पिकनिक की अनोखी यादें
सुबह की धूप हल्की-हल्की कमरे में घुस रही थी, जब मैंने आँखें खोलीं। आज रविवार था, और मैंने सोचा था कि थोड़ा देर तक सोती रहूँगी, लेकिन राहुल का फोन आने वाला था। मैं बिस्तर से उठी, किचन में जाकर चाय बनाई, और बालकनी में खड़ी होकर शहर की सुबह को निहारने लगी।
मेरा नाम आरती है, और मैं दिल्ली में एक छोटी सी आईटी कंपनी में काम करती हूँ। रोज की भागदौड़ से थककर, हम दोस्तों ने इस वीकेंड पिकनिक प्लान की थी। नेहा, प्रिया और मैं कॉलेज से दोस्त हैं, और हमारे बॉयफ्रेंड्स—राहुल, विक्रम और अमित—भी अब फैमिली जैसे हो चुके हैं।
चाय पीते हुए मैंने सोचा कि कितना अच्छा होगा, शहर की भीड़ से दूर, किसी हिल स्टेशन पर जाकर। हमने डलहौजी चुना था, जहाँ जंगल और पहाड़ मिलकर एक शांत दुनिया बनाते हैं। मैंने अपना बैग पैक किया—कुछ स्नैक्स, पानी की बोतलें, और एक हल्का सा जैकेट, क्योंकि शाम को ठंड हो सकती थी।
राहुल का फोन आया, उसकी आवाज़ में उत्साह था। "आरती, तैयार हो? हम लोग नेहा के घर पर मिलते हैं।" मैंने हँसकर कहा, "हाँ, बस निकल रही हूँ।" मैंने एक साधारण जींस और टी-शर्ट पहनी, बाल बाँधे, और घर से निकल पड़ी। रास्ते में ट्रैफिक कम था, और मैंने रेडियो पर पुराने गाने सुनते हुए ड्राइव किया।
नेहा के घर पहुँची तो सब इकट्ठा थे। नेहा हमें गले लगाकर मिली, उसके चेहरे पर हमेशा की तरह मुस्कान थी। प्रिया अमित के साथ सोफे पर बैठी कुछ बातें कर रही थी, और विक्रम कार की चाबियाँ घुमा रहा था। हमने कॉफी पी, कुछ हल्की-फुल्की बातें कीं, और फिर दो कारों में सवार होकर निकल पड़े।
रास्ता लंबा था, लेकिन मजेदार। हमने गाने बजाए, रुक-रुककर चाय पी, और पुरानी यादें ताजा कीं। राहुल ड्राइव कर रहा था, और मैं उसके बगल में बैठी बाहर के नजारे देख रही थी। पहाड़ी रास्ते शुरू होते ही हवा ठंडी हो गई, और मैंने खिड़की से जंगल की हरियाली को छुआ।
डलहौजी पहुँचकर हमने एक छोटा सा स्पॉट चुना, जहाँ घास का मैदान था और आसपास पेड़ों का घेरा। हमने चादर बिछाई, स्नैक्स निकाले, और बैठकर बातें करने लगे। सूरज ऊपर था, लेकिन छाया में ठंडक महसूस हो रही थी। अमित ने गिटार निकाला और कुछ धुनें बजाईं, हम सबने मिलकर गाने गाए।
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नेहा ने कहा, "यार, कितने दिनों बाद ऐसा लग रहा है कि हम फ्री हैं।" प्रिया हँसी, "हाँ, ऑफिस की टेंशन भूल गई हूँ आज।" मैंने राहुल की तरफ देखा, वो मुस्कुरा रहा था। हमने लंच किया—घर से लाए सैंडविच और फ्रूट्स—और फिर थोड़ा आराम किया।
दोपहर ढलने लगी थी, और हमने फैसला किया कि थोड़ा घूम आएँ। जंगल की पगडंडी पर चलते हुए, हवा में पेड़ों की महक थी। विक्रम ने नेहा का हाथ पकड़ा, अमित प्रिया के साथ आगे चल रहा था, और राहुल मेरे कंधे पर हाथ रखकर साथ था। हम बातें कर रहे थे—काम की, सपनों की, और भविष्य की।
एक छोटी सी झील मिली, जहाँ हम रुके। पानी साफ था, और आसपास कोई नहीं। हमने जूते उतारे और पैर डुबोए। ठंडे पानी ने सारी थकान मिटा दी। राहुल ने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में कुछ अलग सा था, लेकिन मैंने उसे इग्नोर किया।
