क्लासमेट की माँ के साथ छिपा रिश्ता
सुबह की धूप मेरे कमरे की खिड़की से छनकर आ रही थी, और मैं अपनी किताबों को बैग में ठूँस रहा था। कॉलेज का दूसरा साल चल रहा था, और रोज की तरह मैं लेट हो रहा था। बाहर से माँ की आवाज़ आई, "अजय, नाश्ता कर ले, वरना भूखा ही रहेगा सारा दिन।" मैंने हड़बड़ी में सैंडविच मुँह में ठूँसा और घर से निकल पड़ा, साइकिल पर सवार होकर।
कॉलेज पहुँचते ही क्लास शुरू हो गई थी। मैं अपनी सीट पर बैठा, नोट्स कॉपी कर रहा था। रिया मेरी क्लासमेट थी, जो हमेशा मेरे बगल में बैठती। वो मुस्कुराकर बोली, "फिर लेट हो गया न? तेरी ये आदत कब जाएगी?" मैंने हँसकर जवाब दिया, "तू तो जानती है, सुबह नींद नहीं खुलती।" रिया मेरी अच्छी दोस्त थी, हम साथ में प्रोजेक्ट्स करते, और कभी-कभी उसके घर पर स्टडी करने जाते।
उस दिन क्लास के बाद रिया ने कहा, "अजय, आज मेरे घर चल न, प्रोजेक्ट पर काम करना है। मम्मी ने भी कहा है कि तू आया कर।" मैंने हामी भर दी, क्योंकि उसके घर जाना मुझे अच्छा लगता था। रिया का घर हमारे कॉलेज से थोड़ी दूर था, एक शांत मोहल्ले में। हम साथ में बस से गए, रास्ते में कॉलेज की गॉसिप्स पर हँसते रहे।
घर पहुँचते ही दरवाजा नीता आंटी ने खोला। वो रिया की माँ थीं, करीब चालीस साल की, लेकिन हमेशा इतनी एनर्जेटिक लगतीं कि उम्र का पता ही नहीं चलता। "आओ बेटा, अंदर आओ," उन्होंने मुस्कुराकर कहा और हमें ड्रॉइंग रूम में बिठाया। रिया ऊपर अपने कमरे में चली गई कुछ लेने, और मैं सोफे पर बैठा इंतज़ार करने लगा।
नीता आंटी किचन से चाय लेकर आईं। "अजय, तू कैसा है? कॉलेज कैसा चल रहा?" उनकी आवाज़ में एक गर्माहट थी, जो मुझे हमेशा आराम देती। मैंने बताया, "ठीक है आंटी, बस असाइनमेंट्स बहुत हैं।" वो हँसकर बोलीं, "हाँ, रिया भी यही कहती है। तुम दोनों मिलकर कर लो, मैं डिस्टर्ब नहीं करूँगी।" उनकी आँखों में एक सौम्य चमक थी, जो मुझे थोड़ा सहज महसूस कराती।
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रिया नीचे आई और हम दोनों उसके कमरे में चले गए। प्रोजेक्ट पर काम करते हुए समय कट रहा था। रिया बहुत स्मार्ट थी, वो मुझे समझाती और मैं नोट्स बनाता। बीच-बीच में हम हँसते, लेकिन आज कुछ अलग सा लग रहा था। रिया की नज़रें कभी-कभी मेरी तरफ रुकतीं, जैसे कुछ कहना चाहती हों। मैंने सोचा शायद वो थक गई है।
शाम हो गई थी, और नीता आंटी ने हमें नीचे बुलाया डिनर के लिए। टेबल पर बैठे हम तीनों बातें कर रहे थे। रिया ने कहा, "मम्मी, अजय को घर छोड़ दूँ?" लेकिन आंटी बोलीं, "नहीं, रात हो गई है, वो यहीं रुक जाए आज। कल सुबह चला जाएगा।" मैंने मना करने की कोशिश की, लेकिन रिया ने भी जोर दिया, "हाँ अजय, रह जा न।"
