चाची की साजिश और भाभी की आग
सुबह की धूप अभी-अभी खिड़की से अंदर झांक रही थी, जब मैं अपनी रोज की दिनचर्या में लगा हुआ था। हमारे छोटे से घर में, जहां परिवार की हलचल हमेशा सुबह से शुरू हो जाती है, मैं चाय की प्याली हाथ में लिए बालकनी में खड़ा था। शहर की व्यस्त सड़क नीचे से गुजर रही थी, और मैं बस आने वाले दिन के बारे में सोच रहा था, काम पर जाने की तैयारी में।
मैं अमित हूं, तेईस साल का, और हमारे परिवार में मां, पापा, चाची रेखा और उनकी भाभी नेहा रहती हैं। चाची रेखा मेरी मां की छोटी बहन हैं, जो कुछ साल पहले विधवा हो गईं और हमारे साथ रहने आ गईं। नेहा भाभी चाची के भाई की पत्नी हैं, जो हाल ही में अपने पति से अलग होकर यहां आई हैं। हमारा घर छोटा है, लेकिन रिश्तों की गर्माहट से भरा हुआ।
उस दिन पापा काम पर चले गए थे, और मां बाजार गई थीं। मैं घर में अकेला था, लेकिन तभी चाची रेखा ने मुझे आवाज दी। वे किचन में कुछ बना रही थीं, और मैं उनके पास गया। नेहा भाभी भी वहां थीं, चुपचाप सब्जियां काट रही थीं। हमारी बातें सामान्य थीं, मौसम की, परिवार की।
चाची रेखा हमेशा से ही घर की रौनक रही हैं। उनकी उम्र करीब चालीस होगी, लेकिन उनका चेहरा अभी भी जवानी की चमक लिए हुए है। नेहा भाभी थोड़ी छोटी हैं, शायद छत्तीस के आसपास, और उनकी आंखों में एक उदासी हमेशा छाई रहती है। उनके पति से अलगाव के बाद वे चुप-चुप सी रहने लगी थीं।
दोपहर हुई, और मैं अपने कमरे में किताब पढ़ रहा था। चाची अचानक आईं और बोलीं, "अमित, नेहा को थोड़ी मदद चाहिए। वो कुछ काम कर रही है, जाकर देखो।" मैं उठा और नेहा भाभी के कमरे की तरफ गया। वे वहां अलमारी साफ कर रही थीं, और मैंने पूछा कि क्या मदद करूं।
नेहा भाभी ने मुस्कुराकर कहा, "हां, अमित, ये भारी सामान ऊपर रख दो।" मैंने मदद की, और उस दौरान हमारी बातें शुरू हो गईं। वे अपने पुराने दिनों के बारे में बताने लगीं, कैसे जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं। उनकी आवाज में एक दर्द था, जो मुझे छू गया।
शाम को चाची ने सबको साथ बैठने को कहा। हम लिविंग रूम में थे, चाय पी रहे थे। नेहा भाभी थोड़ी असहज लग रही थीं, लेकिन चाची ने बातें घुमाकर उनके अलगाव पर ला दीं। "नेहा, जीवन में सब कुछ ठीक हो जाएगा," चाची ने कहा। मैं चुपचाप सुन रहा था, परिवार की इन बातों में शामिल होना मेरी आदत थी।
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रात हुई, और घर शांत था। मैं सोने की तैयारी कर रहा था, तभी चाची मेरे कमरे में आईं। वे बोलीं, "अमित, नेहा बहुत उदास है। तुम उसके साथ थोड़ी देर बात करो न। वो अकेली महसूस करती है।" मैं थोड़ा हैरान हुआ, लेकिन चाची की बात मान ली।
मैं नेहा भाभी के कमरे में गया। वे बिस्तर पर बैठी थीं, किताब पढ़ रही थीं। मैंने पूछा, "भाभी, सब ठीक है?" उन्होंने किताब बंद की और कहा, "हां अमित, बस थोड़ा मन उदास है। बैठो न।" हम बातें करने लगे, उनके बचपन की, मेरी पढ़ाई की।
