पिकनिक की अनोखी यादें

सुबह की धूप अभी-अभी खिड़की से झांक रही थी, जब मैंने आंखें खोलीं। रविवार का दिन था, और घर में वो आम शांति छाई हुई थी जो वीकेंड पर ही मिलती है। मैं रिया हूं, अजय की पत्नी, और हमारा छोटा सा फ्लैट दिल्ली के व्यस्त इलाके में है, जहां रोज़ की भागदौड़ के बीच ऐसे दिन जैसे सांस लेने का मौका देते हैं।

मैं बिस्तर से उठी, चाय की केतली चढ़ाई और सोचा कि आज का प्लान कितना अच्छा है। अजय अभी सो रहा था, उसकी सांसें नियमित थीं, और मैंने उसे जगाने से पहले खुद को तैयार किया। हम दोनों ही तीस के आसपास हैं, अजय एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता है, और मैं घर से फ्रीलांस ग्राफिक डिजाइन करती हूं।

आज हम दोस्तों के साथ पिकनिक पर जाने वाले थे। राहुल और नेहा, जो हमारे कॉलेज के दोस्त हैं, और विक्रम सोनिया के साथ। राहुल मेरा पुराना दोस्त है, नेहा उसकी पत्नी, और विक्रम अजय का ऑफिस कलीग। हम सब मिलकर महीनों से इस ट्रिप की प्लानिंग कर रहे थे, दिल्ली के बाहर किसी हिल स्टेशन पर, जहां ठंडी हवा और हरियाली हमें शहर की थकान से दूर ले जाए।

चाय बनाते हुए मैंने लिस्ट चेक की – सैंडविच, फ्रूट्स, कुछ स्नैक्स और ब्लैंकेट। अजय उठा, मुस्कुराया और बोला, "गुड मॉर्निंग, रिया। तैयार हो?" मैंने हंसकर कहा, "हां, बस तुम्हारी चाय तैयार है। जल्दी करो, राहुल का मैसेज आया है कि वो लोग निकल चुके हैं।"

हमने नाश्ता किया, कार में सामान लोड किया और निकल पड़े। रास्ता लंबा था, लेकिन ट्रैफिक कम होने से मज़ा आ रहा था। अजय ड्राइव कर रहा था, और मैं उसके बगल में बैठी रेडियो पर गाने सुन रही थी। पीछे की सीट पर कुछ किताबें रखी थीं, जो मैंने पढ़ने के लिए ली थीं।

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राहुल और नेहा हमें हाईवे पर मिले, विक्रम की कार उनके पीछे थी। हम सबने एक साथ रुककर कॉफी पी, और फिर काफिले की तरह आगे बढ़े। नेहा ने फोन पर कहा, "रिया, आज बहुत मज़ा आएगा। वो जगह कितनी सुंदर है, याद है न पिछले साल की?" मैंने हामी भरी, सोचते हुए कि हां, वो झील के किनारे की जगह वाकई शांतिपूर्ण है।

दोपहर तक हम पहुंच गए। हिल स्टेशन की ठंडी हवा ने हमें तरोताज़ा कर दिया। हमने एक खुली जगह चुनी, जहां पेड़ों की छाया थी और दूर झील चमक रही थी। ब्लैंकेट बिछाए, सामान निकाला और बैठ गए। विक्रम ने कहा, "चलो, पहले कुछ खेलें। बैडमिंटन कैसा रहेगा?" सब सहमत हुए, और हमने कोर्ट जैसा कुछ सेट किया।

खेलते हुए हंसी-मज़ाक चलता रहा। अजय और राहुल एक टीम में, मैं और नेहा दूसरी में। सोनिया विक्रम के साथ रेफरी बनी। मैंने शटल को हिट किया, लेकिन वो राहुल के सिर के ऊपर से निकल गई। वो हंसा, "रिया, तू तो अब भी वही कॉलेज वाली प्लेयर है!" मैंने जवाब दिया, "हां, लेकिन तू अब भी मिस करता है।"

खेल के बाद हम थककर बैठ गए। नेहा ने सैंडविच निकाले, और हमने खाना शुरू किया। बातें चल रही थीं – काम की, पुरानी यादों की। अजय ने बताया कि उसका प्रोजेक्ट कितना व्यस्त है, और विक्रम ने अपनी हाल की ट्रिप की कहानी सुनाई। मैं चुपचाप सुन रही थी, हवा का मज़ा लेते हुए।

दोपहर ढलने लगी, सूरज की किरणें नरम हो गईं। हमने झील की ओर टहलना शुरू किया। राहुल ने कहा, "चलो, पानी में पैर डालें। ठंडा लगेगा।" सब सहमत हुए। झील का किनारा शांत था, पानी हल्का लहरा रहा था। मैंने जूते उतारे और पैर डाले, ठंडक ने पूरे शरीर में सिहरन पैदा की।

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अजय मेरे बगल में बैठा, उसका हाथ मेरे कंधे पर था। नेहा और राहुल थोड़ा आगे थे, विक्रम सोनिया के साथ हंस रहे थे। मैंने अजय से कहा, "कितना अच्छा लग रहा है न यहां? शहर की भागदौड़ से दूर।" वो मुस्कुराया, "हां, रिया। ऐसे पल कम ही मिलते हैं।"

धीरे-धीरे शाम होने लगी। हम वापस ब्लैंकेट पर लौटे, और किसी ने वाइन की बॉटल निकाली। विक्रम बोला, "चलो, थोड़ा मूड बनाएं।" सबने ग्लास भरे, और बातें और गहरी होने लगीं। नेहा ने पुरानी कॉलेज की कहानियां शुरू की, कैसे हम सब पार्टी करते थे।

