भैया भाभी की गुप्त रात

शाम का समय था, और मैं अपनी किताबों के बीच डूबी हुई थी। घर में शादी की थकान अभी भी महसूस हो रही थी, लेकिन आज का दिन थोड़ा शांत लग रहा था। मैं रिया, बीस साल की, कॉलेज की छात्रा, अपने कमरे में बैठी थी जहां खिड़की से बाहर की हल्की हवा आ रही थी।

हमारा घर दिल्ली के एक शांत इलाके में है, जहां हर शाम को पड़ोस की आवाजें धीमी पड़ जाती हैं। भैया राहुल की शादी को अभी दो दिन ही हुए थे, और पूरा घर अभी भी उत्सव के माहौल में था। मैं रोज की तरह चाय बनाकर लाई और माँ से बातें करने लगी।

माँ रसोई में व्यस्त थीं, और पापा अपने काम से लौटे ही थे। "रिया, आज नेहा भाभी को थोड़ा आराम करने दो," माँ ने कहा। नेहा भाभी, जो अब हमारे परिवार का हिस्सा बन चुकी थीं, ऊपर के कमरे में थीं। मैंने हामी भरी और अपनी किताब वापस उठा ली।

राहुल भैया हमेशा से मेरे लिए एक आदर्श रहे हैं। तीस साल के, एक सफल बिजनेसमैन, जिन्होंने नेहा भाभी से प्रेम विवाह किया था। नेहा भाभी भी बेहद खूबसूरत और मिलनसार हैं, पच्चीस साल की, एक स्कूल टीचर। शादी के दिन से ही घर में खुशी का माहौल था।

मैंने सोचा कि आज रात को जल्दी सो जाऊँगी, क्योंकि कल कॉलेज जाना था। लेकिन जैसे-जैसे शाम ढलती गई, घर में एक अलग सी शांति छा गई। पापा और माँ अपने कमरे में चले गए, और मैं भी अपने बिस्तर पर लेट गई।

रात के करीब नौ बजे होंगे, जब मैं पानी पीने के लिए उठी। घर अंधेरा था, सिर्फ ऊपर की मंजिल से हल्की रोशनी आ रही थी। भैया और भाभी का कमरा वहीं था, जहां शादी के बाद वे रह रहे थे। मैं चुपचाप पानी पीकर लौट रही थी, तभी मुझे लगा कि कुछ आवाजें आ रही हैं।

मैं रुक गई। यह कोई बातचीत की आवाज थी, हल्की और नरम। मेरी जिज्ञासा बढ़ गई, क्योंकि मैं जानती थी कि आज उनकी सुहागरात जैसी कोई चीज नहीं थी, शादी तो दो दिन पहले हो चुकी थी। लेकिन फिर भी, घर में एक नई ऊर्जा थी।

मैंने धीरे से सीढ़ियाँ चढ़ीं, यह सोचकर कि शायद भाभी को कुछ चाहिए। कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला था, और अंदर से हल्की लाइट जल रही थी। मैंने झांकने की कोशिश की, लेकिन खुद को रोका। फिर भी, मेरे कदम नहीं रुके।

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कमरे के बाहर खड़ी होकर मैंने सुना। भैया कह रहे थे, "नेहा, आज की रात खास है।" उनकी आवाज में एक गर्माहट थी, जो मैंने पहले कभी नहीं सुनी। नेहा भाभी ने हँसते हुए जवाब दिया, "हाँ राहुल, लेकिन इतनी जल्दी क्या है?"

मैं वहीं खड़ी रही, दिल की धड़कन तेज हो गई। यह गलत था, लेकिन मैं खुद को रोक नहीं पाई। कमरे की खिड़की थोड़ी खुली थी, और मैं बाहर की बालकनी से देख सकती थी। मैं चुपचाप वहाँ चली गई, जहां से कमरे का कुछ हिस्सा दिखता था।

अंदर, भैया और भाभी बिस्तर पर बैठे थे। नेहा भाभी लाल साड़ी में थीं, जो शादी की थी, और भैया शर्ट में। वे एक-दूसरे की आँखों में देख रहे थे, जैसे दुनिया में बस वही दो हों। मेरी साँसें तेज हो गईं, लेकिन मैं हिली नहीं।

भैया ने धीरे से भाभी का हाथ पकड़ा और कहा, "तुम्हें पता है, मैं कितना इंतजार कर रहा था इस पल का।" नेहा भाभी शरमा गईं, उनकी आँखें नीची हो गईं। मैंने महसूस किया कि मेरे अंदर एक अजीब सी उत्तेजना जाग रही थी, जो मैं समझ नहीं पा रही थी।

वे बातें कर रहे थे, अपनी पुरानी यादों के बारे में। भैया ने बताया कैसे वे पहली बार मिले थे, और नेहा भाभी ने हँसकर कहा कि वे हमेशा से उन्हें पसंद करती थीं। यह सब इतना प्यारा लग रहा था कि मैं खुद को वहाँ से हटा नहीं पाई।