रात को गेस्ट रूम में लेटा मैं सोच रहा था। घर की शांति अच्छी लग रही थी, लेकिन मन में एक अजीब सी बैचेनी थी। रिया का कमरा बगल में था, और नीता आंटी का थोड़ा आगे। मैंने किताब खोली पढ़ने की कोशिश की, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। तभी दरवाजे पर हल्की सी खटखट हुई।
दरवाजा खोला तो रिया खड़ी थी, नाइट सूट में। "नींद नहीं आ रही?" उसने पूछा। मैंने सिर हिलाया, "नहीं, नया बेड है न।" वो अंदर आई और बेड पर बैठ गई। "अजय, तू मुझे पसंद है," उसने अचानक कहा, उसकी आँखें मेरी आँखों में गड़ीं। मैं स्तब्ध रह गया, लेकिन मन में कुछ हलचल हुई।
रिया करीब आई, और उसने मेरे हाथ को छुआ। उसका स्पर्श गर्म था, और मैंने खुद को रोक नहीं पाया। हमारी बातें धीरे-धीरे करीब आने में बदल गईं। रिया ने मुझे किस किया, और मैंने जवाब दिया। उस रात हमने एक-दूसरे को महसूस किया, लेकिन वो सब इतना नैचुरल लगा जैसे पहले से तय था।
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सुबह उठा तो रिया पहले ही जा चुकी थी। नीचे किचन में नीता आंटी थीं। "अच्छी नींद आई?" उन्होंने पूछा, लेकिन उनकी नज़रों में कुछ अलग था, जैसे वो सब जानती हों। मैंने हामी भरी और नाश्ता किया। रिया कॉलेज चली गई, और मैं भी जाने लगा, लेकिन आंटी ने रोका, "अजय, थोड़ी देर रुक न, बात कर लें।"
हम सोफे पर बैठे। आंटी ने कहा, "मैं जानती हूँ रिया और तुम्हारे बारे में। वो खुश है, लेकिन मैं भी अकेली हूँ बेटा।" उनकी बातों में एक दर्द था, और मैंने महसूस किया कि वो भी भावनाओं से भरी हैं। धीरे-धीरे हमारी बातें गहरी हुईं, और आंटी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा।
उस पल में कुछ टूटा, और मैंने खुद को उनके करीब पाया। नीता आंटी का स्पर्श अलग था, अनुभवी और गहरा। हमने एक-दूसरे को छुआ, और वो पल भावनाओं से भरा था। आंटी की आँखों में आँसू थे, लेकिन मुस्कान भी। "अजय, ये गलत नहीं है," उन्होंने कहा।
उस दिन के बाद मैं अक्सर उनके घर जाने लगा। रिया के साथ मेरा रिश्ता गहरा होता गया, हम साथ में समय बिताते, हँसते, और अंतरंग पलों में खो जाते। रिया का शरीर युवा और उत्साही था, हर बार वो नई ऊर्जा लाती। हम बेड पर लेटे बातें करते, और धीरे-धीरे हमारे शरीर एक हो जाते।
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एक शाम रिया घर पर नहीं थी, और मैं नीता आंटी से मिलने गया। वो अकेली थीं, और हमने चाय पीते हुए बात की। "अजय, तू रिया को खुश रखता है, लेकिन मुझे भी मत भूलना," उन्होंने कहा। उनकी बातों में एक चाहत थी, और मैंने उन्हें गले लगाया। आंटी का शरीर गर्म था, और हम धीरे-धीरे करीब आए।
उस रात आंटी के साथ का अनुभव अलग था। उनकी हर हरकत में अनुभव झलकता, और मैं खुद को खोया हुआ महसूस कर रहा था। हमने घंटों साथ बिताए, सेंसेशन्स की गहराई में डूबे। आंटी की साँसें तेज़ थीं, और उन्होंने मुझे ऐसे छुआ जैसे कोई खोई हुई चीज़ मिल गई हो।
