भैया के साथ वो पहली रात

उस शाम घर में सब कुछ वैसा ही था जैसा हमेशा रहता है। मैं नेहा, अपनी किताबों के बीच डूबी हुई थी, क्योंकि कॉलेज के असाइनमेंट ने मुझे शाम से ही बांध रखा था। बाहर बारिश की बूंदें खिड़की पर टपटपाती हुई गिर रही थीं, और माँ रसोई में रात के खाने की तैयारी कर रही थीं। पापा अभी ऑफिस से लौटे नहीं थे, और भैया अजय अपने कमरे में कुछ काम कर रहे थे।

मैंने घड़ी की तरफ देखा, शाम के सात बज चुके थे। मेरी उम्र उन्नीस साल की थी, और मैं घर की छोटी बेटी होने के नाते हमेशा थोड़ी लाड़ली रही हूँ। अजय भैया मुझसे तीन साल बड़े हैं, और वो कॉलेज खत्म करके अब नौकरी की तलाश में लगे हुए हैं। हमारा परिवार छोटा सा है, दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय मोहल्ले में रहते हैं, जहां हर शाम पड़ोस से बच्चों की खेलने की आवाजें आती हैं। आज भी वैसा ही था, लेकिन बारिश ने सबको घरों में कैद कर रखा था।

मैंने किताब बंद की और रसोई की तरफ चली गई। माँ सब्जी काट रही थीं, और मैंने उनकी मदद करनी शुरू की। "नेहा, आज तू जल्दी सो जाना, कल कॉलेज है न," माँ ने कहा। मैंने हामी भरी, लेकिन मन में सोचा कि असाइनमेंट अभी आधा बाकी है। तभी भैया कमरे से निकले, उनके हाथ में फोन था। "माँ, पापा कब आएंगे? मुझे उनसे कुछ बात करनी है," उन्होंने पूछा। माँ ने बताया कि देर हो सकती है, ट्रैफिक की वजह से।

रात का खाना हम सबने साथ में खाया, जब पापा आ गए। बातें चलीं, पापा ने अपनी ऑफिस की कहानियां सुनाईं, और भैया ने अपनी जॉब सर्च के बारे में बताया। मैं चुपचाप सुनती रही, क्योंकि मेरा मन अभी भी किताबों में था। खाना खत्म होने के बाद मैं अपने कमरे में चली गई, और असाइनमेंट पर लग गई। रात के दस बज चुके थे, घर में सन्नाटा छा गया था।

कुछ देर बाद, मैंने महसूस किया कि भैया का कमरा मेरे कमरे के बगल में है, और वो अभी जाग रहे हैं। उनकी लाइट जल रही थी, क्योंकि दरवाजे के नीचे से रोशनी आ रही थी। मैंने सोचा, शायद वो भी पढ़ाई या कुछ काम कर रहे हैं। मेरी आँखें थक रही थीं, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। बारिश अब तेज हो गई थी, और बाहर ठंडी हवा चल रही थी।

इसे भी पढ़ें: भैया भाभी की गुप्त रात

मैं बिस्तर पर लेट गई, लेकिन मन अशांत था। पिछले कुछ दिनों से भैया के साथ मेरी बातें थोड़ी ज्यादा हो रही थीं। वो मुझे कॉलेज की बातें पूछते, मेरी मदद करते। लेकिन आज रात, कुछ अलग सा लग रहा था। मैंने खुद को समझाया कि ये सिर्फ थकान है। तभी दरवाजे पर हल्की सी दस्तक हुई। "नेहा, सो गई क्या?" भैया की आवाज थी।

मैंने दरवाजा खोला, वो खड़े थे, हाथ में एक किताब थी। "ये तेरी असाइनमेंट की मदद के लिए, मैंने नोट्स बनाए हैं," उन्होंने कहा। मैंने उन्हें अंदर आने दिया। कमरा छोटा था, हम दोनों बिस्तर के पास खड़े थे। बातें शुरू हुईं, पहले असाइनमेंट की, फिर कॉलेज की। भैया बैठ गए, और मैं उनके बगल में। उनकी आँखों में कुछ था, जो मैंने पहले नहीं देखा था।

बातें लंबी होती गईं। भैया ने बताया कि जॉब सर्च कितनी मुश्किल है, और मैंने अपनी कॉलेज की परेशानियां शेयर कीं। हम हंसते, और कभी चुप हो जाते। एक पल में, उनकी नजर मुझ पर टिकी रही, थोड़ी देर तक। मैंने महसूस किया कि मेरा दिल तेज धड़क रहा है। "भैया, तुम ठीक हो?" मैंने पूछा। उन्होंने मुस्कुरा कर कहा, "हाँ, बस तुझे देख रहा हूँ, कितनी बड़ी हो गई है।"

उस रात, हमारी बातें गहरी होती गईं। भैया ने बचपन की यादें ताजा कीं, कैसे हम साथ खेलते थे। लेकिन अब, वो यादें अलग रंग ले रही थीं। मैंने महसूस किया कि उनके करीब होने से कुछ अजीब सा लग रहा है, लेकिन बुरा नहीं। हमारी चुप्पी में एक टेंशन थी, जो शब्दों से ज्यादा बोल रही थी। भैया का हाथ मेरे कंधे पर रखा, और मैंने उसे हटाया नहीं।

इसे भी पढ़ें: बारिश की वो रात

रात गहराती गई, और बारिश की आवाज कमरे में गूंज रही थी। भैया ने कहा, "नेहा, कभी-कभी लगता है कि हम इतने करीब हैं, फिर भी दूर।" उनकी बात ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। मैंने अपनी भावनाओं को समझने की कोशिश की, लेकिन वो उलझी हुई थीं। क्या ये सिर्फ भाई-बहन का प्यार है, या कुछ और?

