बहन की गर्म सांसें

सुबह की हल्की धूप कमरे में छनकर आ रही थी, और मैं बिस्तर पर लेटे-लेटे अपनी किताब पढ़ रहा था। घर में आज छुट्टी का दिन था, माता-पिता गांव गए हुए थे, और मैंने सोचा कि आज आराम से दिन बिताऊंगा। बाहर से चिड़ियों की चहचहाहट आ रही थी, और रसोई से प्रिया की आवाजें सुनाई दे रही थीं, शायद वह चाय बना रही थी।

मैं रोहन हूं, पच्चीस साल का, एक छोटी सी आईटी कंपनी में काम करता हूं। प्रिया मेरी छोटी बहन है, बाईस की, कॉलेज में पढ़ रही है। हम दोनों बचपन से ही करीब रहे हैं, लेकिन अब बड़े होकर जिंदगी की भागदौड़ में कम बातें होती हैं। आज घर खाली था, तो मैंने सोचा कि उसके साथ कुछ समय बिताऊं, शायद कोई पुरानी यादें ताजा करें।

मैं उठकर रसोई की तरफ गया। प्रिया स्टोव पर चाय उबाल रही थी, उसके बाल खुले थे और वह हल्की सी मुस्कान के साथ गुनगुना रही थी। "भैया, चाय तैयार है," उसने कहा, और मैंने हंसकर कप थामा। हम दोनों डाइनिंग टेबल पर बैठ गए, बाहर की दुनिया से बेखबर।

बातों का सिलसिला शुरू हुआ। प्रिया ने अपने कॉलेज की कहानियां सुनाईं, कैसे उसकी सहेलियां उसे चिढ़ाती हैं। मैंने अपनी ऑफिस की बोरिंग रूटीन बताई, और हम दोनों हंसते रहे। लेकिन कहीं न कहीं, मैं महसूस कर रहा था कि प्रिया आज कुछ अलग लग रही थी, ज्यादा खुली हुई, ज्यादा करीब। शायद घर की अकेलीपन का असर था।

दोपहर हुई, हमने साथ में खाना बनाया। प्रिया सब्जी काट रही थी, और मैं चावल धो रहा था। उसकी हंसी कमरे में गूंज रही थी, और मैंने देखा कि वह बार-बार मेरी तरफ देखती है। "भैया, याद है बचपन में हम कैसे खेलते थे?" उसने पूछा, और मैंने हामी भरी। उन यादों में एक गर्माहट थी, जो अब बड़ी उम्र में कुछ और ही लग रही थी।

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शाम को हम सोफे पर बैठकर टीवी देख रहे थे। प्रिया मेरे बगल में थी, उसका कंधा मेरे से सटा हुआ। फिल्म में एक रोमांटिक सीन आया, और मैंने महसूस किया कि उसकी सांसें तेज हो गई हैं। मैंने उसकी तरफ देखा, और उसकी आंखों में कुछ ऐसा था जो शब्दों से परे था। "प्रिया, क्या हुआ?" मैंने धीरे से पूछा।

वह चुप रही, बस मेरी तरफ देखती रही। फिर अचानक उसने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया। उस स्पर्श में एक करंट सा दौड़ा, जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था। हम दोनों जानते थे कि यह गलत है, लेकिन उस पल में सब सही लग रहा था। मैंने कुछ नहीं कहा, बस उसकी उंगलियां थाम लीं।

रात हो गई थी, घर में सन्नाटा था। प्रिया मेरे कमरे में आई, कहने लगी कि उसे नींद नहीं आ रही। हम बिस्तर पर बैठकर बातें करने लगे, पुरानी यादें, सपने, और धीरे-धीरे बातें गहरी होने लगीं। उसने बताया कि वह अकेलापन महसूस करती है, और मैंने भी अपनी भावनाएं शेयर कीं। उसकी आंखों में आंसू थे, और मैंने उसे गले लगा लिया।

उस गले लगने में कुछ बदल गया। प्रिया की सांसें मेरे गले पर महसूस हो रही थीं, गर्म और तेज। मैंने उसे दूर करने की कोशिश की, लेकिन वह और करीब आ गई। "भैया, मैं तुम्हें प्यार करती हूं," उसने फुसफुसाकर कहा। मेरे मन में उथल-पुथल मच गई, यह रिश्ता, यह समाज, लेकिन उसकी आंखों में जो सच्चाई थी, वह मुझे रोक नहीं पाई।

मैंने उसके होंठों को छुआ, और वह कांप उठी। हमारा पहला चुंबन धीमा था, भावनाओं से भरा। प्रिया की उंगलियां मेरे बालों में घूम रही थीं, और मैं महसूस कर रहा था कि यह पल कितना सही लग रहा है। हम दोनों के बीच की दूरी मिट गई, और मैंने उसे अपनी बाहों में कस लिया।

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प्रिया ने मेरी शर्ट उतारी, उसके हाथ मेरी छाती पर फिसल रहे थे। मैंने उसकी टी-शर्ट ऊपर की, और उसकी नरम त्वचा को छुआ। हम दोनों नंगे हो गए, एक-दूसरे को देखते हुए। उसकी आंखों में शर्म और इच्छा का मिश्रण था, और मैंने उसे धीरे से बिस्तर पर लिटा दिया।