धीरे-धीरे, भैया ने भाभी को अपनी बाहों में लिया। उनका स्पर्श इतना नरम था, जैसे वे कोई नाजुक फूल छू रहे हों। नेहा भाभी ने अपनी आँखें बंद कर लीं, और他们的 होंठ मिले। मैंने अपनी साँस रोकी, यह दृश्य मेरे लिए नया था, लेकिन आकर्षक।

मेरे मन में संघर्ष चल रहा था। मैं अपनी भाभी और भैया की निजी जिंदगी में दखल दे रही थी, लेकिन यह जिज्ञासा मुझे रोक नहीं रही थी। मैंने सोचा कि शायद मुझे चले जाना चाहिए, लेकिन मेरे पैर जड़ हो गए थे।

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कमरे में अब रोशनी हल्की हो गई थी, सिर्फ एक लैंप जल रहा था। भैया ने धीरे से भाभी की साड़ी का पल्लू सरकाया, और नेहा भाभी ने कोई विरोध नहीं किया। उनकी त्वचा चमक रही थी, और भैया की आँखों में एक गहरा प्यार था।

वे एक-दूसरे को छू रहे थे, धीरे-धीरे, जैसे हर स्पर्श में एक कहानी हो। नेहा भाभी की साँसें तेज हो गईं, और वे भैया के गले लग गईं। मैंने महसूस किया कि मेरे शरीर में एक गर्माहट फैल रही थी, जो मैंने पहले कभी नहीं महसूस की।

भैया ने भाभी को बिस्तर पर लिटाया, और खुद उनके ऊपर झुके।他们的 होंठ फिर मिले, इस बार ज्यादा गहराई से। नेहा भाभी के हाथ भैया की पीठ पर घूम रहे थे, और वे दोनों एक-दूसरे में खोए हुए लग रहे थे।

मैं बाहर खड़ी थी, बालकनी की रेलिंग पकड़े हुए। हवा ठंडी थी, लेकिन मुझे गर्मी लग रही थी। यह दृश्य मुझे अपनी भावनाओं से रूबरू करा रहा था, जो मैंने कभी सोची नहीं थीं।

अंदर, भैया ने भाभी की ब्लाउज खोली, और नेहा भाभी ने शर्माते हुए अपनी आँखें बंद कर लीं। उनकी देह इतनी सुंदर लग रही थी, जैसे कोई मूर्ति। भैया ने धीरे से उसके स्तनों को छुआ, और नेहा भाभी की एक हल्की सी आह निकली।

यह सब इतना इंटेंस था कि मैं अपनी साँसें नियंत्रित नहीं कर पा रही थी। मेरे मन में विचार आ रहे थे कि क्या यह सही है, लेकिन शरीर की प्रतिक्रिया कुछ और कह रही थी। मैंने खुद को छुआ, बिना सोचे, और एक झुरझुरी सी महसूस हुई।

भैया अब भाभी के पूरे शरीर को चूम रहे थे, धीरे-धीरे नीचे की ओर। नेहा भाभी की आँखें बंद थीं, और वे आनंद में डूबी हुई लग रही थीं। उनके मुँह से हल्की-हल्की आवाजें आ रही थीं, जो मुझे और उत्तेजित कर रही थीं।

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मैंने सोचा कि मैं यह सब क्यों देख रही हूँ, लेकिन अब रुकना मुश्किल था। यह मेरे लिए एक सबक की तरह था, प्यार और अंतरंगता का। भैया ने अपनी शर्ट उतारी, और उनका मजबूत शरीर दिखा। नेहा भाभी ने उसे छुआ, जैसे कोई खजाना हो।

वे अब पूरी तरह एक-दूसरे के साथ थे, कपड़े अलग हो चुके थे। भैया ने धीरे से प्रवेश किया, और नेहा भाभी की एक दर्द भरी लेकिन सुखद आह निकली। उनके शरीर एक लय में हिल रहे थे, जैसे कोई संगीत बज रहा हो।

मैं बाहर खड़ी देख रही थी, मेरी आँखें चौड़ी हो गईं। यह दृश्य इतना जीवंत था कि मैं खुद को उसमें महसूस कर रही थी। मेरे हाथ अब मेरे शरीर पर घूम रहे थे, अनजाने में, और मैंने एक गहरा सुख महसूस किया।

भैया और भाभी की गति बढ़ गई,他们的 साँसें तेज हो गईं। नेहा भाभी भैया को कसकर पकड़े हुई थीं, और वे दोनों चरम पर पहुँच रहे थे। उनकी आहें कमरे में गूँज रही थीं, और मैं भी उसी में खो गई।

