बीवी की बहन की चाहत
सुबह की धूप कमरे में धीरे-धीरे फैल रही थी, और मैं बिस्तर पर लेटा हुआ कॉफी का कप थामे अखबार पढ़ रहा था। आज रविवार था, इसलिए ऑफिस की कोई जल्दी नहीं थी। प्रिया किचन में नाश्ता बना रही थी, और उसकी छोटी बहन नेहा, जो पिछले हफ्ते हमारे घर रहने आई थी, अभी सो रही थी। हमारा छोटा सा फ्लैट दिल्ली के एक व्यस्त इलाके में था, जहां रोज की भागदौड़ के बीच ये शांत पल दुर्लभ लगते थे।
प्रिया और मैं पिछले पांच साल से शादीशुदा थे। वो एक स्कूल टीचर थी, हमेशा मुस्कुराती हुई और घर को संभालने वाली। नेहा, जो प्रिया से तीन साल छोटी थी, कॉलेज खत्म करने के बाद जॉब की तलाश में थी। उसकी मां ने कहा था कि शहर में अकेली न रहे, इसलिए वो हमारे पास आ गई। मैं एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता था, और घर पर नेहा का होना शुरू में थोड़ा अजीब लगा, लेकिन अब आदत हो गई थी।
नाश्ते की मेज पर हम तीनों बैठे। प्रिया ने परांठे बनाए थे, और नेहा नींद से भरी आंखों से आकर बैठ गई। "भैया, आज क्या प्लान है?" नेहा ने मुस्कुराते हुए पूछा। मैंने कहा, "कुछ खास नहीं, शायद शाम को बाहर घूमने चलें।" प्रिया हंसते हुए बोली, "हां, नेहा को भी शहर दिखा दो, वो बोर हो रही है अकेली।" वो दोनों बहनें हमेशा एक-दूसरे की फिक्र करती थीं, और मैं उनके बीच की ये बॉन्डिंग देखकर खुश होता था।
दिन भर हम घर पर ही रहे। मैं लैपटॉप पर कुछ काम निपटा रहा था, जबकि प्रिया और नेहा साथ में टीवी देख रही थीं। नेहा की उम्र करीब 25 साल थी, और वो काफी जीवंत थी – हमेशा हंसती-खेलती। प्रिया 28 की थी, और मैं 30 का। हमारा वैवाहिक जीवन सुखी था, लेकिन नेहा के आने से घर में एक नई ऊर्जा आ गई थी। शाम को हम तीनों पार्क में घूमने गए, जहां नेहा ने हमें अपनी कॉलेज की कहानियां सुनाईं।
रात का खाना खाने के बाद, प्रिया ने कहा कि वो थक गई है और जल्दी सो जाएगी। नेहा और मैं लिविंग रूम में बैठे फिल्म देख रहे थे। "भैया, आपको प्रिया दीदी से कितना प्यार है?" नेहा ने अचानक पूछा। मैंने मुस्कुराकर कहा, "बहुत, वो मेरी जिंदगी है।" वो चुप हो गई, लेकिन उसकी आंखों में कुछ अनकहा सा था। प्रिया बेडरूम से आवाज देकर बोली, "अजय, नेहा को कंपनी दो, मैं सो रही हूं।"
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फिल्म खत्म होने के बाद, नेहा ने कहा कि उसे नींद नहीं आ रही। हम बालकनी में खड़े होकर बातें करने लगे। शहर की लाइट्स नीचे चमक रही थीं। नेहा ने बताया कि उसका ब्रेकअप हो गया था, और वो उदास महसूस कर रही थी। मैंने उसे सांत्वना दी, "समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।" उसकी आंखें नम हो गईं, और वो मेरे कंधे पर सिर टिका दी। वो पल अजीब था, लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा।
अगले दिन ऑफिस से लौटकर मैंने देखा कि प्रिया और नेहा किचन में हंस रही थीं। प्रिया ने मुझे देखते ही कहा, "अजय, नेहा आज तुम्हारे साथ मार्केट जाना चाहती है। मैं थक गई हूं, तुम ले जाओ।" मैं सहमत हो गया। मार्केट में नेहा ने कुछ कपड़े खरीदे, और रास्ते में वो मेरे करीब चल रही थी। उसकी उंगलियां मेरी उंगलियों से छू गईं, लेकिन मैंने इसे संयोग माना। घर लौटकर प्रिया ने पूछा, "मजा आया?" नेहा ने शरमाते हुए हां कहा।
