चचेरे भाई की छिपी चाहत
गर्मियों की दोपहर थी, जब सूरज की किरणें खिड़की से छनकर कमरे में फैल रही थीं। मैं रिया, अपनी स्टडी टेबल पर बैठी किताबें संभाल रही थी, क्योंकि कॉलेज की छुट्टियां चल रही थीं और घर पर कुछ काम करके समय काटना पड़ता था। बाहर से बच्चों की खेलने की आवाजें आ रही थीं, और माँ रसोई में शाम की चाय की तैयारी कर रही थीं।
हमारा घर दिल्ली के एक शांत इलाके में है, जहां परिवार के सभी सदस्य साथ रहते हैं। पापा ऑफिस जाते हैं, और मैं घर की इकलौती बेटी हूं, 22 साल की हो चुकी हूं। इन छुट्टियों में मेरा चचेरा भाई अक्षय हमारे घर आया हुआ था, जो लखनऊ से आया था अपनी जॉब की ट्रेनिंग के लिए। वो 24 साल का है, और बचपन से ही हमारी अच्छी बनती है, जैसे भाई-बहन से ज्यादा दोस्त।
अक्षय को देखकर हमेशा लगता था कि वो बड़ा हो गया है, लेकिन हमारी बातें अब भी वैसी ही थीं – फिल्मों की चर्चा, पुरानी यादें और हंसी-मजाक। आज सुबह वो लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था, और मैंने उसे चाय का कप दिया था। "धन्यवाद, रिया," उसने मुस्कुराकर कहा, और मैंने बस सिर हिलाया। घर में सब कुछ सामान्य चल रहा था, जैसे हर दिन।
शाम होने वाली थी, और मैं अपने कमरे में कपड़े बदल रही थी। बाहर हॉल में अक्षय और चाचा-चाची टीवी देख रहे थे। मैंने सोचा कि थोड़ी देर छत पर जाकर हवा खाऊं, क्योंकि गर्मी से मन उचट रहा था। सीढ़ियां चढ़ते हुए मैंने देखा कि अक्षय भी ऊपर आ रहा था, शायद फोन पर बात करने के लिए। "क्या कर रही हो?" उसने पूछा, और मैंने कहा, "बस, थोड़ी ताजी हवा।"
छत पर हम दोनों खड़े हो गए, और शाम की हल्की हवा चल रही थी। अक्षय ने अपनी जॉब के बारे में बताना शुरू किया, कैसे वो नई जगह पर एडजस्ट कर रहा है। मैं सुन रही थी, और बीच-बीच में अपनी कॉलेज की बातें शेयर कर रही थी। हमारी बातें लंबी खिंच गईं, और सूरज डूबने लगा था। उसकी आंखों में एक अलग सी चमक थी, लेकिन मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
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रात का खाना सबने साथ खाया, और फिर सब अपने-अपने कमरों में चले गए। मैं अपने बिस्तर पर लेटी किताब पढ़ रही थी, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। अक्षय का कमरा मेरे बगल वाला था, और रात के सन्नाटे में कभी-कभी उसकी आवाजें सुनाई देती थीं। मैंने सोचा कि शायद वो फोन पर है, लेकिन मन में एक अजीब सी बेचैनी थी, जैसे कुछ अधूरा सा।
अगले दिन सुबह जल्दी उठी, क्योंकि माँ ने कहा था कि बाजार से कुछ सामान लाना है। अक्षय भी उठ चुका था, और हम दोनों साथ चले गए। रास्ते में वो मजाक कर रहा था, "तुम अब भी वैसी ही हो, रिया, हमेशा जल्दबाजी में।" मैं हंस पड़ी, और हमारी बातें जारी रहीं। बाजार से लौटकर घर पहुंचे, तो सब व्यस्त हो गए अपने कामों में।
