जीजू का मौका

सुबह की धूप कमरे की खिड़की से छनकर आ रही थी, और मैं अपनी स्टडी टेबल पर बैठी किताबें संभाल रही थी। आज कॉलेज का दिन था, लेकिन छुट्टी होने की वजह से घर पर ही रहना था। रसोई से माँ की आवाज़ आ रही थी, वो चाय बना रही थीं। मैंने घड़ी देखी, अभी नौ बज रहे थे, और घर में सब अपनी-अपनी दिनचर्या में व्यस्त थे।

मैं प्रिया हूँ, उन्नीस साल की, और हमारा परिवार छोटा-सा है। मेरी बड़ी बहन रिया की शादी हो चुकी है, और वो अपने पति अजय जीजू के साथ हमारे ही घर में ऊपर वाले हिस्से में रहती है। पापा ऑफिस चले जाते हैं सुबह-सुबह, और माँ घर संभालती हैं। जीजू एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं, लेकिन आजकल घर से काम कर रहे हैं। मैं कॉलेज में पढ़ती हूँ, और घर में सबके साथ अच्छा समय बीतता है।

चाय की ट्रे लेकर माँ आईं, और सबको बुलाया। रिया दीदी भी नीचे आई, वो प्रेग्नेंट हैं, इसलिए ज्यादा आराम करती हैं। जीजू उनके पीछे-पीछे आए, मुस्कुराते हुए। "प्रिया, आज कॉलेज नहीं?" जीजू ने पूछा, जबकि वो जानते थे कि छुट्टी है। मैंने हँसकर कहा, "नहीं जीजू, आज फ्री हूँ।" हम सब साथ बैठे, चाय पी और बातें कीं।

दोपहर हुई, तो माँ और पापा बाहर गए किसी रिश्तेदार से मिलने। रिया दीदी ने कहा कि वो थोड़ा सोएगी, क्योंकि थकान हो रही है। जीजू अपने कमरे में लैपटॉप पर काम कर रहे थे। मैं अपने कमरे में किताब पढ़ रही थी, लेकिन मन नहीं लग रहा था। बाहर बारिश शुरू हो गई, और मौसम ठंडा हो गया।

कुछ देर बाद, मैं रसोई में पानी लेने गई। जीजू भी वहाँ आए, शायद कॉफी बनाने। "प्रिया, क्या कर रही हो?" उन्होंने पूछा, और मैंने कहा, "बस, किताब पढ़ रही थी।" हमारी बातें सामान्य थीं, लेकिन आज जीजू की नज़रें कुछ अलग लग रही थीं। वो मुस्कुरा रहे थे, और मैंने महसूस किया कि घर में अब सिर्फ हम तीन हैं, लेकिन दीदी सो रही हैं।

बारिश तेज हो गई, और बिजली चली गई। अँधेरा हो गया, मैं डर गई थोड़ी। जीजू ने कहा, "चलो, मैं मोमबत्ती जलाता हूँ।" हम साथ में लिविंग रूम में गए, और उन्होंने मोमबत्ती जलाई। रोशनी में उनका चेहरा चमक रहा था। मैं उनके पास बैठी, और हम बातें करने लगे।

बातों-बातों में जीजू ने मेरे कॉलेज की पढ़ाई के बारे में पूछा। मैं बताने लगी, लेकिन अंदर से एक अजीब-सी घबराहट हो रही थी। जीजू इतने करीब थे, और उनकी आवाज़ में कुछ नरमी थी। "तुम बहुत स्मार्ट हो प्रिया," उन्होंने कहा, और उनका हाथ मेरे कंधे पर रखा। मैं सिहर गई, लेकिन कुछ नहीं कहा।

दीदी सो रही थीं ऊपर, और बारिश की वजह से बाहर का शोर सब दबा रहा था। जीजू की आँखों में एक चमक थी, जो मैंने पहले नहीं देखी। "कभी-कभी जीवन में मौके मिलते हैं, जिन्हें गँवाना नहीं चाहिए," उन्होंने धीरे से कहा। मैं समझ नहीं पाई पहले, लेकिन उनका हाथ अब मेरी कमर पर था।

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मेरा दिल तेज़ धड़क रहा था। मैं जानती थी ये गलत है, लेकिन उस पल में कुछ रोक नहीं पा रही थी। जीजू ने मुझे अपनी ओर खींचा, और मैंने विरोध नहीं किया। उनकी साँसें मेरे चेहरे पर लग रही थीं, गर्म और तेज़। "प्रिया, तुम बहुत खूबसूरत हो," उन्होंने फुसफुसाया।

हमारे होंठ मिले, और एक झटका-सा लगा। जीजू के चुंबन में एक तीव्रता थी, जो मुझे बहा ले गई। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं, और उनके सीने से चिपक गई। बारिश बाहर गिर रही थी, लेकिन अंदर एक तूफान उठ रहा था।

