गर्मी की रात में छिपी चाहतें

गर्मी की उस शाम को मैंने किचन में डिनर की तैयारी की थी, जैसे हर रोज़ करती हूँ। बाहर आसमान में बादल छाए हुए थे, लेकिन बारिश की कोई उम्मीद नहीं दिख रही थी। राजेश ऑफिस से थका-हारा लौटे थे, और आरव अपना होमवर्क खत्म करके टीवी देख रहा था।

मैंने सब्जी काटते हुए सोचा कि आज का दिन कितना साधारण था। सुबह उठकर नाश्ता बनाया, आरव को स्कूल भेजा, फिर घर के काम निपटाए। राजेश ने फोन पर बताया था कि मीटिंग लंबी चली, इसलिए देर हो गई।

टेबल पर खाना परोसते हुए मैंने आरव से पूछा, "बेटा, आज स्कूल में क्या सीखा?" वह उत्साह से बताने लगा, कुछ गणित की पहेलियों के बारे में। राजेश मुस्कुराते हुए सुन रहे थे, अपनी प्लेट में रोटी तोड़ते हुए।

खाने के बाद आरव को सुलाने का समय आया। वह थोड़ा नखरा करता है, लेकिन आज जल्दी सो गया। मैंने उसके कमरे की लाइट बंद की और वापस लिविंग रूम में आई, जहां राजेश सोफे पर बैठे अखबार पढ़ रहे थे।

मैं उनके पास बैठ गई, थोड़ी थकान महसूस करते हुए। "आज बहुत गर्मी है न?" मैंने कहा। राजेश ने सहमति में सिर हिलाया, "हाँ, एसी भी ठीक से काम नहीं कर रहा।" हम दोनों ने थोड़ी देर मौसम की बात की।

रात गहराने लगी थी। मैंने बर्तन साफ किए और बेडरूम में आई। राजेश पहले से बिस्तर पर लेटे थे, फोन स्क्रॉल करते हुए। मैंने अपना नाइट गाउन पहना और उनके बगल में लेट गई।

बाहर से क्रिकेट की आवाज़ें आ रही थीं, पड़ोसी बच्चे खेल रहे थे। मैंने सोचा कि हमारी ज़िंदगी कितनी नियमित है। शादी के दस साल हो गए, आरव अब बड़ा हो रहा है, लेकिन हम दोनों का रिश्ता वही पुराना सा लगता है।

राजेश ने फोन रखा और मेरी तरफ मुड़े। "सीमा, आज थक गई हो?" उनकी आवाज़ में चिंता थी। मैंने मुस्कुराकर कहा, "थोड़ी बहुत, लेकिन ठीक हूँ। तुम्हारा दिन कैसा रहा?"

वह बताने लगे ऑफिस की बातें, कोई प्रोजेक्ट की डेडलाइन के बारे में। मैं सुनती रही, बीच-बीच में सवाल पूछती। ऐसे पलों में मुझे लगता है कि हम अभी भी एक-दूसरे से जुड़े हैं, भले ही रोज़मर्रा की भागदौड़ में कम बात होती हो।

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रात के ग्यारह बज चुके थे। गर्मी इतनी थी कि पंखे की हवा भी गर्म लग रही थी। मैंने करवट बदली, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। राजेश भी जागे हुए थे, शायद वही सोच रहे थे।

अचानक उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा, बस सहारा देने की तरह। "नींद नहीं आ रही?" मैंने पूछा। वह बोले, "नहीं, ये गर्मी परेशान कर रही है।" हम दोनों हँस पड़े, इस छोटी सी शिकायत पर।

मैंने सोचा कि कितने दिन हो गए हमने ऐसी बातें नहीं कीं। आरव के आने के बाद हमारी दुनिया उसके इर्द-गिर्द घूमने लगी थी। लेकिन आज रात कुछ अलग सा लग रहा था, शायद गर्मी की वजह से।