वापस स्पॉट पर लौटे तो शाम हो रही थी। हमने बॉनफायर जलाया, और उसके चारों तरफ बैठ गए। नेहा ने कुछ जोक्स सुनाए, सब हँसते रहे। अमित ने कहा, "चलो, ट्रुथ या डेयर खेलें?" सब सहमत हो गए। खेल शुरू हुआ, हल्की-फुल्की बातों से।
मेरी बारी आई, मैंने ट्रुथ चुनी। विक्रम ने पूछा, "आरती, तू राहुल में क्या सबसे ज्यादा पसंद करती है?" मैंने शरमाते हुए कहा, "उसकी केयरिंग नेचर।" सब तालियाँ बजाने लगे। फिर नेहा की बारी, उसने डेयर चुना, और अमित ने कहा, "विक्रम को किस कर।" नेहा ने हँसकर किया।
खेल आगे बढ़ा, और धीरे-धीरे डेयर बोल्ड होने लगे। प्रिया को अमित के साथ डांस करना पड़ा, राहुल को मुझे गोद में उठाना। हँसी-मजाक में समय बीत रहा था, लेकिन मुझे लग रहा था कि हवा में कुछ बदल रहा है। राहुल का हाथ मेरी कमर पर था, और वो थोड़ा करीब आ रहा था।
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रात गहराने लगी, बॉनफायर की रोशनी में सबके चेहरे चमक रहे थे। विक्रम ने कहा, "चलो, कुछ और एडवेंचरस करें।" नेहा हँसी, "क्या?" अमित ने आँख मारकर कहा, "क्यों न हम सब मिलकर कुछ नया ट्राई करें?" मैंने पूछा, "क्या मतलब?" लेकिन अंदर से एक अजीब सी उत्तेजना महसूस हो रही थी।
प्रिया ने धीरे से कहा, "देखो, हम सब दोस्त हैं, ट्रस्ट है। अगर सब सहमत हों, तो... पिकनिक को यादगार बनाएँ?" राहुल ने मेरी तरफ देखा, मैं चुप थी। विक्रम ने नेहा को गले लगाया, और अमित प्रिया के करीब आ गया। माहौल बदल रहा था, लेकिन कोई जल्दबाजी नहीं थी।
हमने बात की, अपनी फीलिंग्स शेयर कीं। मैंने कहा, "मुझे डर लग रहा है, लेकिन उत्सुकता भी है।" राहुल ने मेरे हाथ में हाथ डाला, "आरती, अगर तू नहीं चाहे, तो नहीं।" लेकिन मैंने हाँ कह दी। हम सबने सहमति दी, और धीरे-धीरे करीब आने लगे।
बॉनफायर की गर्मी में, राहुल ने मुझे किस किया। उसका स्पर्श जाना-पहचाना था, लेकिन आज कुछ अलग। नेहा विक्रम के साथ थी, प्रिया अमित के। फिर अमित ने प्रिया को छोड़कर मेरी तरफ देखा, और राहुल ने सहमति दी। अमित का हाथ मेरे कंधे पर आया, और मैंने महसूस किया एक नई ऊर्जा।
हम सब चादर पर लेट गए, कपड़े धीरे-धीरे उतरने लगे। राहुल नेहा के पास गया, विक्रम प्रिया के। मैं अमित के साथ थी, उसकी आँखों में जिज्ञासा थी। उसने मेरे होंठ चूमे, और मैंने महसूस किया उसकी उँगलियाँ मेरी पीठ पर। अंदर से एक संघर्ष था—ये सही है? लेकिन भावनाएँ बह रही थीं।
अमित ने मुझे नीचे लिटाया, उसके शरीर की गर्मी मेरे ऊपर। मैंने अपनी आँखें बंद कीं, और महसूस किया उसका स्पर्श। राहुल की आवाज़ सुनाई दी, वो नेहा के साथ था, और उसकी सिसकियाँ। विक्रम प्रिया को छू रहा था, सब मिलकर एक रिदम में थे।
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फिर हमने पोजीशन्स बदलीं। अब विक्रम मेरे पास आया, उसकी मजबूत बाहें मुझे घेर रही थीं। मैंने महसूस किया उसकी साँसें मेरे गले पर, और एक नई संवेदना। नेहा अमित के साथ थी, प्रिया राहुल के। हर पल में भावनाएँ बदल रही थीं—ईर्ष्या, उत्तेजना, और एक अजीब सा बंधन।
रात और गहराई, हम सब एक-दूसरे में खोए हुए। अमित और विक्रम ने मिलकर मुझे छुआ, राहुल देख रहा था। मैंने महसूस किया दो शरीरों की गर्मी, उनकी उँगलियाँ हर जगह। नेहा और प्रिया भी शामिल हुईं, हम लड़कियाँ एक-दूसरे को छू रही थीं, एक नई खोज।