जीजू ने मुझे गोद में उठाया, और सोफे पर लिटा दिया। उनकी उँगलियाँ मेरे बालों में फिर रही थीं, और मैं काँप रही थी। "डरो मत प्रिया, ये हमारा पल है," उन्होंने कहा। मैंने कुछ नहीं कहा, बस उनकी आँखों में देखा।

धीरे-धीरे उन्होंने मेरी टी-शर्ट ऊपर की, और मेरी त्वचा पर उनके स्पर्श ने आग लगा दी। मैंने अपनी बाहें उनके गले में डाल दीं, और हम एक-दूसरे में खो गए। हर स्पर्श में एक नई सनसनी थी, जैसे बिजली दौड़ रही हो।

जीजू के होंठ मेरे गले पर उतरे, और मैं सिसक उठी। उनकी जीभ ने मेरी त्वचा को चाटा, और मैं पिघलने लगी। "अजय... जीजू..." मैंने बुदबुदाया, लेकिन वो रुके नहीं। उनके हाथ अब मेरी ब्रा पर थे, और उन्होंने उसे खोल दिया।

मेरे स्तन खुले, और जीजू की आँखें चमक उठीं। उन्होंने उन्हें चूमा, चूसा, और मैं दर्द और सुख के मिश्रण में डूब गई। मेरी साँसें तेज़ हो गईं, और मैंने उनके बाल पकड़ लिए। हर चूंबन में एक गहराई थी, जो मुझे और करीब खींच रही थी।

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मैंने उनकी शर्ट उतारी, और उनके मज़बूत शरीर को छुआ। जीजू के सीने पर बाल थे, जो मुझे उत्तेजित कर रहे थे। मैंने अपनी उँगलियाँ उनके पेट पर फिराईं, और नीचे की ओर ले गई। उनका उभार महसूस हुआ, और मैं शर्मा गई।

जीजू ने मेरी जींस खोली, और उसे उतार दिया। अब मैं सिर्फ पैंटी में थी, और उनकी नज़रें मुझे घूर रही थीं। "तुम परफेक्ट हो प्रिया," उन्होंने कहा, और अपना हाथ मेरी जाँघों पर रखा। मैंने अपनी टाँगें फैलाईं, और उनके स्पर्श का इंतज़ार किया।

उनकी उँगलियाँ मेरी पैंटी के ऊपर से रगड़ीं, और मैं कराह उठी। गीलापन महसूस हो रहा था, और जीजू मुस्कुराए। उन्होंने पैंटी उतारी, और मुझे पूरी तरह नग्न कर दिया। अब उनका मुँह मेरी योनि पर था, और जीभ से चाटने लगे।

सुख की लहरें उठीं, और मैं चीखने लगी। जीजू की जीभ अंदर-बाहर हो रही थी, और मैं काँप रही थी। "जीजू... और..." मैंने कहा, और उन्होंने तेज़ किया। orgasm आया, और मैं झड़ गई।

जीजू उठे, और अपनी पैंट उतारी। उनका लिंग बड़ा और कठोर था, जो मुझे डराने लगा। लेकिन वो धीरे से मेरे ऊपर आए, और入 करने लगे। दर्द हुआ पहले, लेकिन फिर सुख में बदल गया।

हमारी बॉडीज एक ритम में हिल रही थीं, जीजू के धक्के गहरे और तेज़। मैंने अपनी कमर उठाई, और उन्हें और गहरा लिया। हर thrust में एक नई भावना थी, जैसे हम एक हो रहे हों।

बारिश बाहर थम नहीं रही थी, और हमारा पसीना मिल रहा था। जीजू की साँसें तेज़, और मैं उनकी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। "प्रिया, मैं आ रहा हूँ," उन्होंने कहा, और हम साथ में climax पर पहुँचे।

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कुछ देर हम ऐसे ही लेटे रहे, साँसें संभालते। जीजू ने मुझे चूमा, और मैंने उनकी आँखों में देखा। अंदर एक guilt था, लेकिन वो पल इतना intense था कि सब भूल गई।

फिर अचानक, दीदी की आवाज़ आई ऊपर से। "अजय, कहाँ हो?" जीजू जल्दी से उठे, और कपड़े पहने। मैं भी जल्दी से तैयार हुई, और रसोई की ओर चली गई। दिल अभी भी धड़क रहा था।

शाम हुई, तो माँ-पापा लौटे। सब सामान्य लग रहा था, लेकिन मेरे अंदर एक राज़ था। जीजू ने मुझे देखा, और मुस्कुराया। मैंने भी जवाब में मुस्कान दी, लेकिन सोच रही थी कि ये क्या हो गया।

रात को डिनर के समय, जीजू मेरे पास बैठे। उनकी टाँग मेरी टाँग से छू रही थी, और मैं फिर उत्तेजित हो गई। दीदी बातें कर रही थीं, लेकिन मेरा ध्यान जीजू पर था।

