मौसी और मौसा के साथ अनोखा बंधन

सुबह की धूप कमरे की खिड़की से छनकर आ रही थी, और मैं बिस्तर पर लेटा हुआ चाय की प्याली हाथ में थामे अखबार पढ़ रहा था। ये मेरी रोज की दिनचर्या थी – नौकरी पर जाने से पहले थोड़ा समय खुद के लिए निकालना। मौसी का घर दिल्ली के एक शांत इलाके में था, जहां मैं पिछले छह महीनों से रह रहा था, क्योंकि मेरी नई जॉब यहां मिली थी और अपना फ्लैट लेना अभी महंगा पड़ता।

मौसी, जिनका नाम रेखा है, हमेशा सुबह उठकर घर संभालती थीं। वे चालीस साल की थीं, लेकिन उनकी ऊर्जा देखकर लगता था जैसे वे अभी भी जवान हैं। मौसा, विजय जी, पैंतालीस के थे और एक छोटी कंपनी में मैनेजर थे। उनका घर हमेशा साफ-सुथरा रहता था, और वे दोनों मुझे अपने बेटे की तरह मानते थे। मैं राहुल हूं, पच्चीस साल का, और गांव से आया हूं शहर में कुछ बनाने के लिए।

उस दिन भी वही रूटीन था। मैं चाय पीकर तैयार होने लगा, और नीचे किचन से मौसी की आवाज आई – "राहुल, नाश्ता तैयार है, जल्दी आ जाओ।" मैं मुस्कुराकर नीचे गया। मौसा अखबार पढ़ते हुए बैठे थे, और हम तीनों ने साथ बैठकर बातें कीं। मौसा ने कहा, "बेटा, आज शाम को देर मत करना, घर पर ही डिनर करेंगे।" मैंने हामी भरी, और काम पर निकल गया।

ऑफिस में दिन सामान्य गुजरा। मैं एक आईटी कंपनी में जूनियर डेवलपर हूं, और काम का बोझ ज्यादा नहीं था। शाम को घर लौटते हुए मैंने सोचा कि मौसी और मौसा के साथ रहना कितना आरामदायक है। वे बच्चे नहीं थे, इसलिए घर में शांति रहती थी। मौसी घर का काम करती थीं, और मौसा शाम को कभी-कभी मेरे साथ क्रिकेट मैच देखते थे।

घर पहुंचकर मैंने देखा कि मौसी बालकनी में कपड़े सुखा रही थीं। मैंने मदद की पेशकश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। "तुम थककर आए हो, आराम करो," उन्होंने कहा। मौसा अभी ऑफिस से नहीं लौटे थे। मैं अपने कमरे में गया और किताब पढ़ने लगा। थोड़ी देर बाद मौसी ने दरवाजा खटखटाया और कहा, "राहुल, चाय पी लो।" मैंने उन्हें अंदर बुलाया, और हम बातें करने लगे।

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बातों-बातों में मौसी ने पूछा, "तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?" मैं हंस पड़ा। "नहीं मौसी, अभी कहां समय है।" वे मुस्कुराईं और बोलीं, "अच्छा है, पहले करियर बना लो।" उनकी आवाज में एक गर्माहट थी, जो मुझे हमेशा अच्छी लगती थी। मौसा जब लौटे, तो हम तीनों ने डिनर किया। डिनर के बाद मौसा ने कहा, "चलो, आज कोई फिल्म देखते हैं।" हम लिविंग रूम में बैठ गए।

फिल्म चल रही थी, लेकिन मेरा ध्यान बार-बार मौसी पर जा रहा था। वे मौसा के बगल में बैठी थीं, और उनकी हंसी कमरे में गूंजती थी। मैंने खुद को झिड़का – वे मेरी मौसी हैं, ऐसे विचार गलत हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से घर में एक अजीब सा माहौल था। मौसी कभी-कभी मुझे लंबे समय तक देखतीं, और मौसा भी ज्यादा दोस्ताना हो गए थे।

