मेरा जन्मदिन और वो अनोखी रात

सुबह की धूप मेरे कमरे की खिड़की से झांक रही थी, और मैं अपनी आदत के मुताबिक सबसे पहले कॉफी का कप हाथ में लेकर बालकनी में खड़ी हो गई। आज मेरा जन्मदिन था, लेकिन वो कोई खास उत्साह वाला दिन नहीं लग रहा था। मैं रिया हूं, पच्चीस साल की, दिल्ली में एक छोटी सी आईटी कंपनी में काम करती हूं, और पिछले दो साल से अपने तीन दोस्तों के साथ एक फ्लैट शेयर कर रही हूं।

हमारा फ्लैट पुरानी दिल्ली के एक शांत इलाके में है, जहां सुबह-सुबह पक्षियों की चहचहाहट और दूर से आने वाली सब्जीवालों की आवाजें दिन की शुरुआत करती हैं। मैंने कॉफी की चुस्की ली और सोचा कि आज ऑफिस से छुट्टी ली है, तो शायद थोड़ा आराम करूंगी। मेरे रूममेट्स—अनुज, शिखा और विक्रम—सभी अपने-अपने काम में व्यस्त रहते हैं, लेकिन हमारा बॉन्ड मजबूत है। अनुज मेरा कॉलेज का दोस्त है, शिखा ऑफिस कलीग बनी थी, और विक्रम अनुज का चचेरा भाई है जो हाल ही में हमारे साथ रहने लगा।

कॉफी खत्म करके मैं अंदर आई और किचन में नाश्ता बनाने लगी। रोज की तरह टोस्ट और अंडे, कुछ फल। आज जन्मदिन है तो सोचा थोड़ा स्पेशल बनाऊं, लेकिन फिर याद आया कि शाम को सबने मिलकर पार्टी प्लान की है। अनुज ने कल रात कहा था कि वो सरप्राइज देगा, लेकिन मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। मैंने अपना फोन चेक किया, कुछ मैसेज आए थे—मां के, जो गांव से आई थीं, और कुछ पुराने दोस्तों के।

दिन धीरे-धीरे बीत रहा था। मैंने घर की सफाई की, कुछ किताब पढ़ी, और दोपहर में शिखा से बात की जो ऑफिस से फोन करके विश कर रही थी। "रिया, शाम को जल्दी आऊंगी, तेरा बर्थडे मनाएंगे," उसने कहा। मैं हंस पड़ी, क्योंकि हमारी पार्टियां हमेशा सिंपल होती हैं—कुछ ड्रिंक्स, म्यूजिक और गपशप। विक्रम सुबह ही निकल गया था काम पर, और अनुज घर से ही काम कर रहा था।

दोपहर के समय अनुज मेरे कमरे के बाहर आया और बोला, "रिया, तैयार हो जा, शाम को कुछ स्पेशल प्लान है।" मैंने पूछा कि क्या, लेकिन वो मुस्कुराकर चला गया। मैंने सोचा शायद कोई अच्छा रेस्तरां या घर पर ही केक कटिंग। मैं अपनी उम्र के बारे में सोचने लगी—पच्चीस साल, अभी तक सिंगल, काम में डूबी हुई, लेकिन दोस्तों के साथ खुश। परिवार दूर है, पापा की नौकरी की वजह से, लेकिन वो हमेशा सपोर्ट करते हैं।

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शाम होने लगी थी। मैंने एक सिंपल ड्रेस पहनी—नीली जींस और सफेद टॉप—और तैयार हो गई। शिखा सबसे पहले आई, हाथ में गिफ्ट लेकर, और मुझे गले लगाया। "हैप्पी बर्थडे, रिया! आज तेरी पार्टी रॉक करेगी," उसने कहा। विक्रम थोड़ी देर बाद आया, उसके साथ कुछ शॉपिंग बैग थे। अनुज ने लिविंग रूम को सजाया था—बलून, लाइट्स और एक छोटा सा केक।

हम सब बैठ गए। केक कटा, सबने गाना गाया, और फिर ड्रिंक्स शुरू हो गए। अनुज ने बीयर निकाली, शिखा ने वाइन। बातें होने लगीं—ऑफिस की गॉसिप, पुरानी यादें। मैं महसूस कर रही थी कि ये दोस्त मेरे लिए परिवार जैसे हैं। विक्रम ने कहा, "रिया, तू हमेशा इतनी शांत रहती है, आज कुछ एडवेंचर करें?" मैंने हंसकर पूछा कि क्या मतलब।

रात गहराने लगी। हमने म्यूजिक ऑन किया, और डांस करने लगे। शिखा मेरे करीब आकर नाच रही थी, अनुज विक्रम के साथ हंस रहा था। धीरे-धीरे माहौल गर्म होने लगा, लेकिन अभी सब नॉर्मल था। मैंने नोटिस किया कि अनुज की नजरें मुझ पर ज्यादा टिक रही थीं, शिखा की मुस्कान में कुछ अलग था। विक्रम ने एक गेम सजेस्ट किया—ट्रुथ या डेयर।

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गेम शुरू हुआ। पहले कुछ सिंपल सवाल, जैसे सबसे शर्मनाक मोमेंट। फिर डेयर आया। शिखा ने मुझे डेयर दिया कि अनुज को किस करो। मैं हिचकिचाई, लेकिन पार्टी का मूड था, तो मैंने अनुज के गाल पर किस किया। लेकिन अनुज ने मुझे पकड़ लिया और होंठों पर किस कर दिया। मैं स्तब्ध रह गई, लेकिन अंदर से एक अजीब सी उत्तेजना महसूस हुई।