धीरे-धीरे, नेहा का व्यवहार बदलने लगा। वो मेरे साथ ज्यादा समय बिताने लगी, और प्रिया भी इसे प्रोत्साहित करती लगती थी। एक शाम, प्रिया ने कहा, "अजय, नेहा को तुम्हारी कंपनी अच्छी लगती है। वो अकेली महसूस करती है।" मैंने सोचा कि शायद वो बहन की मदद करना चाहती है। लेकिन मेरे मन में कुछ उथल-पुथल होने लगी थी। नेहा की मुस्कान, उसकी बातें, सब कुछ आकर्षक लगने लगा था।
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एक रात, प्रिया काम से देर से लौटी। नेहा और मैं डिनर कर रहे थे। वो बोली, "भैया, अगर मैं कहूं कि मुझे तुम्हारी तरह कोई चाहिए, तो?" मैं चौंक गया, लेकिन हंसकर टाल दिया। प्रिया आकर बैठ गई और बोली, "नेहा, अजय अच्छा इंसान है। तू उससे सीख।" उसकी बातों में कुछ छिपा सा अर्थ लग रहा था। रात को बिस्तर पर प्रिया ने मुझसे कहा, "अजय, नेहा उदास है। अगर तुम उसे खुश कर सको, तो..." मैंने पूछा, "क्या मतलब?" वो चुप हो गई।
मेरे मन में कन्फ्लिक्ट बढ़ रहा था। प्रिया हमेशा से ओपन-माइंडेड थी, लेकिन ये बात अजीब थी। नेहा के प्रति मेरी भावनाएं बदल रही थीं – वो अब सिर्फ साली नहीं लगती थी। अगले दिन, नेहा घर पर अकेली थी जब मैं जल्दी लौटा। वो मेरे कमरे में थी, मेरी शर्ट ट्राय कर रही थी। "भैया, कैसी लग रही हूं?" उसने मुस्कुराकर पूछा। मैंने कहा, "अच्छी।" लेकिन मेरी नजरें उस पर टिक गईं।
प्रिया शाम को आई और हमें साथ देखकर मुस्कुराई। रात को खाने के बाद, प्रिया ने कहा, "आज हम तीनों साथ सोएंगे, नेहा को डर लग रहा है।" मैं हैरान था, लेकिन सहमत हो गया। बिस्तर पर नेहा मेरे बगल में लेटी थी, प्रिया दूसरी तरफ। रात के सन्नाटे में नेहा की सांसें तेज चल रही थीं। प्रिया ने धीरे से कहा, "अजय, नेहा को प्यार दो। वो हमारी है।" मेरे मन में उथल-पुथल थी, लेकिन प्रिया की आंखों में कोई जलन नहीं थी।
मैंने नेहा की तरफ देखा। उसकी आंखें बंद थीं, लेकिन शरीर कांप रहा था। प्रिया ने मेरा हाथ पकड़कर नेहा के हाथ पर रख दिया। वो पल निर्णायक था। नेहा ने आंखें खोलीं और मुझे देखा। "भैया..." उसने फुसफुसाया। मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया। प्रिया चुपचाप देख रही थी, उसकी मुस्कान में संतोष था। नेहा के होंठ मेरे होंठों से मिले, और वो चुंबन गहरा होता गया।
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नेहा का शरीर नरम और गर्म था। मैंने उसके गालों को छुआ, फिर गर्दन पर吻 किया। प्रिया ने धीरे से नेहा की कमीज उतारी, और मैंने उसके स्तनों को सहलाया। नेहा की सिसकियां कमरे में गूंज रही थीं। "अजय, मुझे महसूस करो," प्रिया ने कहा। मैंने नेहा को पूरी तरह नग्न किया, और उसकी चिकनी त्वचा पर हाथ फेरा। वो कराह उठी जब मैंने उसके निप्पल्स को मुंह में लिया।
प्रिया अब हमें देख रही थी, उसकी आंखों में उत्साह था। नेहा ने मेरी पैंट उतारी और मेरे लिंग को छुआ। उसकी उंगलियां कांप रही थीं, लेकिन वो रुक नहीं रही थी। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके पैरों के बीच गया। नेहा की योनि गीली थी, और जब मैंने प्रवेश किया, तो वो चीख पड़ी। प्रिया ने उसका हाथ थामा, "आराम से, नेहा।" वो दर्द और सुख के मिश्रण में थी।