वह मेरे करीब आई, उसके होंठ मेरे शरीर पर घूमने लगे। धीरे-धीरे वह नीचे सरकी, और मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं। प्रिया ने मुझे छुआ, उसकी जीभ की गर्माहट ने मुझे पागल कर दिया। वह धीमी गति से आगे बढ़ी, हर पल में नई सनसनी पैदा करते हुए। मैं उसके बालों में उंगलियां फेर रहा था, और मेरी सांसें तेज हो गई थीं।

उसने मुझे पूरी तरह अपने मुंह में लिया, और मैं कांप उठा। उसकी हर हरकत में प्यार था, जैसे वह मुझे सुख देना चाहती हो। मैंने उसे रोका नहीं, बस उस पल में खो गया। प्रिया की आंखें मेरी आंखों में थीं, और उसमें जो भावना थी, वह शब्दों से परे थी।

कुछ देर बाद मैंने उसे ऊपर खींचा, और हम फिर चुंबन करने लगे। अब बारी मेरी थी, मैंने उसके शरीर को छुआ, हर हिस्से को प्यार किया। प्रिया की सिसकियां कमरे में गूंज रही थीं, और मैं महसूस कर रहा था कि यह हमारा अपना संसार है। हम दोनों तैयार थे, एक-दूसरे के लिए।

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मैं उसके ऊपर आया, और धीरे से अंदर प्रवेश किया। प्रिया ने अपनी आंखें बंद कर लीं, उसके नाखून मेरी पीठ में गड़ रहे थे। हमारी गति धीमी थी, हर धक्के में भावनाएं उफान पर थीं। वह मेरे कान में फुसफुसा रही थी, "भैया, और तेज," और मैंने वैसा ही किया।

हमारा मिलन तीव्र हो गया, पसीने से लथपथ शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए। प्रिया की सांसें मेरी सांसों से मिल रही थीं, और मैं महसूस कर रहा था कि यह सुख कितना गहरा है। हम दोनों चरम पर पहुंचे, एक साथ, और मैंने उसे कसकर पकड़ लिया।

उसके बाद हम चुपचाप लेटे रहे, एक-दूसरे की बाहों में। प्रिया की उंगलियां मेरी छाती पर घूम रही थीं, और मैं उसके बालों को सहला रहा था। यह पल शांत था, लेकिन हमारे दिलों में तूफान था। हम जानते थे कि यह शुरुआत है, कुछ और की।

अगली सुबह हम फिर करीब आए, लेकिन इस बार ज्यादा आत्मविश्वास के साथ। प्रिया ने मुझे फिर से अपने मुंह से सुख दिया, लेकिन अब उसमें एक नई ऊर्जा थी। मैंने उसे चूमते हुए कहा, "तुम मेरी हो," और वह मुस्कुराई। हमारा प्यार अब छुपा नहीं था।

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दिन बीतते गए, हम घर में अकेले थे। हर रात हम एक-दूसरे को खोजते, नई-नई तरकीबों से। एक शाम प्रिया ने मुझे बाथरूम में खींचा, पानी की फुहारों के नीचे हम फिर मिले। उसकी गीली त्वचा पर मेरे हाथ फिसल रहे थे, और हम दोनों हंसते हुए प्यार कर रहे थे।

लेकिन मन में एक डर था, समाज का, परिवार का। प्रिया ने एक दिन कहा, "भैया, क्या हम गलत कर रहे हैं?" मैंने उसे चुप कराया, लेकिन खुद भी सोचता रहा। फिर भी, उसकी बाहों में सुकून मिलता था, और मैं रुक नहीं पाया।

एक रात हम फिर से एक हुए, इस बार ज्यादा जुनून के साथ। प्रिया मेरे ऊपर आई, उसकी गति ने मुझे हैरान कर दिया। हम दोनों के शरीर एक लय में थे, और चरम पर पहुंचकर हम थककर लेट गए। उसकी सांसें अभी भी तेज थीं, और मैंने उसे चूम लिया।

समय गुजरता गया, लेकिन हमारा रिश्ता गहराता गया। प्रिया की हर मुस्कान में अब एक राज था, और मैं उस राज का हिस्सा था। हम जानते थे कि यह रास्ता मुश्किल है, लेकिन उस पल में सब भूल जाते थे।

फिर एक शाम, जब हम बिस्तर पर थे, प्रिया ने मेरे कान में कहा, "भैया, आज कुछ अलग करो।" मैंने उसे पलटा, और पीछे से प्रवेश किया। उसकी सिसकियां नई थीं, दर्द और सुख का मिश्रण। हम दोनों ने उस अनुभव को जीया, धीरे-धीरे तेज होते हुए।

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चरम पर पहुंचकर हम शांत हुए, लेकिन हमारी आंखें अभी भी एक-दूसरे में खोई हुई थीं। प्रिया ने मुझे गले लगाया, और मैंने महसूस किया कि यह प्यार कितना सच्चा है। हम दोनों लेटे रहे, सांसों की गर्मी महसूस करते हुए।

रात गहराती गई, और हम फिर से करीब आए। इस बार प्रिया ने मुझे अपने मुंह से शुरू किया, उसकी जीभ की हर हरकत में जादू था। मैं कांप रहा था, और उसने मुझे पूरा सुख दिया। फिर हम मिले, शरीर और आत्मा से।

उस पल में सब कुछ परफेक्ट लग रहा था, हमारी दुनिया सिर्फ हमारी थी। प्रिया की आंखें बंद थीं, और मैं उसके चेहरे को देख रहा था, उसकी हर सांस को महसूस करते हुए।