बारिश की वो रात
मैं शाम को कॉलेज से लौटकर घर पहुंचा था। बाहर हल्की ठंडी हवा चल रही थी, और आसमान में बादल छाए हुए लग रहे थे। रोज की तरह, मैंने अपना बैग कमरे में रखा और किचन की तरफ गया, जहां मां कुछ नाश्ता तैयार कर रही थीं।
हमारा घर शहर के एक शांत इलाके में है, जहां शाम को पड़ोस के बच्चे खेलते रहते हैं। मैं अमित हूं, बाईस साल का, और अभी-अभी ग्रेजुएशन पूरा किया है। भाई राजेश की शादी दो साल पहले हुई थी, और नेहा भाभी घर में सबकी देखभाल करती हैं।
उस शाम भाई ऑफिस से देर से आने वाले थे, क्योंकि उनका कोई मीटिंग थी। मैंने सोचा कि आज थोड़ा पढ़ाई कर लूं, लेकिन मन नहीं लग रहा था। मां ने कहा, "अमित, जाकर हाथ-मुंह धो लो, चाय बनाई है।" मैंने हंसकर हामी भरी और बाथरूम की तरफ चला गया।
नेहा भाभी उस वक्त लिविंग रूम में थीं, कुछ किताब पढ़ रही थीं। वे अक्सर शाम को ऐसे ही समय बिताती हैं, क्योंकि भाई का काम व्यस्त रहता है। मैंने उन्हें देखा तो मुस्कुराकर बोला, "भाभी, आज क्या स्पेशल बना है?" वे हंसकर बोलीं, "कुछ नहीं, बस साधारण दाल-चावल।"
रात होने लगी थी, और बाहर बारिश की बूंदें गिरने लगीं। मैं अपने कमरे में बैठा असाइनमेंट कर रहा था, लेकिन खिड़की से आती बारिश की आवाज मुझे बार-बार विचलित कर रही थी। मां सोने चली गईं, और भाई का फोन आया कि वे रात को नहीं आ पाएंगे, क्योंकि रोड ब्लॉक हो गया है बारिश से।
मैंने भाभी को बताया, "भाई आज नहीं आएंगे, बारिश बहुत तेज है।" वे थोड़ा उदास लगीं, लेकिन बोलीं, "ठीक है, चलो डिनर कर लेते हैं।" हम दोनों ने साथ बैठकर खाना खाया, और बातें कीं घर-परिवार की। नेहा भाभी हमेशा से ही मिलनसार रही हैं, और मैं उनके साथ सहज महसूस करता हूं।
खाने के बाद मैंने बर्तन साफ करने में उनकी मदद की। बाहर बारिश जोरों से बरस रही थी, और घर में एक अजीब सी शांति छाई हुई थी। भाभी ने कहा, "अमित, आज मौसम कितना अच्छा है न? लेकिन अकेले में डर लगता है।" मैंने हंसकर कहा, "डरने की क्या बात, मैं हूं न।"
हम लिविंग रूम में बैठे टीवी देखने लगे। बारिश की आवाज तेज होती जा रही थी, और बिजली की चमक से कमरा कभी-कभी रोशन हो जाता था। भाभी थोड़ा करीब बैठ गईं, शायद ठंड लग रही थी। मैंने पूछा, "भाभी, क्या हुआ? सब ठीक है?"