राहुल की आंखें मेरी ओर देख रही थीं, थोड़ा ज्यादा देर तक। मैंने नजरें हटा लीं, लेकिन अंदर एक अजीब सी हलचल हुई। अजय हंस रहा था, लेकिन मैंने महसूस किया कि उसकी पकड़ मेरे हाथ पर थोड़ी टाइट हो गई है। सोनिया ने कहा, "याद है वो नाइट जब हम सब डांस कर रहे थे?" सब हंसे, लेकिन हवा में कुछ बदलाव आ रहा था।

वाइन का असर होने लगा। बातें अब पर्सनल हो गईं – रिलेशनशिप्स, इच्छाएं। विक्रम ने मजाक में कहा, "कभी सोचा है कि अगर हम सब स्वैप करें तो?" सब चुप हो गए, फिर हंस पड़े। लेकिन वो हंसी में एक टेंशन थी। मैंने अजय की ओर देखा, उसकी आंखों में सवाल था।

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नेहा ने ब्रेक किया, "क्यों नहीं? आज यहां कोई नहीं देख रहा।" उसकी आवाज़ में चुनौती थी। राहुल ने मेरी ओर देखा, और मैंने महसूस किया कि मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गई है। अंदर से एक संघर्ष चल रहा था – ये सही है? लेकिन उत्साह भी था।

धीरे-धीरे सब सहमत होते लगे। अजय ने मेरे कान में फुसफुसाया, "रिया, अगर तू तैयार है तो..." मैंने सिर हिलाया, डर और उत्तेजना का मिश्रण महसूस करते हुए। हमने जगह साफ की, ब्लैंकेट को और बड़ा फैलाया।

पहला स्पर्श राहुल का था। वो मेरे पास आया, उसकी उंगलियां मेरे बालों में। मैंने आंखें बंद कीं, उसके होंठ मेरे गले पर महसूस किए। अजय नेहा के साथ था, उसकी आंखें मेरी ओर, जैसे वो देख रहा हो कि मैं ठीक हूं।

हवा अब गर्म लग रही थी, ठंडक के बावजूद। राहुल ने मेरी शर्ट के बटन खोले, उसकी सांसें मेरी त्वचा पर। मैंने उसके सीने को छुआ, मांसपेशियां सख्त महसूस हुईं। नेहा की आवाज़ आई, वो अजय के साथ हंस रही थी, लेकिन अब वो हंसी अलग थी।

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विक्रम सोनिया के साथ था, लेकिन जल्दी ही हम सब करीब आ गए। सोनिया ने मेरी ओर हाथ बढ़ाया, उसकी उंगलियां मेरी कमर पर। ये नया था, स्त्री का स्पर्श, नरम लेकिन मजबूत। मैंने जवाब दिया, उसके स्तनों को छुआ, दिल की धड़कन और तेज़।

राहुल अब मेरे नीचे था, उसकी जीभ मेरी जांघों पर। मैं सिहर उठी, आंखें बंद करके उस सनसनी में खो गई। अजय की आहें सुनाई दीं, नेहा उसे चूम रही थी। विक्रम हमारी ओर आया, उसने राहुल को हटाया और खुद मेरे ऊपर आ गया।

उसकी एंट्री धीमी थी, लेकिन गहरी। मैंने कराहा, दर्द और सुख का मिश्रण। सोनिया अब मेरे बगल में थी, वो राहुल के साथ खेल रही थी, लेकिन उसकी आंखें मुझ पर। नेहा विक्रम के पीछे से उसे छू रही थी, सब कुछ मिश्रित हो रहा था।

मैंने अजय को देखा, वो अब सोनिया के साथ था, उसकी हरकतें तेज़। मेरे अंदर एक जलन हुई, लेकिन वो उत्तेजना में बदल गई। राहुल वापस आया, इस बार पीछे से। डबल सनसनी ने मुझे पागल कर दिया, मैं चिल्लाई, शरीर कांप रहा था।

समय जैसे रुक गया। हम सब एक-दूसरे में खोए हुए, स्पर्श, चुंबन, प्रवेश। नेहा की आहें, विक्रम का गुर्राना, सोनिया का नरम स्वर। मैंने महसूस किया कि राहुल और विक्रम दोनों मुझ पर, एक साथ। वो पीक मोमेंट था, जब सब कुछ फूट पड़ा।

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थकान आई, लेकिन हम नहीं रुके। नेहा अब मेरे साथ थी, उसकी जीभ मेरे शरीर पर। नया अनुभव, मीठा और तीव्र। अजय राहुल के साथ सोनिया को साझा कर रहा था, उनकी हरकतें सिंक्रोनाइज्ड। मैंने सोनिया को चूमा, उसके होंठ नमकीन थे।

रात गहराने लगी, सितारे चमक रहे थे। हमने पोजीशन्स बदलीं, हर बार नई भावना। विक्रम ने मुझे उठाया, खड़े-खड़े, उसकी ताकत में मैं बह गई। नेहा और सोनिया एक-दूसरे में खोईं, हम सब देख रहे थे।

अंत में, सब लेटे हुए, सांसें तेज़। अजय मेरे पास आया, मुझे गले लगाया। राहुल ने कहा, "ये यादगार था।" लेकिन अब शांति थी, सिर्फ हवा की सरसराहट।

मैंने आंखें बंद कीं, उसके सीने पर सिर रखा, दिल अभी भी धड़क रहा था।