कॉलेज के सर की गुप्त चाहत

सुबह की धूप कमरे में छनकर आ रही थी, और मैं अपनी स्टडी टेबल पर बैठकर नोट्स की कॉपी चेक कर रही थी। आज कॉलेज का दूसरा दिन था, और मैंने सोचा कि जल्दी से तैयार होकर निकल जाऊं ताकि ट्रैफिक में फंस न जाऊं। बाहर से मां की आवाज आ रही थी, जो ब्रेकफास्ट बना रही थीं, और मैंने घड़ी देखी—अभी आठ बजने वाले थे।

कॉलेज पहुंचकर मैंने अपनी सीट पर बैग रखा और क्लास शुरू होने का इंतजार करने लगी। मेरी सहेली नेहा पास आकर बैठ गई और हम दोनों ने कल की असाइनमेंट के बारे में बात की। सर अभी नहीं आए थे, लेकिन क्लासरूम में धीरे-धीरे छात्र इकट्ठा हो रहे थे।

मैं प्रिया हूं, बीस साल की, और इस शहर के एक बड़े कॉलेज में बीए की छात्रा हूं। घर में मां-पापा और एक छोटा भाई है। पापा सरकारी नौकरी करते हैं, और मां घर संभालती हैं। कॉलेज आना-जाना मेरी दिनचर्या का हिस्सा है, जहां मैं पढ़ाई पर फोकस करने की कोशिश करती हूं।

क्लास शुरू हुई तो डॉ. विक्रम शर्मा अंदर आए। वे हमारे लिटरेचर के लेक्चरर हैं, लगभग चालीस साल के, लंबे कद के साथ एक गंभीर चेहरा। उन्होंने ब्लैकबोर्ड पर कुछ नोट्स लिखे और हमसे पूछा कि क्या हमने पिछला चैप्टर पढ़ा है। मैंने हाथ उठाकर जवाब दिया, और वे मुस्कुराकर बोले, "अच्छा, प्रिया, तुम बताओ।"

उस दिन क्लास के बाद मैं लाइब्रेरी गई, जहां कुछ किताबें इश्यू करानी थीं। वहां सर भी थे, कोई किताब ढूंढते हुए। मैंने उनसे पूछा कि क्या वे मदद कर सकते हैं, और उन्होंने हंसकर कहा कि हां, क्यों नहीं। हमने थोड़ी देर बात की किताबों के बारे में, और मुझे लगा कि वे काफी ज्ञानी हैं।

अगले कुछ दिनों में क्लासेस रूटीन से चलती रहीं। मैं हमेशा समय पर पहुंचती, नोट्स बनाती, और कभी-कभी सर से डाउट्स क्लियर करती। नेहा कहती कि सर थोड़े सख्त हैं, लेकिन मुझे वे ठीक लगते थे। एक दिन असाइनमेंट जमा करने की आखिरी तारीख थी, और मैंने अपनी कॉपी उनके ऑफिस में जाकर दी।

ऑफिस में सर अकेले थे, पेपर्स चेक कर रहे थे। उन्होंने कॉपी ली और कहा, "प्रिया, तुम्हारा काम अच्छा है, लेकिन इसमें और डेप्थ ला सकती हो। अगर समय हो तो बैठो, मैं बताता हूं।" मैं हिचकिचाई, लेकिन बैठ गई। उन्होंने मुझे कुछ पॉइंट्स समझाए, और मैं ध्यान से सुनती रही।

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उस बातचीत से मुझे लगा कि सर को पढ़ाने का शौक है। वे अपनी जिंदगी के कुछ अनुभव भी शेयर करते, जैसे कैसे उन्होंने कॉलेज में पढ़ाई की थी। मैंने भी अपने बारे में थोड़ा बताया, कि घर से कॉलेज दूर है और मैं बस से आती हूं। धीरे-धीरे, क्लास के बाहर भी हमारी बातें होने लगीं।

एक शाम कॉलेज फेस्ट की तैयारी चल रही थी, और मैं वॉलंटियर थी। सर भी वहां थे, आयोजन कमिटी में। हमने साथ में डेकोरेशन के आइडियाज डिस्कस किए, और उन्होंने कहा, "प्रिया, तुम क्रिएटिव हो, अच्छा आइडिया है ये।" उस दिन देर तक काम चला, और मैं थक गई थी।