दोपहर में मैं रसोई में मदद कर रही थी, और अक्षय बाहर बालकनी में खड़ा फोन कर रहा था। उसकी हंसी की आवाज अंदर तक आ रही थी, और मैंने एक बार उसकी तरफ देखा। वो लंबा और फिट था, लेकिन मैंने कभी उस बारे में नहीं सोचा था। शाम को हम सब पार्क गए, जहां परिवार के साथ समय बिताना अच्छा लगता था। अक्षय मेरे साथ चल रहा था, और हम पुरानी यादों में खो गए।
रात हुई, और घर में लाइट्स बंद होने लगीं। मैं अपने कमरे में थी, जब अचानक बिजली चली गई। बाहर से अक्षय की आवाज आई, "रिया, टॉर्च है क्या?" मैंने अपना फोन निकाला और लाइट जलाई। वो मेरे कमरे के दरवाजे पर आया, और हम दोनों हंसते हुए बिजली आने का इंतजार करने लगे। उसकी मौजूदगी में एक अजीब सा सन्नाटा था।
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बिजली आई, लेकिन अब नींद नहीं आ रही थी। मैं उठकर पानी पीने गई, और रसोई में अक्षय मिला। "तुम भी जाग रहे हो?" मैंने पूछा। उसने कहा, "हां, गर्मी से नींद नहीं आ रही।" हम बात करने लगे, और धीरे-धीरे बातें व्यक्तिगत होने लगीं। उसने अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में बताया, जो ब्रेकअप हो गया था, और मैंने अपनी कॉलेज लाइफ शेयर की।
उस रात हमारी बातें लंबी खिंच गईं, और मैं महसूस कर रही थी कि हमारी नजदीकी बढ़ रही है। अगले कुछ दिनों में हम ज्यादा समय साथ बिताने लगे – फिल्म देखना, घूमना, और छोटी-छोटी बातें। अक्षय की नजरें कभी-कभी मुझे छूती सी लगती थीं, लेकिन मैंने खुद को समझाया कि ये सिर्फ भाई-बहन का रिश्ता है। फिर भी, मन में एक कशमकश थी।
एक दोपहर, जब घर में सब सो रहे थे, मैं अपने कमरे में थी। अक्षय बाथरूम से निकला, और उसने सिर्फ तौलिया लपेटा हुआ था। मैं गलती से दरवाजा खोलकर बाहर आई, और मेरी नजर उस पर पड़ी। तौलिया थोड़ा ढीला था, और एक पल के लिए मैंने कुछ ऐसा देख लिया जो नहीं देखना चाहिए था। मेरा दिल तेज धड़कने लगा, और मैं जल्दी से अंदर चली गई।
उस पल के बाद सब बदल गया। मैं अपने कमरे में बैठी सोच रही थी कि ये क्या हो गया। अक्षय का वो रूप मेरे दिमाग में घूम रहा था, और मैं खुद को रोक नहीं पा रही थी। शाम को जब वो मेरे पास आया, तो मैंने नजरें चुराईं। "क्या हुआ, रिया?" उसने पूछा। मैंने कुछ नहीं कहा, लेकिन मेरी सांसें तेज थीं।
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रात में नींद नहीं आई। मैं उठी और उसके कमरे के पास गई। दरवाजा खुला था, और वो लेटा हुआ था। मैं अंदर गई, और वो उठ बैठा। "रिया, क्या बात है?" उसने पूछा। मैं चुप रही, लेकिन मेरी आंखें सब कह रही थीं। वो मेरे करीब आया, और हमारी नजरें मिलीं। उस पल में सारी सीमाएं टूट गईं।
अक्षय ने धीरे से मेरा हाथ पकड़ा, और मैंने विरोध नहीं किया। उसकी उंगलियां मेरी त्वचा पर फिसलीं, और एक झुरझुरी सी दौड़ गई। हम एक-दूसरे के करीब आए, और उसने मुझे गले लगा लिया। उसकी सांसें मेरे कान पर महसूस हो रही थीं, और मैं खुद को रोक नहीं पाई। हमारी होंठ मिले, और वो चुंबन गहरा होता गया।