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वे बोलीं, "हां, बस ये बारिश मुझे पुरानी यादें दिलाती है। शादी से पहले मैं गांव में रहती थी, वहां ऐसी रातें बहुत होती थीं।" मैंने उनकी बात सुनी, और धीरे-धीरे हमारी बातचीत गहरी होने लगी। मैंने बताया अपनी कॉलेज लाइफ के बारे में, और वे हंसती रहीं।
रात गहराती जा रही थी, और बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी। भाभी ने कहा, "अमित, तुम्हें नींद नहीं आ रही? जाओ सो जाओ।" लेकिन मुझे लगा कि वे अकेले नहीं रहना चाहतीं। मैंने कहा, "नहीं भाभी, थोड़ी देर और बैठते हैं।"
उस पल में, जब बिजली कड़ी, मैंने देखा कि भाभी की आंखों में एक अलग सी चमक थी। वे करीब आईं, और बोलीं, "तुम कितने अच्छे हो अमित, हमेशा सबका ख्याल रखते हो।" मेरे दिल में कुछ हलचल हुई, लेकिन मैंने खुद को संभाला।
फिर अचानक बिजली चली गई। घर में अंधेरा छा गया, और केवल बारिश की आवाज सुनाई दे रही थी। भाभी ने डरकर मेरा हाथ पकड़ लिया। "अमित, कैंडल जलाओ न," वे बोलीं। मैं उठा और कैंडल ढूंढने लगा।
कैंडल जलाकर वापस आया तो देखा भाभी सोफे पर बैठी थीं, उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी। मैं उनके पास बैठ गया, और हम चुपचाप बैठे रहे। धीरे-धीरे, उनकी सांसें मेरे कानों में गूंजने लगीं।
मैंने सोचा कि ये क्या हो रहा है। भाभी मेरी भाभी हैं, लेकिन इस रात की बारिश ने सब कुछ बदल दिया लगता था। वे बोलीं, "अमित, कभी-कभी जीवन में ऐसे पल आते हैं जब दिल कुछ और कहता है।" मैं चुप रहा, लेकिन मेरी नजरें उनकी ओर खिंच रही थीं।
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फिर उन्होंने अपना हाथ मेरे हाथ पर रखा। उनकी उंगलियां गर्म थीं, और मेरे शरीर में एक करंट सा दौड़ा। मैंने कहा, "भाभी, ये ठीक नहीं है। भाई..." लेकिन वे बोलीं, "शशश, बस आज की रात।"
बारिश की धारा बाहर तेज हो गई, और अंदर हम दोनों के बीच की दूरी मिटने लगी। मैंने उन्हें अपनी बाहों में लिया, और उनकी सांसें मेरे चेहरे पर महसूस हुईं। ये पल इतना नैचुरल लग रहा था, जैसे बारिश का हिस्सा हो।
उनके होंठ मेरे होंठों से मिले, और एक लंबा चुंबन हुआ। उनकी गर्माहट ने मुझे घेर लिया। मैंने उनके बालों में उंगलियां फेरते हुए कहा, "भाभी, आप कितनी खूबसूरत हैं।" वे शर्मा गईं, लेकिन करीब आ गईं।
धीरे-धीरे, हम सोफे से उठे और मेरे कमरे की तरफ चले। बारिश की आवाज अब संगीत जैसी लग रही थी। कमरे में पहुंचकर, मैंने दरवाजा बंद किया, और हम दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।
भाभी ने अपनी साड़ी का पल्लू गिराया, और मैंने उन्हें गले लगाया। उनकी त्वचा इतनी मुलायम थी, जैसे रेशम। मैंने उनके गले पर चुंबन किया, और वे सिसक उठीं। "अमित, धीरे," वे बोलीं।
मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया, और उनके शरीर को सहलाने लगा। हर स्पर्श में एक नई भावना थी, जैसे बारिश की बूंदें अलग-अलग महसूस होती हैं। उनकी आंखें बंद थीं, और चेहरा लाल हो रहा था।
फिर मैंने अपने कपड़े उतारे, और उनके साथ लेट गया। हमारी बॉडीज एक-दूसरे से सटीं, और गर्माहट ने सब कुछ भुला दिया। मैंने उनके स्तनों को छुआ, और वे कराह उठीं। ये अनुभव इतना गहरा था, जैसे दिल की गहराई से आ रहा हो।
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हमारे बीच का संबंध धीरे-धीरे बढ़ता गया। मैंने उनके शरीर के हर हिस्से को प्यार किया, और वे मेरे साथ बहती रहीं। बारिश बाहर रुक-रुक कर बरस रही थी, लेकिन हमारी दुनिया में केवल हम दोनों थे।