फेस्ट के दिन सब कुछ व्यस्त था। मैं स्टेज पर कुछ अनाउंसमेंट कर रही थी, जब सर पास आए और बोले, "तुम अच्छा कर रही हो, प्रिया। थोड़ा कॉन्फिडेंस और बढ़ाओ।" उनकी तारीफ से मुझे अच्छा लगा, और मैंने मुस्कुराकर शुक्रिया कहा। शाम को जब फेस्ट खत्म हुआ, तो सर ने कहा कि अगर मैं चाहूं तो वे मुझे घर छोड़ देंगे, क्योंकि अंधेरा हो गया था।

मैंने मना किया, लेकिन वे जोर देते रहे। आखिरकार मैं उनकी कार में बैठ गई। रास्ते में हमने कॉलेज की बातें कीं, और सर ने पूछा कि मेरे फ्यूचर प्लान्स क्या हैं। मैंने बताया कि मैं टीचर बनना चाहती हूं, और उन्होंने हंसकर कहा, "तो मेरी तरह?" हम दोनों हंसे, और घर पहुंचते-पहुंचते बातें काफी सहज हो गईं थीं।

उसके बाद से सर क्लास में मुझे ज्यादा ध्यान देने लगे। कभी असाइनमेंट पर एक्स्ट्रा कमेंट्स लिखते, कभी क्लास के बाद बुलाते। मुझे लगता था कि वे सिर्फ मेरी पढ़ाई में मदद कर रहे हैं, लेकिन नेहा कहती, "प्रिया, सर तुम्हें स्पेशल ट्रीटमेंट दे रहे हैं।" मैं हंसकर टाल देती।

एक दिन क्लास के बाद सर ने मुझे अपने ऑफिस में बुलाया। वहां उन्होंने कहा, "प्रिया, तुम्हारी एッセ पर अच्छा स्कोर है, लेकिन क्या तुम एक्स्ट्रा क्लासेस जॉइन करना चाहोगी? मैं कुछ स्टूडेंट्स को गाइड करता हूं।" मैंने हां कह दी, क्योंकि पढ़ाई में फायदा था। अगले दिन से शाम को उनके ऑफिस में एक्स्ट्रा सेशन शुरू हो गए।

पहले सेशन में हमने किताबों पर चर्चा की। सर पास बैठे थे, और कभी-कभी किताब दिखाते हुए उनका हाथ मेरे कंधे पर छू जाता। मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन अंदर से एक अजीब सी फीलिंग हुई। वे बोलते जाते, और मैं सुनती रहती।

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धीरे-धीरे सेशन लंबे होने लगे। एक शाम बारिश हो रही थी, और मैं भीगकर पहुंची। सर ने कहा, "प्रिया, बैठो, कॉफी पी लो पहले।" उन्होंने कॉफी बनाई, और हमने बातें कीं। उस दिन पढ़ाई कम हुई, पर्सनल बातें ज्यादा। सर ने बताया कि उनकी शादी नहीं हुई है, और वे अकेले रहते हैं।

मुझे उनके बारे में जानकर अच्छा लगा, लेकिन साथ ही एक टेंशन भी। घर पर मैं सोचती कि क्या ये सही है? लेकिन पढ़ाई का बहाना था। नेहा से मैंने शेयर नहीं किया, क्योंकि लगता था कि वो गलत समझेगी। सर की नजरें अब क्लास में भी मुझे ढूंढतीं, और मैं शर्मा जाती।

एक सेशन में सर ने मेरी कॉपी चेक करते हुए कहा, "प्रिया, तुम्हारी हैंडराइटिंग कितनी सुंदर है।" उनकी आंखों में कुछ अलग था। मैंने नजरें झुका लीं, और दिल तेज धड़कने लगा। वे करीब आए, और बोले, "तुम्हें पता है, तुम बहुत इंटेलिजेंट हो।"

उस पल में चुप्पी छा गई। सर का हाथ मेरे हाथ पर रखा, और मैं सिहर गई। मैंने कुछ नहीं कहा, बस उठकर जाने लगी। लेकिन वे बोले, "रुको, प्रिया। क्या गलत है?" मैं रुक गई, और अंदर का कन्फ्लिक्ट बढ़ गया। क्या ये आकर्षण है?