फिल्म खत्म होने के बाद मौसा ने कहा, "राहुल, तुम्हें पता है, हम दोनों की शादी को बीस साल हो गए, लेकिन कभी बच्चे नहीं हुए। तुम्हारे आने से घर में रौनक आ गई है।" मैंने शर्माते हुए कहा, "मैं भी यहां खुश हूं, मौसा।" मौसी ने मेरी तरफ देखा और बोलीं, "हां, तुम्हारे बिना अब लगता है घर सूना हो जाएगा।" उनकी आंखों में कुछ था, जो मुझे असहज कर रहा था।

रात को बिस्तर पर लेटे हुए मैं सोच रहा था कि क्या ये सिर्फ मेरा वहम है। अगले दिन वीकेंड था, और हम तीनों ने प्लान बनाया कि घर पर ही रहेंगे। सुबह मौसी ने ब्रेकफास्ट बनाया, और हम टेबल पर बैठे। मौसा ने मजाक में कहा, "रेखा, आज राहुल को अपनी स्पेशल चाय पिलाओ।" मौसी हंसकर किचन में चली गईं।

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दोपहर में मौसा ने मुझे अपने साथ गार्डन में बुलाया। वे बोले, "राहुल, जीवन में कभी-कभी रिश्ते अलग-अलग रूप लेते हैं। तुम समझते हो न?" मैं हैरान हो गया, लेकिन कुछ नहीं बोला। शाम को मौसी ने डिनर बनाया, और हम फिर साथ बैठे। इस बार बातें ज्यादा पर्सनल हो गईं। मौसी ने कहा, "राहुल, तुम्हारी उम्र में हम भी ऐसे ही थे, लेकिन अब लगता है कुछ मिस कर रहे हैं।"

मैंने पूछा, "क्या मिस कर रहे हैं मौसी?" मौसा ने मौसी की तरफ देखा और बोला, "एक closeness, जो शादी के बाद कम हो जाती है। लेकिन तुम्हारे साथ रहकर लगता है वो वापस आ रही है।" मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई। क्या वे वही कह रहे थे जो मैं सोच रहा था? मैंने इनर स्ट्रगल महसूस किया – ये गलत है, लेकिन एक pull था।

रात गहराने लगी, और हम तीनों लिविंग रूम में बैठे बातें कर रहे थे। मौसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहा, "राहुल, तुम हमें बहुत प्यारे लगते हो।" मौसा ने सहमति में सिर हिलाया। धीरे-धीरे माहौल बदलने लगा। मौसी की उंगलियां मेरे बालों में फिरने लगीं, और मौसा ने मौसी को अपनी तरफ खींचा। मैं स्तब्ध था, लेकिन विरोध नहीं कर पाया।

मौसी ने मेरी तरफ देखा और बोलीं, "क्या तुम भी महसूस करते हो वो pull?" मैंने हां में सिर हिलाया। मौसा ने कहा, "चलो, ऊपर कमरे में चलते हैं। वहां बात करेंगे।" हम तीनों मौसी और मौसा के बेडरूम में गए। कमरा अंधेरा था, सिर्फ एक छोटी लाइट जल रही थी। मौसी ने मुझे बिस्तर पर बैठाया और खुद मेरे बगल में बैठ गईं।

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मौसा ने दरवाजा बंद किया और बोले, "राहुल, ये हमारा सीक्रेट रहेगा। हम तीनों एक-दूसरे को खुश करना चाहते हैं।" मेरे मन में कन्फ्लिक्ट था – परिवार का रिश्ता, लेकिन एक नई भावना जाग रही थी। मौसी ने मेरे चेहरे को अपने हाथों में लिया और धीरे से吻 किया। उनकी होंठ गर्म थे, और मैंने खुद को रोक नहीं पाया।