राजेश ने मेरी तरफ देखा, उनकी आँखों में वही पुरानी चमक थी। "याद है, शादी के शुरुआती दिनों में ऐसी गर्म रातों में हम क्या करते थे?" उन्होंने धीरे से कहा। मैं शरमा गई, लेकिन मुस्कुराई।

"हाँ, याद है। लेकिन अब तो बच्चा है घर में।" मैंने कहा, लेकिन मेरे मन में भी वही पुरानी यादें घूम रही थीं। राजेश ने मेरे हाथ को अपने हाथ में लिया, धीरे से दबाया।

उनका स्पर्श गर्म था, लेकिन आरामदायक। मैंने अपनी आँखें बंद कीं, उस पल को महसूस करते हुए। बाहर बारिश की पहली बूँदें गिरीं, लेकिन गर्मी अभी भी कम नहीं हुई थी।

राजेश मेरे और करीब आए, उनके साँसें मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थीं। "सीमा, मैं तुम्हें कितना मिस करता हूँ," उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा। मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गई।

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मैंने उनकी आँखों में देखा, वहाँ प्यार और इच्छा दोनों थे। धीरे से मैंने अपना सिर उनके सीने पर रख दिया, उनकी दिल की धड़कन सुनते हुए। यह पल इतना अंतरंग था कि शब्दों की ज़रूरत नहीं लग रही थी।

उनके हाथ मेरे बालों में फिरने लगे, धीरे-धीरे। मैंने महसूस किया कि मेरे शरीर में एक पुरानी सी उत्तेजना जाग रही है। गर्मी की रात अब और गर्म लगने लगी थी।

राजेश ने मुझे अपनी बाहों में खींच लिया, उनके होंठ मेरे माथे पर टिक गए। मैंने विरोध नहीं किया, बल्कि खुद को उनके और करीब कर लिया। हमारी साँसें एक हो रही थीं।

धीरे से उनके होंठ मेरे होंठों पर आए, एक नरम चुंबन। मैंने आँखें बंद कर लीं, उस स्वाद को फिर से महसूस करते हुए। कितने समय बाद ऐसा लगा कि हम सिर्फ़ एक-दूसरे के लिए हैं।

मेरे हाथ उनकी पीठ पर फिसलने लगे, उनकी शर्ट के नीचे। उनकी त्वचा गर्म थी, पसीने से थोड़ी नम। लेकिन यह सब इतना नैचुरल लग रहा था, जैसे हमारी ज़िंदगी का हिस्सा।

राजेश ने मेरे नाइट गाउन की स्ट्रैप को धीरे से सरकाया, मेरे कंधे को चूमा। मैंने एक गहरी साँस ली, अपने शरीर की प्रतिक्रिया को महसूस करते हुए। मन में थोड़ा संकोच था, लेकिन इच्छा ज़्यादा मज़बूत थी।

"आरव सो रहा है न?" मैंने फुसफुसाकर पूछा। राजेश ने हाँ में सिर हिलाया, "हाँ, गहरी नींद में।" यह सुनकर मैंने खुद को छोड़ दिया, उनकी बाहों में।

उनके हाथ अब मेरे शरीर पर घूम रहे थे, हर स्पर्श में पुरानी यादें ताज़ा कर रहे थे। मैंने उनकी शर्ट उतार दी, उनके सीने को छुआ। उनकी मांसपेशियाँ अभी भी मज़बूत लग रही थीं।

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हम दोनों बिस्तर पर लेटे हुए थे, एक-दूसरे को एक्सप्लोर करते हुए। गर्मी अब एक बहाना लग रही थी, असली आग तो हमारे अंदर जल रही थी। मैंने उनके कान में कहा, "राजेश, मुझे तुम्हारी ज़रूरत है।"

उनकी आँखों में चमक आई, और उन्होंने मुझे और कसकर पकड़ लिया। हमारे शरीर एक हो गए, धीरे-धीरे लय में। हर गति में भावनाएँ उमड़ रही थीं, प्यार और जुनून का मिश्रण।