उसकी बाहें मुझे कसकर पकड़ रही थीं, और मैंने महसूस किया कि मेरा शरीर उसकी गर्माहट में पिघल रहा है। हम बिस्तर पर गिरे, और उसने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए। उसकी उंगलियां मेरी कमर पर घूम रही थीं, और हर स्पर्श में एक नई उत्तेजना थी। मैंने उसका तौलिया खींचा, और वो फिर से मेरे सामने था, वैसा ही जैसा मैंने देखा था।
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मेरा हाथ उसकी मर्दानगी पर गया, और वो सिहर उठा। "रिया..." उसने फुसफुसाया। मैंने उसे छुआ, महसूस किया उसकी कठोरता को, और एक अजीब सा आनंद मिला। वो मेरे ऊपर आया, और धीरे-धीरे अंदर प्रवेश किया। दर्द और सुख का मिश्रण था, लेकिन मैंने खुद को समर्पित कर दिया। हमारी गतियां तेज हुईं, और कमरे में सिर्फ हमारी सांसों की आवाज थी।
उस रात के बाद हमारी मुलाकातें छिपी हुईं हो गईं। अगले दिन दोपहर में, जब घर खाली था, अक्षय ने मुझे अपने कमरे में बुलाया। "मैं तुम्हें रोक नहीं पा रहा, रिया," उसने कहा। मैंने भी स्वीकार किया कि वो पल मेरे दिमाग से नहीं जा रहा। हम फिर एक हुए, लेकिन इस बार ज्यादा धीमे और भावनात्मक तरीके से। उसकी उंगलियां मेरे शरीर के हर हिस्से को छू रही थीं, और मैं हर स्पर्श में खो जाती।
हमारी चुम्बन अब गहरे थे, और वो मेरे स्तनों को सहला रहा था। मेरी सिसकियां निकल रही थीं, और वो मुझे चुप कराता। फिर वो नीचे गया, और अपनी जीभ से मुझे उत्तेजित करने लगा। वो अनुभव नया था, जैसे आग लगी हो। मैंने उसके बाल पकड़े, और खुद को उसमें समा दिया। जब वो फिर अंदर आया, तो हमारी लय एक हो गई, और चरम पर पहुंचकर हम थक गए।
कुछ दिनों बाद, शाम को छत पर हम फिर मिले। हवा चल रही थी, लेकिन हमारी चाहत ज्यादा तेज थी। अक्षय ने मुझे दीवार से सटा लिया, और हमारी चुंबन शुरू हुई। उसने मेरी साड़ी ऊपर की, और सीधे अंदर प्रवेश किया। वो पल जोखिम भरा था, लेकिन उत्तेजना दोगुनी। मेरी टांगें कांप रही थीं, और वो मुझे संभाले हुए था। हमारी सांसें मिलीं, और वो चरमसुख हमें ले गया।
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हर बार कुछ नया था – कभी धीमा प्यार, कभी तेज जुनून। एक रात, हम बाथरूम में थे, जहां पानी की बौछार के नीचे हम एक हुए। उसकी गीली त्वचा मेरी पर फिसल रही थी, और वो अनुभव अविस्मरणीय था। मैंने महसूस किया कि ये रिश्ता अब सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी हो गया है। लेकिन मन में डर था कि ये कब तक चलेगा।
अक्षय की ट्रेनिंग खत्म होने वाली थी, और वो जाने वाला था। आखिरी रात, हम अपने कमरे में थे। "रिया, मैं तुम्हें मिस करूंगा," उसने कहा। मैंने उसे गले लगाया, और हमारी आखिरी मुलाकात शुरू हुई। वो हर स्पर्श में प्यार बरसा रहा था, और मैं आंसुओं के साथ सुख महसूस कर रही थी। हम धीरे-धीरे एक हुए, और वो पल अनंत लगा।
सुबह वो चला गया, लेकिन हमारी यादें रह गईं। अब घर वैसा ही है, लेकिन मेरे मन में वो छिपी चाहत हमेशा रहेगी। कभी-कभी रात में मैं सोचती हूं उस पल के बारे में जब सब शुरू हुआ, और एक मुस्कान आ जाती है। जीवन चलता है, लेकिन वो भावनाएं अब मेरे साथ हैं।