धीरे-धीरे, हमारी नजरें मिलीं। भैया ने मेरे चेहरे को छुआ, और मैं सिहर गई। वो स्पर्श अलग था, गर्माहट भरा। मैंने कुछ नहीं कहा, बस उनकी आँखों में देखती रही। फिर, वो करीब आए, और उनके होंठ मेरे होंठों से छू गए। वो पहला चुंबन था, जो मुझे हैरान कर गया, लेकिन मैंने विरोध नहीं किया।

उस पल, मेरे मन में उथल-पुथल मची थी। क्या ये सही है? लेकिन भावनाएं इतनी तेज थीं कि सोचने का मौका नहीं मिला। भैया ने मुझे अपनी बाहों में लिया, और मैंने खुद को छोड़ दिया। हमारा चुंबन गहरा होता गया, और मैं महसूस कर रही थी कि मेरा शरीर कुछ नया अनुभव कर रहा है।

भैया ने मेरी कमीज के बटन खोले, धीरे-धीरे। उनकी उंगलियां मेरी त्वचा पर फिसल रही थीं, और हर स्पर्श से एक करंट सा दौड़ता। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं, और बस उस पल में खो गई। "नेहा, मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ," उन्होंने फुसफुसाया। मैंने जवाब में उन्हें कस कर पकड़ लिया।

इसे भी पढ़ें: दीदी के साथ वो अनोखी रात

हम बिस्तर पर लेट गए, और भैया ने मेरे शरीर को सहलाना शुरू किया। उनकी हर हरकत में प्यार था, और मैं खुद को तैयार महसूस कर रही थी। ये मेरी पहली बार थी, और डर था, लेकिन भैया की आँखों में विश्वास था। उन्होंने मुझे धीरे से तैयार किया, हर कदम पर मेरी भावनाओं का ख्याल रखते हुए।

जब हम एक हुए, तो दर्द हुआ, लेकिन वो दर्द प्यार में घुल गया। भैया के हर मूवमेंट से एक नई सनसनी जाग रही थी, और मैं खुद को उस लहर में बहने दे रही थी। हमारी सांसें मिली हुई थीं, और कमरे में सिर्फ हमारी दुनिया थी। बारिश बाहर जारी थी, लेकिन अंदर एक तूफान था, जो हमें और करीब ला रहा था।

उस रात के बाद, सब कुछ बदल गया। लेकिन उस पल में, हम सिर्फ एक-दूसरे के थे। भैया ने मुझे गले लगाया, और मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं, उस गर्माहट में खोकर।

सुबह होने से पहले, हम फिर से एक-दूसरे की बाहों में थे। इस बार, डर कम था, और प्यार ज्यादा। भैया ने मेरे शरीर के हर हिस्से को छुआ, जैसे कोई नया खजाना ढूंढ रहे हों। मैंने भी खुद को खोल दिया, और नई भावनाओं को महसूस किया।

इसे भी पढ़ें: मामी के साथ वो अनकही रात

हमारी हर हरकत में एक रिदम था, जो धीरे-धीरे तेज होता गया। मैं महसूस कर रही थी कि ये सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक बंधन है। भैया की आँखों में मेरे लिए वो प्यार था, जो शब्दों से परे था।

रात बीतती गई, और हम थक कर एक-दूसरे से लिपटे रहे। बाहर बारिश रुक चुकी थी, लेकिन हमारे बीच का तूफान अभी शांत नहीं हुआ था। मैंने सोचा, ये शुरुआत है, या शायद एक रहस्य जो हम दोनों रखेंगे।

भैया ने मेरे कान में फुसफुसाया, "नेहा, ये हमारा पल है, हमेशा।" मैंने हामी भरी, और खुद को उसकी छाती पर रख दिया। सांसें धीमी हो रही थीं, लेकिन दिल की धड़कनें अभी भी तेज।

उस रात, हमने कई बार एक-दूसरे को महसूस किया, हर बार कुछ नया। कभी धीरे, कभी तेज, लेकिन हमेशा प्यार से। मैं खुद को पूरी तरह समर्पित कर चुकी थी, और भैया ने मुझे कभी निराश नहीं किया।

इसे भी पढ़ें: बरसात की रात में दीदी के साथ

सुबह की पहली किरण कमरे में आई, लेकिन हम अभी भी एक-दूसरे में खोए हुए थे। भैया का स्पर्श अब भी मेरी त्वचा पर था, और मैं उसकी यादों में डूबी हुई।

हमने बात की, बिना शब्दों के, सिर्फ नजरों से। वो पल इतना गहरा था कि समय रुक सा गया था। मैं महसूस कर रही थी कि ये मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत रहस्य है।

भैया ने मुझे फिर से अपनी बाहों में लिया, और हम एक बार फिर उस दुनिया में खो गए, जहां सिर्फ हम थे। हर स्पर्श, हर चुंबन, हर सांस मिलकर एक कहानी बुन रही थी।

और उस पल में, मैंने खुद को पूरी तरह से पाया, भैया के साथ।