शिखा हंस पड़ी और बोली, "अरे, ये तो शुरुआत है।" विक्रम ने अगला डेयर लिया और शिखा को अपनी शर्ट उतारने को कहा। शिखा ने बिना हिचक उतार दी, और अब वो सिर्फ ब्रा में थी। माहौल बदल रहा था। मैंने महसूस किया कि मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई है। अनुज ने मेरी तरफ देखा और कहा, "रिया, आज तेरा दिन है, जो चाहे वो कर।"

मैं सोच रही थी कि ये सब क्या हो रहा है। हम दोस्त हैं, लेकिन आज की रात अलग लग रही थी। विक्रम ने म्यूजिक और तेज किया, और शिखा मेरे पास आकर मुझे डांस करने लगी। उसके हाथ मेरी कमर पर थे, और मैंने विरोध नहीं किया। अनुज और विक्रम भी शामिल हो गए। धीरे-धीरे कपड़े कम होने लगे।

पहली बार अनुज ने मुझे छुआ, उसके हाथ मेरी पीठ पर फिसले। मैंने आंखें बंद कर लीं, और महसूस किया कि ये गलत नहीं लग रहा। शिखा विक्रम के साथ थी, लेकिन फिर वो मेरे पास आई। हम सब एक-दूसरे के करीब आ रहे थे। मेरे मन में कन्फ्लिक्ट था—ये दोस्ती है या कुछ और? लेकिन जन्मदिन की रात में ये एडवेंचर रोमांचक लग रहा था।

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अनुज ने मुझे सोफे पर बैठाया और किस करना शुरू किया। उसके होंठ नरम थे, और मैंने जवाब दिया। शिखा मेरे बगल में थी, उसके हाथ मेरी जांघों पर। विक्रम ने लाइट्स डिम कर दीं। अब कमरा अंधेरे में था, सिर्फ म्यूजिक की धुन। मैंने अपनी ड्रेस उतारी, और पहली बार इतने लोगों के सामने नग्न महसूस किया।

अनुज का स्पर्श मुझे उत्तेजित कर रहा था। उसके हाथ मेरे स्तनों पर थे, धीरे-धीरे दबा रहे थे। मैं सिसकी, और शिखा ने मेरे कान में फुसफुसाया, "रिलैक्स, रिया, ये तेरी पार्टी है।" विक्रम शिखा के साथ था, लेकिन फिर वो मेरे पास आया। उसके होंठ मेरे गर्दन पर, और मैंने महसूस किया कि तीनों का ध्यान मुझ पर है।

हम सब फर्श पर लेट गए। अनुज ने मुझे अपनी ओर खींचा, और मैंने उसके शरीर को छुआ। उसकी मांसपेशियां सख्त थीं, और मैंने उसके लिंग को महसूस किया। शिखा ने मेरे स्तनों को चूमा, उसकी जीभ नरम थी। विक्रम मेरी जांघों के बीच था, धीरे-धीरे उंगलियां फेर रहा था। मेरे मन में भावनाओं का तूफान था—उत्तेजना, शर्म, लेकिन एक आजादी।

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अनुज पहला था जो मेरे अंदर आया। उसकी गति धीमी थी, और मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं। शिखा मेरे बगल में थी, विक्रम को किस कर रही थी। फिर विक्रम ने जगह ली, उसका स्पर्श अलग था—तेज और गहरा। मैं कराह रही थी, हर थ्रस्ट में नई सनसनी। शिखा ने मेरे साथ खेलना शुरू किया, उसकी उंगलियां मेरे क्लिटोरिस पर।

रात लंबी हो रही थी। हम पोजीशन बदलते रहे—कभी मैं ऊपर, कभी नीचे। अनुज और विक्रम एक साथ मुझे छू रहे थे, शिखा शामिल हो रही थी। हर पल में नई भावना—कभी कोमलता, कभी जुनून। मैंने महसूस किया कि ये सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि हमारी दोस्ती का एक नया रूप था।

शिखा ने विक्रम को अपने ऊपर लिया, और मैं अनुज के साथ थी। लेकिन फिर हम सब मिक्स हो गए। विक्रम मेरे पीछे से, अनुज सामने से। शिखा के होंठ मेरे पर। सेंसेशन ओवरवेल्मिंग थे—गर्मी, पसीना, सांसें। मैं चरम पर पहुंची, कई बार, हर बार अलग अनुभव।

कभी हम रुकते, हंसते, फिर शुरू होते। अनुज ने कहा, "रिया, ये तेरा बेस्ट बर्थडे है न?" मैंने हां में सिर हिलाया, शब्द नहीं निकल रहे थे। विक्रम की आंखों में एक गहराई थी, शिखा की मुस्कान में शरारत। हमारी बॉडीज एक-दूसरे से जुड़ी हुईं, हर मूवमेंट में синхрониzed।

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रात के आखिरी घंटों में थकान आई, लेकिन उत्तेजना नहीं गई। मैं शिखा के साथ लेटी थी, उसके शरीर की गर्मी महसूस कर रही थी, जबकि अनुज और विक्रम हमें देख रहे थे। फिर एक आखिरी राउंड, जहां सबने मिलकर मुझे खुश किया।

सुबह की पहली किरण कमरे में आई, और हम सब एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए थे। मेरे मन में कोई पछतावा नहीं था, सिर्फ एक नई शुरुआत का एहसास।