एक अनोखी रात

शाम के सात बज रहे थे जब मैं ऑफिस से घर लौटा। दिल्ली की भीड़भाड़ वाली सड़कों से गुजरते हुए, मैंने सोचा कि आज का दिन कितना सामान्य था। सुबह उठकर चाय बनाई, नाश्ता किया और फिर मेट्रो पकड़कर ऑफिस पहुंचा। घर पहुंचते ही मैंने जूते उतारे और सोफे पर बैठ गया, टीवी ऑन करके न्यूज चैनल लगाया। बाहर बारिश की बूंदें खिड़की पर गिर रही थीं, और कमरे में हल्की ठंडक थी।

मैं राहुल हूं, पच्चीस साल का, एक आईटी कंपनी में काम करता हूं। परिवार मेरा लखनऊ में है, मां-बाप और छोटी बहन। यहां दिल्ली में अकेला रहता हूं, एक छोटे से फ्लैट में। रोज की दिनचर्या बस काम, घर और कभी-कभी दोस्तों से मिलना। आज भी वैसा ही लग रहा था, लेकिन फोन की घंटी बजी तो पता चला कि रिया का कॉल है। रिया मेरी पुरानी कॉलेज फ्रेंड है, हम साथ पढ़ते थे।

रिया ने कहा, "राहुल, आज शाम को मेरी बर्थडे पार्टी है, आ जा ना। नेहा और पूजा भी आएंगी।" मैंने हंसते हुए जवाब दिया, "अरे वाह, हैप्पी बर्थडे! ठीक है, आता हूं। कहां है पार्टी?" वह बोली, "मेरे फ्लैट पर ही, आठ बजे तक पहुंच जा।" मैंने सोचा, क्यों न जाऊं, वीकेंड है और घर पर अकेले बैठने से बेहतर है दोस्तों के साथ समय बिताना।

मैंने जल्दी से शावर लिया, साफ कपड़े पहने और बाहर निकला। रिया का फ्लैट मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं था, ऑटो से पहुंच गया। दरवाजा खुलते ही रिया ने गले लगाया, "आ गया तू! चल अंदर आ।" अंदर नेहा और पूजा पहले से ही थीं। नेहा रिया की रूममेट है, लंबे बालों वाली, हमेशा हंसती रहती है। पूजा हमारी कॉलेज ग्रुप की है, शांत लेकिन गहरी सोच वाली।

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पार्टी शुरू हुई, हमने केक काटा, गिफ्ट्स दिए और फिर संगीत चालू कर दिया। रिया ने कहा, "आज रात भर पार्टी करेंगे, कोई जल्दी नहीं जाएगा।" नेहा ने हंसते हुए जोड़ा, "हां, और बारिश हो रही है, बाहर जाना मुश्किल होगा।" हम चारों सोफे पर बैठे, पिज्जा ऑर्डर किया और बातें करने लगे। पुराने कॉलेज के दिनों की यादें, हंसी-मजाक, सब कुछ इतना सहज लग रहा था।

रात गहराने लगी, हमने थोड़ी ड्रिंक्स लीं। नेहा ने कहा, "राहुल, तू अब भी वही शर्मीला लड़का है क्या?" मैंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "नहीं यार, बस काम में व्यस्त रहता हूं।" पूजा चुपचाप सुन रही थी, लेकिन उसकी आंखों में कुछ अलग चमक थी। रिया ने संगीत तेज किया और हम डांस करने लगे। कमरे में हल्की रोशनी, बाहर बारिश की आवाज, सब कुछ माहौल को और जीवंत बना रहा था।

धीरे-धीरे बातें गहरी होने लगीं। नेहा ने पूछा, "राहुल, तेरी कोई गर्लफ्रेंड है?" मैंने ना में सिर हिलाया, "नहीं, अभी तक नहीं मिली कोई।" रिया ने मजाक में कहा, "फिर आज रात हम तीनों तेरी गर्लफ्रेंड्स बन जाती हैं।" हम सब हंस पड़े, लेकिन उस मजाक में कुछ गहराई थी। पूजा ने मेरी तरफ देखा, और उसकी नजरें थोड़ी देर रुकीं।

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बारिश तेज हो गई, और रिया ने कहा, "अब बाहर जाना नामुमकिन है। राहुल, तू यहीं रुक जा रात को।" मैंने सहमति जताई, क्योंकि सच में बाहर निकलना मुश्किल था। हमने सोफे पर बैठकर और बातें कीं, अब विषय रिश्तों पर आ गया। नेहा ने अपनी ब्रेकअप की कहानी सुनाई, कैसे वह अकेली महसूस करती है। पूजा ने कहा, "कभी-कभी बस किसी के साथ होना जरूरी लगता है, बिना सोचे।"