मौसा ने मौसी की कमर पकड़ी और उन्हें चूमने लगे। मैं देखता रहा, और फिर मौसी ने मुझे शामिल किया। हम तीनों के शरीर एक-दूसरे से सटने लगे। मौसी की साड़ी धीरे-धीरे सरक रही थी, और मैंने उनकी गर्दन पर吻 किया। मौसा ने मेरी शर्ट उतारी, और उनकी उंगलियां मेरी छाती पर फिरने लगीं। ये अनुभव नया था, लेकिन इमोशंस से भरा।

मौसी ने फुसफुसाकर कहा, "राहुल, तुम्हें डर लग रहा है?" मैंने ना में सिर हिलाया। मौसा ने मौसी को बिस्तर पर लिटाया और उनकी ब्लाउज खोली। उनकी त्वचा मुलायम थी, और मैंने धीरे से उनके स्तनों को छुआ। मौसी की सांस तेज हो गई। मौसा ने मुझे प्रोत्साहित किया, "ऐसे ही, उसे मजा दो।"

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हम तीनों अब पूरी तरह उत्तेजित थे। मैंने मौसी की साड़ी पूरी उतार दी, और मौसा ने अपनी पैंट खोली। मौसी ने हमें दोनों को अपनी तरफ खींचा। मैंने मौसी के शरीर पर हाथ फेरा, जबकि मौसा ने मुझे चूमा। ये थ्रीसम का अनुभव था, जहां हर स्पर्श में एक नई संवेदना थी। मौसी की आहें कमरे में गूंज रही थीं।

मौसा ने मौसी को अपनी गोद में लिया और धीरे-धीरे प्रवेश किया। मैंने मौसी के होंठ चूमे, और उनकी आंखों में देखा – वहां प्यार और इच्छा थी। फिर मौसी ने मुझे अपने ऊपर खींचा, और मैंने महसूस किया उनकी गर्माहट। मौसा ने पीछे से मौसी को सहलाया। हर मूवमेंट में वैरायटी थी – कभी धीमा, कभी तेज।

मेरा मन अब कन्फ्लिक्ट से बाहर था। ये रिश्ता अब नया रूप ले चुका था। मौसी ने कहा, "राहुल, तुम हमें पूरा कर रहे हो।" मौसा ने सहमति दी। हम तीनों एक लय में थे, शरीर और आत्मा दोनों जुड़े हुए। सेंसरी अनुभव – उनकी त्वचा की खुशबू, स्पर्श की गर्मी, सब कुछ जीवंत था।

कुछ देर बाद हम थककर लेट गए, लेकिन इमोशंस अभी भी हाई थे। मौसी ने मेरे सीने पर सिर रखा, और मौसा ने हमें गले लगाया। ये पल शांत था, लेकिन गहरा। मैंने सोचा कि ये बंधन अब कभी नहीं टूटेगा। मौसी की उंगलियां मेरे बालों में फिर रही थीं, और मौसा की सांसें मेरे कंधे पर महसूस हो रही थीं।

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धीरे-धीरे हम फिर से करीब आए। इस बार मौसी ने मौसा को चूमा, और मैंने मौसी की पीठ सहलाई। नई भावना थी – jealousy नहीं, बल्कि shared joy। हमने पोजीशन बदली, और हर बार कुछ नया महसूस हुआ। मौसी की आंखें बंद थीं, लेकिन उनकी मुस्कान बता रही थी कि वे खुश हैं।

रात गहराती गई, और हम तीनों एक-दूसरे में खोए रहे। इमोशंस का तूफान था – प्यार, इच्छा, और एक अजीब सा अपराधबोध जो अब कम हो रहा था। मौसा ने कहा, "ये हमारा नया परिवार है।" मैंने हामी भरी। स्पर्श अब ज्यादा इंटीम हो गए थे, हर हिस्से को एक्सप्लोर करते हुए।

सुबह होने से पहले हम थक चुके थे। मौसी मेरे बगल में लेटी थीं, उनकी सांसें नियमित हो गईं। मौसा दूसरी तरफ थे, हाथ मेरे कंधे पर। ये पल इतना नैचुरल लग रहा था, जैसे हमेशा से ऐसा था। मैंने आंखें बंद कीं, और उनकी गर्माहट महसूस की।