रिया को शक नहीं हुआ, क्योंकि हम सावधान थे। लेकिन एक दिन रिया ने कहा, "अजय, मम्मी तुझे बहुत पसंद करती हैं।" मैंने हँसकर टाल दिया, लेकिन मन में कन्फ्लिक्ट था। क्या ये सही था? लेकिन भावनाएँ इतनी मजबूत थीं कि रोक नहीं पाया।
एक वीकेंड हम तीनों घर पर थे। रिया ने कहा, "चलो मूवी देखें।" हम सोफे पर बैठे, लेकिन हवा में टेंशन थी। रिया मेरे बगल में थी, और आंटी दूसरी तरफ। फिल्म चल रही थी, लेकिन हमारी नज़रें मिल रही थीं। धीरे-धीरे रिया ने मेरे हाथ को छुआ, और आंटी ने भी।
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उस रात कुछ अनोखा हुआ। हम तीनों एक साथ थे, भावनाओं की लहर में बहते। रिया और आंटी दोनों ने मुझे मज़े दिए, लेकिन वो सब प्यार और चाहत से भरा था। हर स्पर्श में नई भावना थी, कोई रिपीट नहीं। रिया की युवा ऊर्जा और आंटी की गहराई मिलकर एक परफेक्ट मिश्रण बन गई।
हम बेड पर लेटे, एक-दूसरे को महसूस करते। रिया ने कहा, "अजय, ये हमारा सीक्रेट है।" आंटी ने मुस्कुराकर सिर हिलाया। वो पल इतना इंटेंस था कि समय रुक सा गया। शरीर की गर्मी, साँसों की रिदम, सब कुछ синх में था।
अगले दिन सुबह हम नॉर्मल हो गए, लेकिन मन में वो यादें बसी रहीं। मैं रिया के साथ कॉलेज जाता, और शाम को आंटी से मिलता। हर बार कुछ नया लगता, कोई कन्फ्लिक्ट, कोई नई भावना। रिया के साथ के पल रोमांटिक थे, आंटी के साथ गहरे।
एक शाम आंटी अकेली थीं। मैं गया, और हमने बात की। "अजय, क्या तू खुश है?" उन्होंने पूछा। मैंने कहा, "हाँ आंटी, लेकिन कभी डर लगता है।" वो बोलीं, "डर मत, ये हमारी ज़िंदगी है।" फिर हम करीब आए, और उस बार का अनुभव और भी सेंसरी था – उनकी त्वचा की मुलायमियत, साँसों की महक, सब कुछ जीवंत।
रिया के साथ भी ऐसे पल बढ़ते गए। वो मुझे अपने कमरे में ले जाती, और हम घंटों खोए रहते। उसकी आँखों में शरारत होती, और मैं जवाब देता। हर बार नई पोजीशन, नई भावना – कभी हँसी, कभी गंभीरता।
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समय बीतता गया, और ये रिश्ता हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन गया। कभी-कभी मन में सवाल उठते, लेकिन भावनाएँ सब कुछ दबा देतीं। हम तीनों के बीच एक बैलेंस था, जो हमें बाँधे रखता।
एक रात रिया और आंटी दोनों मेरे साथ थीं। हमने बातें की, हँसे, और फिर अंतरंग हो गए। रिया का हाथ मेरे पर, आंटी का स्पर्श अलग, सब मिलकर एक अनोखा अनुभव। भावनाओं की गहराई में डूबे, हमने एक-दूसरे को पूरा महसूस किया। सेंसेशन्स वैरायटी से भरे थे – कोमल छुअन से लेकर तेज़ लहरें।
उस पल में मैंने महसूस किया कि ये सिर्फ मज़ा नहीं, बल्कि एक गहरा कनेक्शन था। रिया की मुस्कान, आंटी की आँखें, सब कुछ परफेक्ट लग रहा था। हम लेटे रहे, साँसें मिलाते हुए, और दुनिया बाहर भूल गई।