बुआ का जन्मदिन: एक यादगार रात

सुबह की पहली किरण कमरे में घुसी तो मैंने आँखें मलीं और बिस्तर से उठा। आज का दिन सामान्य लग रहा था, लेकिन घर में एक हल्की सी हलचल थी। मैं रवि हूँ, दिल्ली में रहता हूँ, और रोज की तरह ऑफिस जाने की तैयारी कर रहा था।

नीचे किचन से माँ की आवाज़ आई, "रवि, चाय पी लो बेटा, आज सुनीता बुआ आ रही हैं।" मैंने घड़ी देखी, अभी सात बजे थे। बुआ का जन्मदिन था आज, और वो हमारे घर पर ही मनाने वाली थीं।

मैंने जल्दी से नहाया और नाश्ता किया। पापा पहले ही ऑफिस चले गए थे, और माँ घर संभाल रही थीं। बुआ पापा की छोटी बहन हैं, उम्र करीब चालीस की, और अकेली रहती हैं। उनके पति का देहांत हो चुका है, और बच्चे नहीं हैं।

दोपहर तक मैं ऑफिस से लौट आया। घर में सजावट हो रही थी, माँ ने केक मँगवाया था। बुआ शाम को आईं, उनके चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन आँखों में एक थकान सी झलक रही थी। "कैसी हो बुआ?" मैंने पूछा, और उन्होंने गले लगाया।

रात के डिनर की तैयारी चल रही थी। हम सब साथ बैठे, पुरानी बातें कर रहे थे। बुआ ने अपनी जॉब की बात बताई, वो एक स्कूल में टीचर हैं। मैंने उनकी कहानियाँ सुनीं, कैसे वो बच्चों को पढ़ाती हैं।

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केक काटने का समय आया। बुआ ने मोमबत्तियाँ बुझाईं, और हमने तालियाँ बजाईं। माँ ने कहा, "सुनीता, आज रात यहीं रुक जाओ, कल सुबह जाना।" बुआ ने हामी भरी, और मैंने सोचा कि अच्छा है, घर में थोड़ी रौनक रहेगी।

रात गहराने लगी। माँ और पापा सोने चले गए। मैं अपने कमरे में था, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। बुआ गेस्ट रूम में थीं, और मैंने सोचा कि जाकर उनसे बात कर लूँ।

मैं धीरे से उनके कमरे की ओर गया। दरवाज़ा खुला था, बुआ बिस्तर पर बैठी किताब पढ़ रही थीं। "नींद नहीं आ रही रवि?" उन्होंने पूछा। मैं अंदर आया और उनके पास बैठ गया।

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हम बातें करने लगे। बुआ ने अपनी जिंदगी के बारे में बताया, कैसे अकेलापन कभी-कभी भारी लगता है। उनकी आवाज़ में एक उदासी थी, और मैंने उनका हाथ थामा। "बुआ, आप कभी अकेली नहीं हैं," मैंने कहा।

उस पल में कुछ बदला। बुआ की आँखों में एक चमक आई, और उन्होंने मेरी ओर देखा। हमारी नज़रें मिलीं, और चुप्पी फैल गई। मैंने महसूस किया कि मेरा दिल तेज़ धड़क रहा था।

बुआ ने अपना हाथ मेरे कंधे पर रखा। "तुम बहुत बड़े हो गए हो रवि," उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा। मैंने कुछ नहीं कहा, बस उनकी ओर देखता रहा। कमरे में सिर्फ हम दोनों थे, और बाहर की दुनिया दूर लग रही थी।

धीरे-धीरे, हम करीब आए। बुआ की साँसें मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थीं। मैंने उन्हें गले लगाया, और वो मेरी बाहों में समा गईं। वह पल इतना स्वाभाविक लगा, जैसे सालों का बोझ उतर रहा हो।

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हमारी बातें अब भावनाओं में बदल गईं। बुआ ने अपनी आँखें बंद कीं, और मैंने उनके होंठों को छुआ। वह चुंबन गहरा था, जिसमें दर्द और चाहत दोनों थे। मैंने महसूस किया कि यह जन्मदिन का सबसे अनोखा तोहफा था।

बुआ ने मेरे बालों में उँगलियाँ फिराईं। "रवि, क्या यह सही है?" उन्होंने फुसफुसाया। मैंने कहा, "बुआ, यह हमारी भावनाएँ हैं, और आज की रात हमारी है।" हम दोनों ने खुद को उस पल में खो दिया।

मैंने बुआ को बिस्तर पर लिटाया। उनकी साड़ी की सिलवटें मेरे हाथों से खुल रही थीं। उनका शरीर गर्म था, और मैंने हर स्पर्श में उनकी भावनाओं को महसूस किया। वह रात अब यादों में बदल रही थी।

हमारी निकटता बढ़ती गई। बुआ की आहें कमरे में गूँज रही थीं। मैंने उनके गले पर चुंबन किया, और उन्होंने मेरी पीठ को सहलाया। हर पल में एक नई अनुभूति थी, जैसे हम दोनों एक-दूसरे को नए सिरे से जान रहे हों।

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रात गहराती गई, और हमारी दुनिया सिर्फ उस कमरे तक सिमट गई। बुआ ने मेरे कान में कहा, "यह जन्मदिन मैं कभी नहीं भूलूँगी।" मैंने उन्हें कसकर पकड़ा, और हम दोनों ने खुद को उस जादू में डुबो दिया।

सुबह होने से पहले कई पल ऐसे आए जहाँ हम रुके, बातें कीं, और फिर करीब आए। बुआ की आँखों में अब उदासी नहीं, बल्कि एक संतोष था। मैंने सोचा कि यह रिश्ता अब बदल चुका है, लेकिन हमारी भावनाएँ हमेशा सच्ची रहेंगी।

हमने घंटों तक एक-दूसरे को महसूस किया। हर स्पर्श में प्यार था, हर चुंबन में चाहत। बुआ ने मेरे सीने पर सिर रखा, और मैंने उनकी साँसों को सुना। वह रात अनंत लग रही थी।

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जैसे-जैसे समय बीतता गया, हमारी थकान बढ़ती गई, लेकिन इच्छा नहीं रुकी। बुआ ने मुस्कुराकर कहा, "रवि, तुमने मुझे जीना सिखाया।" मैंने उन्हें चुप कराया, और फिर से हम खो गए।

अंत में, जब सुबह की रोशनी आने लगी, हम एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे। बुआ की मुस्कान मेरे लिए सब कुछ थी। वह जन्मदिन की रात अब हमारी साझा याद बन चुकी थी।

मैंने बुआ के बालों को सहलाया, और उन्होंने मेरी आँखों में देखा। "कभी मत भूलना इस रात को," उन्होंने कहा। मैंने वादा किया, और हम दोनों चुप हो गए, बस एक-दूसरे को महसूस करते हुए।

उस पल में, सब कुछ शांत था। हमारी साँसें एक हो गईं, और दुनिया बाहर इंतज़ार कर रही थी। लेकिन अभी, हम सिर्फ हम थे।