मैंने महसूस किया कि मेरी साँसें तेज़ हो रही हैं, शरीर में एक मीठा दर्द फैल रहा है। राजेश के स्पर्श हर जगह थे, मेरे स्तनों पर, कमर पर, जाँघों पर। मैंने खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया।

समय जैसे रुक सा गया था। हमारी मस्ती गर्मी की रात को और गर्म बना रही थी। बाहर बारिश तेज़ हो गई थी, लेकिन हमारी दुनिया अलग थी।

राजेश ने मेरे कान में फुसफुसाया, "तुम कितनी खूबसूरत हो, सीमा।" मैंने शरमाते हुए मुस्कुराया, और उन्हें चूमा। हमारा मिलन अब और गहरा हो रहा था।

मेरे शरीर में उत्तेजना की लहरें उठ रही थीं, हर पल नया अनुभव दे रही थीं। मैंने अपनी टाँगें उनकी कमर पर लपेट लीं, उन्हें और करीब खींचते हुए।

उनकी गतियाँ अब तेज़ हो गईं, लेकिन अभी भी कोमल। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं, उस आनंद को महसूस करते हुए जो सालों बाद फिर से जागा था।

हम दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे, साँसें फूलती हुईं। राजेश मेरे ऊपर लेट गए, हमारी साँसें मिल रही थीं। मैंने उनके बालों में उँगलियाँ फिराईं, शांत होकर।

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थोड़ी देर बाद हम अलग हुए, लेकिन बाहों में ही। गर्मी अब कम लग रही थी, बारिश की ठंडक कमरे में आ गई थी। मैंने सोचा कि ऐसी रातें हमें फिर से जोड़ती हैं।

राजेश ने मुझे देखा, "ये रात यादगार थी।" मैंने सहमति में सिर हिलाया, और उनके सीने पर सिर रख लिया। हमारी बातें अब धीमी हो गईं थीं।

नींद आने लगी थी, लेकिन मैं उस पल को जीना चाहती थी। राजेश के स्पर्श अभी भी मेरे शरीर पर थे, एक मीठी थकान छाई हुई थी।

बाहर बारिश रुक चुकी थी, लेकिन हवा ठंडी हो गई थी। मैंने चादर ओढ़ ली, राजेश के करीब सटकर। मन में संतुष्टि थी, हमारे रिश्ते की।

उन्होंने मेरे माथे पर एक चुंबन दिया, और हम दोनों नींद की आगोश में जाने लगे। लेकिन मेरे मन में अभी भी वही गर्माहट बाकी थी, जो रात भर जलती रही।

सुबह होने से पहले एक बार फिर हम जागे, गर्मी की वजह से। राजेश ने मुझे फिर से अपनी तरफ खींचा, और हमारी मस्ती दोबारा शुरू हो गई।

इस बार यह और ज़्यादा भावुक था, जैसे हम सालों की दूरी मिटा रहे हों। मैंने उनके हर स्पर्श को महसूस किया, अपनी इच्छाओं को खुलकर व्यक्त किया।

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हमारे शरीर फिर से एक हो गए, लय में। हर पल में नई ऊर्जा थी, पुरानी यादों का स्वाद। मैंने सोचा कि ये गर्मी की रात कितनी खास बन गई।

राजेश के हाथ मेरे शरीर के हर हिस्से को छू रहे थे, मुझे उत्तेजित करते हुए। मैंने भी उन्हें वैसे ही जवाब दिया, अपनी भावनाओं को छिपाए बिना।

चरम पर पहुँचते हुए हम दोनों ने एक-दूसरे का नाम पुकारा, प्यार से। थकान अब मीठी लग रही थी, संतुष्टि भरी।

हम लेटे रहे, बातें करते हुए। राजेश ने बताया कि कैसे वह मुझे रोज़ मिस करते हैं, काम की वजह से। मैंने भी अपनी भावनाएँ शेयर कीं।