अचानक, उन्होंने एक साथ चरम को छुआ, और कमरा शांत हो गया। वे एक-दूसरे की बाहों में लेटे थे, साँसें सामान्य हो रही थीं। मैं अभी भी बाहर थी, मेरी साँसें तेज, और मन में एक नई भावना जागी हुई।

वे बातें करने लगे, हल्की-हल्की, प्यार भरी। भैया ने कहा, "नेहा, तुम मेरी जिंदगी हो।" नेहा भाभी ने मुस्कुराकर जवाब दिया, "और तुम मेरी।" मैंने महसूस किया कि यह सिर्फ शारीरिक नहीं, भावनात्मक भी था।

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मैं धीरे से वहाँ से हटी, लेकिन मेरे मन में वह दृश्य बार-बार घूम रहा था। रात गहरी हो गई थी, और मैं अपने कमरे में लेटी सोच रही थी कि जीवन कितना जटिल है।

अगली सुबह, सब कुछ सामान्य लग रहा था। नेहा भाभी चाय बना रही थीं, और भैया काम पर जाने की तैयारी में थे। मैंने उनसे नजरें मिलाईं, लेकिन कुछ नहीं कहा। मेरे अंदर एक रहस्य था, जो मुझे बदल रहा था।

दिन बीतते गए, लेकिन वह रात मेरे मन में बसी रही। कभी-कभी मैं अकेले में सोचती, और एक अजीब सी खुशी महसूस करती। भैया और भाभी का रिश्ता अब और मजबूत लगता था, और मैं उनकी खुशी में हिस्सेदार महसूस करती थी।

एक शाम, जब घर में सब सो चुके थे, मैं फिर से बालकनी पर गई। कमरे की लाइट जल रही थी, और मैंने झांका। इस बार वे फिर से करीब थे, लेकिन ज्यादा सहज। नेहा भाभी भैया के सीने पर सिर रखे लेटी थीं, और वे बातें कर रहे थे।

धीरे-धीरे, उनका स्पर्श फिर से गहरा होने लगा। भैया ने भाभी को चूमा, और नेहा भाभी ने जवाब दिया। इस बार, वे ज्यादा खुलकर थे, जैसे अब कोई झिझक नहीं। मैं देखती रही, मेरी भावनाएँ फिर से जागीं।

भैया ने भाभी को अपनी गोद में लिया, और वे एक नई मुद्रा में थे। नेहा भाभी ऊपर थीं, और他们的 गति धीमी लेकिन गहरी थी। उनकी आँखें एक-दूसरे में डूबी हुई थीं, और आनंद की लहरें साफ दिख रही थीं।

मैंने महसूस किया कि हर बार कुछ नया था, कोई नई भावना। इस बार, यह ज्यादा भावुक लग रहा था, जैसे वे अपनी आत्मा को साझा कर रहे हों। मेरे शरीर में फिर से वही गर्माहट फैली, और मैं खुद को नियंत्रित नहीं कर पाई।

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वे चरम पर पहुँचे, इस बार ज्यादा तीव्रता से। नेहा भाभी की आवाज ऊँची हो गई, और भैया ने उन्हें कसकर पकड़ लिया। शांति के बाद, वे हँस रहे थे, जैसे कोई मजाक साझा कर रहे हों।

मैं वहाँ से चली गई, लेकिन मेरे मन में सवाल थे। क्या यह जिज्ञासा कभी खत्म होगी? या यह मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गई है? समय बताएगा, लेकिन अभी तो यह सब इतना जीवंत लगता है।

कुछ दिन बाद, घर में एक पार्टी थी। नेहा भाभी सबको संभाल रही थीं, और भैया उनके साथ थे। मैंने उन्हें देखा, और एक मुस्कान आई। रात को, जब सब चले गए, मैं फिर से अपनी जगह पर थी।

इस बार, वे ज्यादा खेल-खेल में थे। नेहा भाभी ने भैया को धक्का दिया, और वे दोनों हँसते हुए बिस्तर पर गिरे। उनका स्पर्श अब ज्यादा आत्मविश्वास भरा था, जैसे वे एक-दूसरे को अच्छे से जान चुके हों।

भैया ने भाभी के शरीर को हर जगह चूमा, और नेहा भाभी ने भी वैसा ही किया। यह समानता देखकर मुझे अच्छा लगा, जैसे प्यार में कोई ऊपर-नीचे नहीं। उनकी लय तेज हो गई, और आनंद की ऊँचाई पर वे फिर से एक हो गए।

मैं देखती रही, मेरी भावनाएँ अब ज्यादा परिपक्व लग रही थीं। यह सिर्फ देखना नहीं, समझना था। प्यार की गहराई, अंतरंगता की सुंदरता।

रात गहराती जा रही थी, और वे अभी भी एक-दूसरे की बाहों में थे, धीरे-धीरे फिर से शुरुआत करते हुए।