीं। रोहन अब मेरे स्तनों को चूस रहा था, निप्पल्स को काटते हुए। अजय ने कहा, "और तेज विक्रम, इसे रंडी की तरह चोदो।" शब्द सुनकर मैं सिहर गई, लेकिन शरीर ने साथ दे दिया।

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विक्रम के बाद रोहन की बारी आई। वह ज्यादा कोमल था, लेकिन गहराई में उतरता था। उसने मुझे उल्टा किया और पीछे से प्रवेश किया। मैंने महसूस किया कि अजय अब शामिल हो रहा था, मेरे मुंह में अपना लिंग डालकर। तीनों एक साथ, मुझे हर तरफ से घेरकर।

रात भर यह सिलसिला चला। कभी विक्रम, कभी रोहन, और अजय बीच-बीच में। हर बार नई पोजीशन, नई उत्तेजना। मुझे लग रहा था कि मैं उनकी वस्तु बन गई हूं, लेकिन अंदर से एक स्वतंत्रता का एहसास भी था। सुबह होने से पहले, जब थकान हावी हुई, विक्रम ने आखिरी बार मुझे चूमा और कहा, "रिया, तुम अविश्वसनीय हो।"

रोहन ने मेरे शरीर को सहलाया, और अजय ने मुझे अपनी बाहों में लिया। हम सब एक साथ लेटे थे, सांसें मिली हुईं। विक्रम की उंगलियां अभी भी मेरी त्वचा पर घूम रही थीं, और रोहन की सांसें मेरी गर्दन पर महसूस हो रही थीं।