कुछ देर बाद, जब हम थककर लेटे थे, भाभी ने मेरे सीने पर सिर रखा। "अमित, ये रात कभी मत भूलना," वे बोलीं। मैंने उन्हें चूमा, और सोचा कि ये कितना जटिल है, लेकिन कितना सच्चा भी।
सुबह होने लगी थी, बारिश थम चुकी थी। लेकिन हमारे बीच की वो गर्माहट अभी भी बाकी थी। हम चुपचाप लेटे रहे, एक-दूसरे की सांसें सुनते हुए।
फिर भाभी उठीं, और बोलीं, "अब सब नॉर्मल हो जाना चाहिए।" लेकिन उनकी आंखों में वो भाव था जो बता रहा था कि ये शुरुआत है। मैंने हामी भरी, लेकिन दिल में एक तूफान था।
दिन चढ़ने लगा, और घर की रौनक वापस आ गई। लेकिन वो रात की यादें मेरे जेहन में हमेशा रहेंगी। नेहा भाभी अब मेरे लिए कुछ और ही हो गई थीं।
शाम को जब भाई लौटे, सब कुछ सामान्य लग रहा था। लेकिन मेरी नजरें भाभी से मिलीं, और एक मुस्कान छिप गई। जीवन की ये अनकही कहानियां कितनी गहरी होती हैं।
अगली रात फिर बारिश हुई, और हम दोनों फिर से उसी दुनिया में खो गए। हर बार नया अनुभव, नई भावनाएं। भाभी की गर्माहट अब मेरी आदत बन गई थी।
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एक दिन, जब हम अकेले थे, भाभी ने कहा, "अमित, क्या ये गलत है?" मैंने कहा, "शायद, लेकिन दिल मानता नहीं।" हमने फिर वही पल जिए, लेकिन इस बार ज्यादा गहराई से।
उनके शरीर को छूना अब जैसे एक कला हो गई थी। हर स्पर्श में प्यार था, हर चुंबन में जुनून। बारिश की रातें अब हमारी हो गई थीं।
समय बीतता गया, लेकिन हमारा रिश्ता छिपा रहा। भाई को कुछ पता नहीं चला, और हम दोनों अपने कन्फ्लिक्ट से जूझते रहे। लेकिन वो गर्माहट कभी कम नहीं हुई।
एक रात, जब बारिश बहुत तेज थी, हम फिर मिले। भाभी की आंखें नम थीं। "अमित, मैं तुम्हें प्यार करने लगी हूं," वे बोलीं। मैंने उन्हें गले लगाया, और वो पल अनंत लग रहा था।
हमारे बीच का संबंध अब केवल शारीरिक नहीं था, बल्कि भावनात्मक भी। हर सीन में नई गहराई आती, नई सेंसेशन। बारिश की बूंदें जैसे हमारी कहानी की गवाह थीं।
फिर भी, अंदर एक डर था कि ये कब तक चलेगा। लेकिन उस पल में, हम केवल एक-दूसरे के थे। गर्म भाभी की वो रातें मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गईं।
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अब जब भी बारिश होती है, मैं उन पलों को याद करता हूं। नेहा भाभी की मुस्कान, उनकी गर्माहट, सब कुछ जीवंत हो जाता है। जीवन की ये अनकही सच्चाई कितनी मीठी होती है।
एक शाम, जब हम फिर अकेले थे, भाभी ने मेरे कान में फुसफुसाया, "आज फिर वही..." मैंने हंसकर उन्हें उठाया, और कमरे की तरफ चले। बारिश शुरू हो चुकी थी।
उनके शरीर को सहलाते हुए, मैंने महसूस किया कि हर बार कुछ नया है। उनकी सिसकियां, मेरी सांसें, सब मिलकर एक संगीत बना रहे थे।
हम लेटे रहे, बातें करते हुए। भाभी ने अपनी जिंदगी की कहानियां सुनाईं, और मैंने अपनी। ये इमोशन्स हमें और करीब ला रहे थे।
लेकिन कहीं न कहीं, गिल्ट था। "क्या हम ये जारी रखें?" मैंने पूछा। वे बोलीं, "दिल कहता है हां।" और हम फिर खो गए।
बारिश की वो रातें अब हमारी रूटीन बन गईं। हर बार वैरायटी, हर बार नई भावना। नेहा भाभी की गर्माहट मेरे लिए सब कुछ थी।
एक दिन, भाई ने कुछ शक किया, लेकिन हमने संभाल लिया। जीवन की ये जटिलताएं हमें मजबूत बना रही थीं।
अब भी, जब मैं अकेला होता हूं, वो यादें आती हैं। बारिश की रात, गर्म भाभी, और हमारा अनकहा प्यार।
हम फिर मिले, उस रात। भाभी की आंखों में वही जुनून था। मैंने उन्हें चूमा, और समय रुक सा गया।
उनकी त्वचा पर मेरी उंगलियां फिसल रही थीं, और वे मेरे नाम पुकार रही थीं। ये पल इतना सेंसरी था, जैसे हर इंद्रिय जागृत हो।
हम थककर लेटे, एक-दूसरे को देखते हुए। बारिश बाहर धीमी हो गई थी, लेकिन हमारे दिल की धड़कनें तेज।