हर सीन में कुछ नया था—धीमे स्पर्श से लेकर तेज रिदम तक। मैंने महसूस किया अमित का प्रवेश, फिर विक्रम का, राहुल का। भावनाएँ उफान पर थीं—प्यार, वासना, और एक गहरा कनेक्शन। नेहा की सिसकियाँ, प्रिया की आहें, सब मिलकर एक संगीत बना रही थीं।
हमने कई बार बदला, हर बार नई भावना। कभी मैं ऊपर, कभी नीचे। राहुल ने मुझे फिर गले लगाया, लेकिन अब अमित भी साथ था। मैं थक गई थी, लेकिन संतुष्टि थी। सबके चेहरे पर मुस्कान थी, कोई पछतावा नहीं।
बॉनफायर धीमा हो रहा था, हम लेटे रहे, एक-दूसरे से चिपके। राहुल ने मेरे कान में कहा, "आई लव यू, आरती।" मैंने उसकी छाती पर सिर रखा, नेहा मेरे बगल में थी, उसका हाथ मेरे पर।
सुबह होने वाली थी, लेकिन हम अभी यहीं थे, इस पल में। प्रिया ने धीरे से कहा, "ये यादगार था।" विक्रम हँसा, अमित ने सहमति दी। मैंने आँखें बंद कीं, महसूस किया ये सब।
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फिर हम उठे, कपड़े पहने, लेकिन वो closeness बनी रही। कार में वापस जाते हुए, बातें कम थीं, लेकिन smiles ज्यादा। मैं राहुल के कंधे पर सिर रखकर सो गई, सपने में वो पल फिर जी रही थी।
घर पहुँचकर, मैंने सोचा कि जीवन में ऐसे मोमेंट्स आते हैं जो बदल देते हैं। लेकिन हमारा बॉन्ड मजबूत हो गया था। शाम को राहुल आया, हमने बात की, और फिर से करीब आए, लेकिन अब अकेले।
उस रात, बिस्तर पर लेटकर, मैंने उन यादों को दोहराया। अमित का स्पर्श, विक्रम की ताकत, नेहा की नरमी। सब कुछ इतना जीवंत था। राहुल मेरे बगल में सो रहा था, मैंने उसे देखा, और मुस्कुराई।
अगले दिन ऑफिस गया, लेकिन मन कहीं और था। नेहा का मैसेज आया, "कैसी हो?" मैंने रिप्लाई किया, "बढ़िया, और तुम?" हमने प्लान किया फिर मिलने का, लेकिन अब कुछ अलग।
समय बीतता गया, लेकिन वो पिकनिक हमेशा याद रही। कभी-कभी रात में, मैं अकेले सोचती, और एक हल्की सी उत्तेजना महसूस करती। राहुल जानता था, और हम साथ में उन पलों को याद करते।
एक शाम, हम सब फिर मिले, घर पर। बातें कीं, और धीरे से वही माहौल बन गया। लेकिन इस बार और आराम से, बिना जल्दबाजी। हम जानते थे क्या होने वाला है, और तैयार थे।
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कमरे में, लाइट्स कम, हम फिर से एक हुए। इस बार ज्यादा इमोशनल, ज्यादा गहरा। मैंने महसूस किया हर किसी का प्यार, हर स्पर्श में। नेहा मेरे साथ थी, हमने एक-दूसरे को छुआ, फिर लड़के शामिल हुए।
हर मूवमेंट में वैरायटी—कभी सॉफ्ट, कभी इंटेंस। मैंने विक्रम और अमित के साथ समय बिताया, राहुल प्रिया और नेहा के साथ। भावनाएँ बह रही थीं, कोई कन्फ्लिक्ट नहीं, सिर्फ आनंद।
रात खत्म हुई, लेकिन वो feeling बनी रही। हमने वादा किया कि ये हमारा सीक्रेट रहेगा, और कभी-कभी दोहराएंगे। मैं खुश थी, संतुष्ट।
अब, जब भी पिकनिक का नाम आता है, मैं मुस्कुराती हूँ। वो दिन मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गया है, और मैं उसे जी रही हूँ, हर पल। राहुल मेरे साथ है, और हमारा रिश्ता और मजबूत।
एक रात, अकेले में, मैंने राहुल से कहा, "तुम्हें कोई अफसोस तो नहीं?" वो बोला, "नहीं, क्योंकि तू खुश है।" मैंने उसे गले लगाया, और हम फिर से उन यादों में खो गए।