यह बातचीत हमें और करीब ला रही थी, शारीरिक से ज़्यादा भावनात्मक स्तर पर। गर्मी की रात अब एक याद बन चुकी थी।

आरव के जागने से पहले हमने खुद को समेटा, लेकिन मन में वही चाहत बाकी थी। राजेश ने मुझे गले लगाया, वादा किया कि ऐसी रातें फिर आएँगी।

मैं मुस्कुराई, उस वादे पर विश्वास करते हुए। हमारी ज़िंदगी फिर से साधारण हो गई, लेकिन अंदर से कुछ बदल चुका था।

दिन चढ़ने लगा, लेकिन रात की यादें ताज़ा थीं। मैंने किचन में चाय बनाई, राजेश को दी। उनकी आँखों में वही चमक थी।

आरव उठा, स्कूल की तैयारी करने लगा। हम दोनों ने उसे देखा, मुस्कुराते हुए। हमारा परिवार पूरा था, लेकिन हमारा रिश्ता अब और मज़बूत।

शाम को फिर गर्मी बढ़ी, लेकिन अब डर नहीं लग रहा था। राजेश घर लौटे, और हमारी नज़रें मिलीं। रात फिर से विशेष होने वाली थी।

डिनर के बाद आरव सो गया, और हम बेडरूम में आए। राजेश ने दरवाज़ा बंद किया, मुझे अपनी तरफ खींचा।

इस बार हमने ज़्यादा बात नहीं की, बस एक-दूसरे में खो गए। उनके स्पर्श फिर से जादू कर रहे थे, मेरे शरीर को जगा रहे थे।

हमारी मस्ती अब एक आदत बन रही थी, हर रात नई। गर्मी की वजह से या प्यार की, लेकिन यह हमें जीवंत बना रही थी।

राजेश ने मुझे उठाया, दीवार के सहारे खड़ा किया। उनका तरीका नया था, उत्तेजक। मैंने खुद को उनके हवाले कर दिया।

हर गति में वैरायटी थी, कभी कोमल, कभी तेज़। मेरी साँसें तेज़ हो गईं, शरीर में आग लगी हुई थी।

हम चरम पर पहुँचे, एक साथ। थककर लेट गए, लेकिन संतुष्ट। राजेश ने मेरे कान में कहा, "तुम मेरी ज़िंदगी हो।"

मैंने उन्हें चूमा, उस भावना को महसूस करते हुए। रात गहरा रही थी, लेकिन हमारी चाहतें अभी जागी हुई थीं।

एक बार फिर हमने शुरुआत की, इस बार और धीरे। हर स्पर्श में भावनाएँ थीं, कन्फ्लिक्ट नहीं, सिर्फ़ प्यार।

मेरे मन में कोई संकोच नहीं था, बस खुशी। राजेश के साथ यह पल अनमोल लग रहे थे।

हमारी साँसें मिल रही थीं, शरीर एक। बाहर गर्म हवा चल रही थी, लेकिन हमारी दुनिया ठंडी और शांत।

राजेश ने मेरे स्तनों को चूमा, धीरे से। मैंने कराहते हुए उनका नाम लिया, उत्तेजना में।

यह सीन नया था, पिछले से अलग। हर बार कुछ नया अनुभव, नई भावना।

चरम आने से पहले हम रुके, एक-दूसरे को देखा। आँखों में प्यार था, इच्छा थी।

फिर हम जारी रखे, लय में। मेरे शरीर में लहरें उठ रही थीं, मीठा दर्द।

हम एक साथ खत्म हुए, संतुष्टि से भरे। राजेश मेरे बगल में लेट गए, हाथ मेरे हाथ में।

नींद आने लगी, लेकिन मैं जागना चाहती थी। यह रात अभी खत्म नहीं हुई थी।

राजेश ने फिर से मुझे छुआ, और हमारी मस्ती जारी रही, गर्मी की रात में।