रिया मेरे बगल में बैठी थी, उसका हाथ मेरे कंधे पर रखा। मैंने महसूस किया कि माहौल बदल रहा है। नेहा ने कहा, "चलो कोई गेम खेलें, ट्रुथ ऑर डेयर?" हम सब राजी हो गए। पहला राउंड रिया का था, उसने ट्रुथ चुना। नेहा ने पूछा, "कभी किसी फ्रेंड के साथ कुछ हुआ है?" रिया ने शरमाते हुए कहा, "हां, कॉलेज में।" सब हंस पड़े।

मेरा टर्न आया, मैंने डेयर चुना। पूजा ने कहा, "रिया को किस कर।" मैं हिचकिचाया, लेकिन रिया ने मुस्कुराते हुए करीब आ गई। मैंने उसके होंठों पर हल्का सा किस किया, लेकिन वह रुकी नहीं, उसने मुझे गले लगा लिया। नेहा और पूजा तालियां बजा रही थीं। उस पल में कुछ टूटा, जैसे हम सब की झिझक खत्म हो गई।

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रात और गहरा गई, हम सब बेडरूम में चले गए। रिया का फ्लैट बड़ा था, लेकिन हम सब एक ही कमरे में थे। नेहा ने कहा, "राहुल, आज रात हम सब साथ हैं, कोई नियम नहीं।" मैंने महसूस किया कि मेरे दिल की धड़कन तेज हो रही है। रिया ने मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू किए, और मैंने विरोध नहीं किया। उसकी उंगलियां मेरी छाती पर फिरीं, गर्माहट महसूस हुई।

पूजा मेरे दूसरी तरफ थी, उसने मेरे कान में फुसफुसाया, "मुझे अच्छा लग रहा है ये।" नेहा ने लाइट्स डिम कर दीं, और कमरे में सिर्फ हल्की रोशनी बची। रिया ने मुझे किस करना शुरू किया, गहराई से, जैसे सालों की प्यास हो। मैंने उसके बालों में उंगलियां फिराईं, उसकी सांसें तेज हो रही थीं। नेहा ने मेरे पैंट की ओर हाथ बढ़ाया, और मैंने खुद को रोक नहीं पाया।

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पहले रिया के साथ, सब कुछ इतना नैचुरल लगा। मैंने उसके कपड़े उतारे, उसकी त्वचा नरम और गर्म थी। हम एक-दूसरे में खो गए, मेरी उंगलियां उसके शरीर पर घूमीं, और वह सिसकियां ले रही थी। "राहुल, और करीब आ," उसने कहा। मैंने उसे महसूस किया, उसकी गर्माहट में डूबते हुए। हर स्पर्श में भावनाएं उमड़ रही थीं, जैसे सालों की दोस्ती अब कुछ और बन रही हो।

फिर नेहा की बारी आई। वह ज्यादा उतावली थी, उसने मुझे अपनी तरफ खींचा। "देख, मैं कितनी तैयार हूं," उसने हंसते हुए कहा। उसके चुंबन जंगली थे, हाथ मेरे शरीर पर तेजी से घूम रहे थे। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया, उसकी आंखों में चाहत थी। हमारा मिलन तेज और भावुक था, नेहा की सिसकियां कमरे में गूंज रही थीं। हर धक्के में एक नई उत्तेजना, जैसे वह अपनी सारी कुंठाएं निकाल रही हो।

पूजा आखिरी थी, लेकिन सबसे गहरी। वह शांत थी, लेकिन उसकी आंखें सब कह रही थीं। "राहुल, धीरे से," उसने कहा। मैंने उसे गले लगाया, उसके शरीर को महसूस किया। हमारा समय लंबा चला, हर स्पर्श में भावनाएं थीं। पूजा की सांसें मेरी सांसों से मिलीं, और हम एक हो गए। उसकी आंखों में आंसू थे, शायद खुशी के, शायद कुछ पुरानी यादों के।

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रात भर हम तीनों के बीच ये पल चले, कभी एक साथ, कभी अलग। रिया ने कहा, "ये रात कभी नहीं भूलूंगी।" नेहा हंस रही थी, पूजा चुपचाप मुस्कुरा रही थी। बाहर बारिश थम चुकी थी, लेकिन कमरे में गर्माहट बरकरार थी। मैंने सोचा, ये सब इतना अप्रत्याशित था, लेकिन इतना सच्चा।

सुबह होने को थी, लेकिन हम अभी भी एक-दूसरे के करीब थे। रिया मेरे सीने पर सिर रखकर सोई थी, नेहा मेरी बांह में, पूजा मेरी तरफ मुंह करके। दिल में एक अजीब सी शांति थी, जैसे कुछ बदल गया हो।