डिनर के बाद, सब सोने गए। लेकिन मैं सो नहीं पाई। रात के बारह बजे, मेरे कमरे का दरवाज़ा खुला, और जीजू अंदर आए। "प्रिया, नींद नहीं आ रही?" उन्होंने पूछा। मैंने हाँ में सर हिलाया, और वो मेरे बिस्तर पर बैठ गए।

फिर से हम एक-दूसरे के करीब आए। इस बार ज्यादा passion था, जैसे addiction हो गया हो। जीजू ने मुझे दीवार से सटाया, और चुंबन किए। उनके हाथ मेरे शरीर पर घूम रहे थे, और मैं पिघल रही थी।

हम बिस्तर पर गिरे, और जीजू ने मुझे ऊपर लिया। मैं उनके ऊपर सवार हुई, और rhythm में हिलने लगी। ये नया अनुभव था, control मेरे हाथ में। जीजू के हाथ मेरे स्तनों पर थे, और मैं तेज़ हो गई।

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रात की चुप्पी में हमारी सिसकियाँ गूँज रही थीं। जीजू ने मुझे पलटा, और पीछे से入 किया। दर्द और सुख का मिश्रण फिर आया, लेकिन इस बार ज्यादा intense। मैं तकिए में मुँह दबा रही थी, चीख न निकले।

हमारा climax साथ आया, और मैं थककर लेट गई। जीजू ने मुझे गले लगाया, और कुछ देर हम ऐसे ही रहे। "ये हमारा राज़ है प्रिया," उन्होंने कहा। मैंने हाँ कहा, लेकिन अंदर conflict था।

सुबह फिर सामान्य दिनचर्या। लेकिन अब हर नज़र में एक meaning था। जीजू का स्पर्श याद आता, और मैं शर्मा जाती। क्या ये जारी रहेगा? मैं नहीं जानती, लेकिन उस मौके ने सब बदल दिया।

दोपहर में, जब घर खाली हुआ, जीजू फिर आए। इस बार बाथरूम में, शावर के नीचे। पानी की बौछार में हमारा मिलन और रोमांचक था। जीजू की बॉडी गीली, और मेरा शरीर उनके खिलाफ स्लाइड कर रहा।

उनके हाथ साबुन से भरे, और मेरी त्वचा पर फिसल रहे। मैंने उनके लिंग को पकड़ा, और हिलाया। जीजू कराहे, और मुझे दीवार से सटाकर धक्के दिए। पानी सब बहा ले जा रहा था, लेकिन हमारी आग नहीं बुझी।

फिर से orgasm, और हम हाँफते रहे। जीजू ने मुझे चूमा, और बाहर निकले। मैं शावर के नीचे खड़ी सोच रही थी, ये रिश्ता अब क्या मोड़ लेगा।

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शाम को दीदी ने कहा कि वो डॉक्टर के पास जा रही हैं, और जीजू साथ जाएँगे। लेकिन जीजू ने बहाना बनाया, और रुक गए। जैसे ही वो गए, जीजू मेरे कमरे में।

इस बार ज्यादा समय था। हमने धीरे-धीरे शुरू किया, foreplay लंबा। जीजू की उँगलियाँ मेरे अंदर, और मैं उनकी जीभ पर। हर moment में नई sensation, जैसे पहली बार।

फिर main act, अलग positions में। मिशनरी, डॉगी, और cowgirl। हर बार emotion different, guilt से passion तक। मैं चीखी, रोई, और हँसी भी।

क्लाइमैक्स के बाद, हम लेटे बातें कर रहे थे। जीजू ने कहा, "प्रिया, तुमने मेरी ज़िंदगी में रंग भरा।" मैंने कुछ नहीं कहा, बस उनके सीने पर सर रखा।

रात हो गई, और दीदी लौटी। सब सामान्य, लेकिन मेरा दिल नहीं। क्या ये गलत है? शायद, लेकिन वो सुख अवर्णनीय है।

अगले दिन, मौका फिर मिला। किचन में, सुबह-सुबह। जीजू ने मुझे काउंटर पर बैठाया, और standing position में। quick लेकिन intense।

उनके धक्के तेज़, और मैं दबे स्वर में कराह रही। climax जल्दी आया, और हम अलग हुए।

अब ये routine बन गया लगता है। हर मौके पर, जीजू चौका मारते हैं। मैं रोक नहीं पाती, और शायद नहीं चाहती भी।

एक शाम, हम छत पर थे। सितारे चमक रहे थे, और जीजू ने मुझे वहीं लिटाया। open air में, thrill और था। हवा ठंडी, लेकिन हम गर्म।

उनकी बॉडी मेरी पर, और हम एक। हर movement में love और lust। मैंने सोचा, ये कब तक चलेगा?

लेकिन उस पल, मैं बस जीजू के साथ थी, उनकी बाहों में।