अगले दिन क्लास में मैं सर से नजरें नहीं मिला पाई। लेकिन शाम को सेशन था, और मैं गई। वहां सर ने माफी मांगी, कहा कि वे सिर्फ दोस्ती करना चाहते थे। मैंने कहा, "सर, मैं समझती हूं, लेकिन..." बात अधर में रह गई। उन्होंने फिर से करीब आकर मेरे चेहरे को छुआ।

उस स्पर्श से मेरे अंदर आग सी लग गई। मैंने विरोध नहीं किया, और सर ने मुझे अपनी बाहों में खींच लिया। उनकी सांसें मेरे कान पर महसूस हो रही थीं, और मैं कांप रही थी। "प्रिया, मैं तुम्हें पसंद करता हूं," उन्होंने फुसफुसाया।

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मैंने आंखें बंद कर लीं, और उनके होंठ मेरे होंठों पर आ गए। वो चुंबन इतना गहरा था कि मैं सब भूल गई। उनके हाथ मेरी कमर पर फिसलते गए, और मैंने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन नहीं कर पाई। हम दोनों खड़े थे, और उनका शरीर मेरे खिलाफ दब रहा था।

सर ने मुझे डेस्क पर बिठाया, और मेरी शर्ट के बटन खोलने लगे। मेरी सांसें तेज थीं, और मैंने उनके बालों में उंगलियां फंसाईं। उनकी जीभ मेरे गले पर घूम रही थी, और हर स्पर्श से मेरे शरीर में करंट दौड़ रहा था। मैंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया था।

उन्होंने मेरी ब्रा उतारी, और मेरे स्तनों को चूमा। उनकी जीभ निप्पल्स पर घूमी, और मैं सिसकारी भर उठी। "सर... आह," मैंने कहा, लेकिन वे रुके नहीं। उनके हाथ मेरी स्कर्ट के नीचे सरक गए, और पैंटी को छुआ। मैं गीली हो चुकी थी, और उनकी उंगलियां मुझे छेड़ रही थीं।

मैंने उनकी शर्ट उतारी, और उनके सीने को चूमा। उनका शरीर मजबूत था, और मैंने अपनी जीभ से उनके निप्पल्स को छेड़ा। सर कराह उठे, और मुझे और जोर से पकड़ लिया। हम दोनों अब फर्श पर थे, और उन्होंने मेरी पैंटी उतार दी। उनकी उंगलियां मेरे क्लिटोरिस पर रगड़ रही थीं, और मैं चरम पर पहुंच रही थी।

"प्रिया, तुम कितनी खूबसूरत हो," सर ने कहा, और अपना पैंट उतारा। उनका लिंग कड़ा था, और मैंने उसे छुआ। धीरे से सहलाया, और सर की आंखें बंद हो गईं। फिर उन्होंने मुझे लिटाया, और धीरे से अंदर प्रवेश किया। दर्द हुआ, लेकिन साथ ही आनंद भी।

वे धीरे-धीरे धक्के लगाने लगे, और मैं उनकी कमर पकड़कर साथ दे रही थी। हर धक्के के साथ मेरी सांसें उखड़ रही थीं, और सर के चेहरे पर पसीना था। "तेज, सर," मैंने कहा, और उन्होंने स्पीड बढ़ा दी। हम दोनों का शरीर एक ритम में चल रहा था, और कमरे में सिर्फ हमारी सांसों की आवाज थी।

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चरम पर पहुंचकर मैं चिल्ला उठी, और सर भी मेरे साथ झड़ गए। हम दोनों हांफते हुए लेटे रहे, और सर ने मुझे चूमा। "ये हमारा राज रहेगा, प्रिया," उन्होंने कहा। मैंने हां में सिर हिलाया, लेकिन अंदर से डर भी था।