बातों-बातों में नेहा भाभी ने अपनी शादी के बारे में बताया। कैसे उनके पति ने उन्हें धोखा दिया, और अब वे अकेली हैं। उनकी आंखों में आंसू थे, और मैंने उनका हाथ पकड़कर सांत्वना दी। वो पल भावुक था, लेकिन कुछ और नहीं।
अगले दिन सुबह फिर वही दिनचर्या। लेकिन चाची ने मुझे अलग से बुलाया और कहा, "अमित, नेहा को तुम्हारी कंपनी अच्छी लगती है। शाम को उसके साथ बाजार चले जाओ।" मैंने हामी भरी, सोचा परिवार की मदद है। नेहा भाभी के साथ बाजार जाना अच्छा लगा।
बाजार में हम घूमे, कुछ खरीदारी की। नेहा भाभी थोड़ी हंसने लगीं, उनकी उदासी कम हो रही थी। वापसी में हम पार्क में रुके, और वहां बैठकर बातें कीं। उन्होंने कहा, "अमित, तुम्हारी वजह से मन हल्का लगता है।" मैंने मुस्कुरा दिया।
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घर लौटकर चाची ने हमें देखा और खुश हुईं। रात को फिर चाची आईं और बोलीं, "अमित, नेहा आज रात तुम्हारे साथ सोना चाहती है। वो डर रही है अकेले।" मैं चौंक गया, लेकिन चाची ने कहा, "बस कंपनी के लिए, कुछ गलत मत सोचना।"
मैं नेहा भाभी के कमरे में गया। वे बिस्तर पर थीं, और मैं उनके बगल में लेट गया। हम बातें करने लगे, लेकिन धीरे-धीरे हमारी सांसें पास आ गईं। नेहा भाभी ने मेरी तरफ देखा, उनकी आंखों में कुछ अलग था।
उस रात हमारी बातें गहरी हो गईं। नेहा भाभी ने अपनी अकेलेपन की पीड़ा बताई, और मैंने उन्हें गले लगा लिया। वो पल सांत्वना का था, लेकिन धीरे-धीरे हमारी निकटता बढ़ने लगी। चाची बाहर थीं, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा।
अगली सुबह सब सामान्य था, लेकिन मेरे मन में उथल-पुथल थी। नेहा भाभी से बात करते हुए मुझे लग रहा था कि कुछ बदल रहा है। चाची ने फिर हमें अकेला छोड़ दिया, और शाम को नेहा भाभी ने मुझे अपने कमरे में बुलाया।
कमरे में जाते ही नेहा भाभी ने दरवाजा बंद किया। वे बोलीं, "अमित, चाची ने बताया कि तुम मुझे पसंद करते हो। क्या ये सच है?" मैं हकबका गया, लेकिन उनकी आंखों में वो आग देखकर मैंने हां में सिर हिला दिया।
फिर सब कुछ तेजी से हुआ। नेहा भाभी ने मुझे पास खींचा, और हमारे होंठ मिल गए। वो चुंबन गहरा था, भावनाओं से भरा। मैंने उनके शरीर को छुआ, और वो सिहर उठीं। चाची ने बाहर से आवाज दी, "सब ठीक है न?" लेकिन हम रुके नहीं।
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नेहा भाभी की साड़ी धीरे-धीरे खुलने लगी। उनका शरीर नरम और गर्म था, जैसे लंबे समय की प्यास बुझ रही हो। मैंने उनके स्तनों को छुआ, और वे कराह उठीं। हमारा मिलन भावुक था, हर स्पर्श में एक कहानी थी।
उस रात हम एक-दूसरे में खो गए। नेहा भाभी की सांसें तेज थीं, और मैंने उनके शरीर के हर हिस्से को प्यार किया। चाची की साजिश अब साफ थी, लेकिन वो पल इतना सुंदर था कि मैं सोच नहीं पा रहा था।