मेरी गतियां धीमी से तेज हुईं। नेहा की कमर उछल रही थी, और उसके नाखून मेरी पीठ में गड़ रहे थे। "भैया, और जोर से," उसने कहा। प्रिया अब हमारे साथ जुड़ गई, वो नेहा के स्तनों को चूम रही थी। ये अनुभव नया था – तीनों की भावनाएं एक हो गईं थीं। नेहा का शरीर कांप उठा जब वो चरम पर पहुंची, और मैं भी उसके अंदर ही झड़ गया।
सांसें थमने के बाद, हम तीनों एक-दूसरे से लिपटे लेटे थे। नेहा की आंखों में आंसू थे, लेकिन खुशी के। प्रिया ने कहा, "अब नेहा खुश है, अजय।" मैंने दोनों को गले लगाया। अगली सुबह, सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन हमारे बीच एक नई समझ थी। नेहा अब ज्यादा मुस्कुराती थी, और प्रिया संतुष्ट।
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कुछ दिन बाद, प्रिया ने अकेले में मुझसे कहा, "अजय, नेहा को और चाहिए। क्या तुम तैयार हो?" मैंने हां कहा, क्योंकि अब ये हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गया था। शाम को नेहा मेरे कमरे में आई, प्रिया बाहर थी। "भैया, आज सिर्फ हम," उसने कहा। मैंने उसे दीवार से सटा लिया और उसके होंठ चूमे। नेहा ने मेरे कपड़े उतारे, और मैंने उसे घुटनों पर बिठाया।
उसने मेरे लिंग को मुंह में लिया, धीरे-धीरे चूसते हुए। उसकी जीभ की गर्मी अवर्णनीय थी। मैंने उसके बाल पकड़े और गति बढ़ाई। नेहा कराह रही थी, लेकिन रुक नहीं रही। फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके पैर फैलाए। इस बार मैंने उसके गुदाद्वार को छुआ, लेकिन वो तैयार नहीं थी। "योनि में ही, भैया," उसने कहा। प्रवेश करते ही वो उछल पड़ी।
हमारी गतियां तालमेल में थीं। नेहा की योनि टाइट थी, और हर धक्के में सुख की लहर दौड़ती थी। "मैं तुम्हारी हूं," उसने फुसफुसाया। मैंने उसके स्तनों को दबाया, निप्पल्स को काटा। चरम पर पहुंचते ही हम दोनों एक साथ झड़ गए। प्रिया दरवाजे पर खड़ी देख रही थी, मुस्कुराते हुए।
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समय बीतता गया, और ये संबंध गहरा होता गया। एक रात, प्रिया ने कहा, "आज मैं भी शामिल हूं।" हम तीनों ने एक-दूसरे को छुआ, चूमा। नेहा प्रिया के शरीर को सहला रही थी, और मैं दोनों को। ये इमोशनल था – जलन नहीं, सिर्फ प्यार। नेहा की योनि में प्रवेश करते हुए मैंने प्रिया को चूमा।
नेहा की सिसकियां, प्रिया की कराहें, सब मिश्रित हो गए। हमने पोजीशन बदली – नेहा ऊपर, मैं नीचे। उसकी कमर की मूवमेंट्स जादुई थीं। प्रिया ने नेहा के पीछे से उसे छुआ। चरम पर, हम सब एक साथ पहुंचे। वो रात अविस्मरणीय थी।
अब नेहा हमारी जिंदगी का हिस्सा थी। प्रिया की वजह से ये सब हुआ, और मैं आभारी था। एक शाम, नेहा मेरे बगल में लेटी थी, प्रिया सो रही थी। "भैया, मैं तुम्हें प्यार करती हूं," उसने कहा। मैंने उसे चूमा, और हम फिर से एक हो गए। नेहा की योनि की गर्मी, उसके शरीर की सुगंध, सब कुछ परफेक्ट था। हम धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे, सुख की गहराइयों में डूबते हुए।