अगले सेशन में हम फिर मिले, लेकिन इस बार और इंटेंस था। सर ने मुझे अपने घर बुलाया, कहा कि वहां शांति से पढ़ाई करेंगे। मैं गई, और वहां पहुंचते ही उन्होंने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया। "आज मैं तुम्हें सब सिखाऊंगा," उन्होंने कहा।

उन्होंने मेरे कपड़े उतारे, और मेरे पूरे शरीर को चूमा। उनकी जीभ मेरी योनि पर घूमी, और मैं पागल हो गई। मैंने उनके लिंग को मुंह में लिया, और चूसा। सर कराहते रहे, और फिर हम 69 पोजिशन में आए। हर सेंसेशन नया था, और भावनाएं उफान पर थीं।

फिर उन्होंने मुझे डॉगी स्टाइल में लिया, और पीछे से धक्के लगाए। मेरे स्तन हिल रहे थे, और सर ने उन्हें पकड़ रखा था। "प्रिया, तुम मेरी हो," उन्होंने कहा, और मैंने हां कहा। वो रात हमने कई बार सेक्स किया, हर बार अलग फील के साथ।

लेकिन अंदर का कन्फ्लिक्ट बढ़ता गया। क्या ये सही है? सर मेरे टीचर हैं, और मैं स्टूडेंट। घर पर झूठ बोलना पड़ता, और नेहा को शक होने लगा। एक दिन उसने पूछा, "प्रिया, सर के साथ क्या चल रहा है?" मैंने झूठ बोला, लेकिन मन भारी था।

फिर भी, सर से मिलना बंद नहीं कर पाई। उनकी चाहत मुझे खींचती थी। एक शाम उनके घर पर हम फिर साथ थे। सर ने मुझे बांधा, और आंखों पर पट्टी बांधी। अंधेरे में हर स्पर्श और तीव्र था। उन्होंने मुझे चाटा, चूमा, और फिर अंदर आए। मैं चीखी, लेकिन आनंद से।

उस रात के बाद मैंने सोचा कि शायद ये रुकना चाहिए, लेकिन सर ने कहा, "प्रिया, मैं तुमसे प्यार करता हूं।" उनकी आंखों में सच्चाई थी, और मैं पिघल गई। हमारी मुलाकातें जारी रहीं, हर बार नई भावनाओं के साथ।

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कॉलेज में अब फाइनल एग्जाम्स नजदीक थे, और सर ने कहा कि वे मेरी मदद करेंगे। लेकिन मदद से ज्यादा, हमारा समय इंटिमेट होता। एक दिन लाइब्रेरी के कोने में उन्होंने मुझे किस किया, और मैं डर गई कि कोई देख लेगा। लेकिन वो रोमांच भी था।

एग्जाम्स के बाद सर ने मुझे ट्रिप पर ले जाने का प्लान बनाया। हम एक हिल स्टेशन गए, जहां होटल में हमने पूरे दिन साथ बिताया। वहां सेक्स और ज्यादा पैशनेट था। सर ने मुझे मसाज दिया, फिर बाथटब में साथ नहाए। पानी में उनके साथ होना अविश्वसनीय था।

ट्रिप से लौटकर मैंने महसूस किया कि मैं सर से गहराई से जुड़ गई हूं। लेकिन समाज की नजरें, घर का डर—सब मुझे परेशान करता। सर कहते, "हम इसे हैंडल करेंगे," लेकिन मैं अनिश्चित थी।

एक रात उनके घर पर हम फिर साथ थे। सर ने मुझे बिस्तर पर लिटाया, और धीरे-धीरे मेरे शरीर को एक्सप्लोर किया। उनकी उंगलियां हर जगह घूमीं, और मैंने खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया। वो पल इतना इंटेंस था कि मैं रो पड़ी, खुशी से।

सर ने मुझे गले लगाया, और हम बातें करते रहे। "प्रिया, तुम मेरी जिंदगी हो," उन्होंने कहा। मैंने भी कहा, "सर, मैं आपसे प्यार करती हूं।" वो रात हमने सिर्फ एक-दूसरे को महसूस किया, बिना जल्दबाजी के।

अब हर दिन सर के साथ बीतता है, और मैं अपनी भावनाओं में डूबी हूं।