सुबह उठकर नेहा भाभी ने मुझे देखा और मुस्कुराई। "अमित, ये सब चाची की वजह से हुआ। उन्होंने मुझे बताया कि तुम मुझे खुश कर सकते हो।" मैं हैरान था, लेकिन खुश भी। चाची ने हमें ब्रेकफास्ट पर देखा और आंख मार दी।
दिन बीतते गए, और हमारी निकटता बढ़ती गई। चाची हमेशा मौके बनातीं, कभी घर में अकेला छोड़कर, कभी बाहर भेजकर। नेहा भाभी अब पहले से ज्यादा जीवंत लगती थीं, उनकी आंखों में चमक थी।
एक शाम चाची ने कहा, "अमित, आज नेहा को सरप्राइज दो। मैं बाहर जा रही हूं।" मैं समझ गया। नेहा भाभी कमरे में इंतजार कर रही थीं, उन्होंने एक पतली नाइटी पहनी थी। मैंने उन्हें बाहों में लिया, और हम फिर से एक हो गए।
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इस बार हमारा मिलन ज्यादा गहरा था। नेहा भाभी ने मेरे शरीर पर हाथ फेरा, और मैंने उनकी जांघों को सहलाया। हमारी सांसें मिलीं, और वो पल अनंत लगा। हर स्पर्श में नई उत्तेजना थी, जैसे पहली बार हो।
नेहा भाभी की कराहें कमरे में गूंज रही थीं। मैंने उनके गुप्तांग को छुआ, और वो पागल हो गईं। हमारा संभोग लंबा चला, भावनाओं और शारीरिक सुख से भरा। चाची बाहर से लौटीं, लेकिन कुछ नहीं बोलीं।
धीरे-धीरे ये हमारी आदत बन गई। चाची की मदद से हम मिलते, और हर बार कुछ नया अनुभव करते। नेहा भाभी अब खुश थीं, लेकिन मेरे मन में एक कन्फ्लिक्ट था। क्या ये सही है? लेकिन उनकी खुशी देखकर मैं चुप रहता।
एक रात नेहा भाभी ने कहा, "अमित, चाची ने ये सब इसलिए किया क्योंकि वे मुझे देख नहीं सकती थीं उदास। लेकिन अब मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।" मैंने उन्हें चूमा, और हम फिर से खो गए।
उस रात हमने नई मुद्राएं आजमाईं। नेहा भाभी ऊपर थीं, उनकी कमर हिल रही थी। मैंने उनके नितंबों को पकड़ा, और वो चीख उठीं। सुख की लहरें हमें बहा ले गईं, और हम थककर सो गए।
समय बीतता गया, और हमारे रिश्ते में गहराई आ गई। चाची हमेशा साथ देतीं, कभी सलाह देकर, कभी मौके बनाकर। नेहा भाभी की आग अब मेरी थी, और मैं उसमें जल रहा था।
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एक दिन हम तीनों साथ बैठे थे। चाची ने कहा, "देखो, जीवन में खुशी जरूरी है। नेहा, अब तुम खुश हो न?" नेहा भाभी ने हां कहा, और मुझे देखा। वो नजरें सब कुछ कह रही थीं।
रात को फिर हम मिले। नेहा भाभी ने मुझे कसकर पकड़ा, और हमारा मिलन तूफानी था। उनके नाखून मेरी पीठ पर थे, और मैंने उनकी चूत को गहराई से महसूस किया। सुख का चरम आया, और हम शांत हो गए।
अब हर रात ऐसी ही होती। चाची की साजिश ने हमें बांध दिया था, और नेहा भाभी की चाहत मेरी जिंदगी बन गई थी। हमारी बातें, हमारे स्पर्श, सब कुछ भावनात्मक था।
एक शाम नेहा भाभी ने कहा, "अमित, चाची ने सही किया। तुम मेरी जिंदगी हो।" मैंने उन्हें गले लगाया, और हम फिर से एक हो गए, उस पल में खोकर।