ससुर जी की मदद

सुबह की धूप अभी-अभी खिड़की से झांक रही थी, जब मैं रसोई में चाय की केतली चढ़ा रही थी। हमारा घर गांव के किनारे पर था, जहां हर दिन की शुरुआत एक ही तरह से होती – पक्षियों की चहचहाहट और दूर से आती ट्रैक्टर की आवाज़। मैंने अमित को कॉल किया था, लेकिन वो शहर में व्यस्त था, काम की वजह से। ससुर जी बाहर आंगन में अखबार पढ़ रहे थे, और मैं सोच रही थी कि आज का दिन भी वैसा ही बीतेगा, जैसे बाकी दिन।

मैं रिया हूं, अमित की पत्नी, और पिछले दो साल से इस घर में हूं। शादी के बाद से ही अमित जॉब की वजह से ज़्यादातर बाहर रहता है, और मैं घर संभालती हूं। ससुर जी, जिन्हें सब राजेश जी कहते हैं, वो रिटायर्ड हैं और घर के कामों में मदद करते हैं। वो हमेशा शांत और मददगार रहते हैं, कभी कोई शिकायत नहीं। आज भी मैंने चाय बनाई और ट्रे में रखकर आंगन में ले गई। "ससुर जी, चाय पीजिए," मैंने कहा, और वो मुस्कुराकर बोले, "बेटा, तुम्हारा हाथ बहुत अच्छा है चाय में।"

दिनचर्या में सब कुछ सामान्य था। दोपहर को मैंने घर की साफ-सफाई की, कपड़े धोए, और शाम को सब्जी बाजार से लाई। अमित का फोन आया, वो बोला कि अगले हफ्ते ही आएगा। मैं थोड़ी उदास हुई, लेकिन कुछ कहा नहीं। ससुर जी ने देखा तो पूछा, "क्या बात है रिया? अमित ठीक है न?" मैंने हंसकर टाल दिया, "हां जी, सब ठीक है।" रात को खाना बनाते हुए मुझे लगा कि घर में अकेलापन सा है, लेकिन परिवार तो यही है।

रात के समय मैं अपने कमरे में थी, किताब पढ़ रही थी। ससुर जी अपना कमरा संभालते हैं, लेकिन आज वो थोड़े असहज लग रहे थे। खाने के बाद वो बोले, "रिया, कल सुबह डॉक्टर के पास जाना है, थोड़ी थकान महसूस हो रही है।" मैंने चिंता से पूछा, "कुछ गंभीर तो नहीं?" वो हंसे, "नहीं बेटा, उम्र का असर है।" मैंने सोचा कि कल उन्हें ले जाऊंगी, लेकिन रात गहराती गई और मैं सोने की तैयारी करने लगी।

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अगले दिन सुबह उठी तो ससुर जी पहले से तैयार थे। हम डॉक्टर के पास गए, जहां कुछ दवाइयां मिलीं। वापस आकर मैंने उन्हें आराम करने को कहा। दिन भर मैं घर के कामों में लगी रही, लेकिन शाम को मुझे खुद थोड़ी परेशानी हुई। बाथरूम में नहाते हुए मुझे लगा कि कुछ मदद चाहिए, लेकिन अमित नहीं था। मैंने सोचा कि अकेले ही संभाल लूंगी, लेकिन मन में एक हिचकिचाहट थी।

रात को जब सब सो गए, मैं अपने कमरे में थी। मन में अमित की याद आ रही थी, और घर की खामोशी मुझे परेशान कर रही थी। ससुर जी का कमरा पास ही था, और मुझे लगा कि शायद उनसे बात कर लूं। मैं उठी और उनके कमरे की ओर गई, लेकिन रुक गई। फिर सोचा, वो परिवार हैं, मदद मांगने में क्या हर्ज। मैंने दरवाजा खटखटाया, "ससुर जी, जाग रहे हैं?" वो बोले, "हां रिया, आओ।"

अंदर जाकर मैं बैठी, और थोड़ी देर इधर-उधर की बातें कीं। फिर मैंने हिचकते हुए कहा, "ससुर जी, एक बात है, थोड़ी व्यक्तिगत। अमित नहीं है, और मुझे... कुछ मदद चाहिए।" वो चौंके, लेकिन शांत रहे, "बोलो बेटा, क्या समस्या है?" मैंने शर्माते हुए बताया कि नहाने के समय झांटें साफ करने में दिक्कत हो रही है, क्योंकि पीठ तक पहुंच नहीं पा रही। वो चुप रहे, फिर बोले, "रिया, अगर तुम्हें बुरा न लगे तो मैं मदद कर दूं।"

मेरा दिल तेज़ धड़कने लगा। मैंने सोचा कि यह गलत है, लेकिन अमित की अनुपस्थिति में यह अकेलापन असहनीय था। मैंने हां में सिर हिलाया, और हम बाथरूम की ओर चले। वहां लाइट जलाकर मैंने कपड़े उतारे, और ससुर जी ने सावधानी से रेज़र लिया। उनकी उंगलियां मेरी त्वचा पर छुईं, और एक अजीब सी सिहरन हुई। मैंने आंखें बंद कर लीं, सोच रही थी कि यह सिर्फ मदद है।

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जैसे-जैसे वो साफ कर रहे थे, उनकी सांसें मेरी गर्दन पर महसूस हो रही थीं। मैंने महसूस किया कि मेरा शरीर गर्म हो रहा है, लेकिन मैंने खुद को रोका। "ससुर जी, धीरे," मैंने कहा, और वो बोले, "हां रिया, आराम से।" उस पल में एक भावनात्मक उथल-पुथल थी – गिल्ट, लेकिन साथ ही एक अनकही इच्छा। काम खत्म होने के बाद मैंने उन्हें देखा, उनकी आंखों में कुछ अलग था।

हम कमरे में वापस आए, और मैं बैठ गई। ससुर जी ने कहा, "रिया, अगर तुम्हें बुरा लगा तो माफ करना।" मैंने नजरें झुका लीं, "नहीं जी, आपकी मदद अच्छी लगी।" फिर चुप्पी छा गई। मैंने महसूस किया कि मेरे अंदर एक आग सी जल रही है, अमित की याद और यह निकटता मिलकर कुछ जगा रही थीं। ससुर जी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा, और मैंने विरोध नहीं किया।

धीरे-धीरे उनकी उंगलियां मेरे बालों में फिरने लगीं। मैंने आंखें बंद कीं, और सोचा कि यह गलत है, लेकिन शरीर मान नहीं रहा था। ससुर जी ने मुझे अपनी ओर खींचा, और मैंने खुद को छोड़ दिया। उनकी बाहों में मैंने एक सुरक्षा महसूस की, जो लंबे समय से गायब थी। हम बिस्तर पर लेटे, और उनकी चुंबन मेरी गर्दन पर पड़े।

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मेरा मन संघर्ष कर रहा था – क्या यह विश्वासघात है? लेकिन उस पल में भावनाएं हावी हो गईं। ससुर जी ने मेरे कपड़े उतारे, और उनकी आंखों में इच्छा साफ दिख रही थी। मैंने भी उनके कपड़े खोले, और हम एक-दूसरे के करीब आए। उनकी त्वचा गर्म थी, और हर स्पर्श में एक नई सनसनी थी। मैंने सोचा कि यह सिर्फ एक रात है, लेकिन दिल जानता था कि यह गहरा है।

जैसे-जैसे हम आगे बढ़े, मैंने महसूस किया कि मेरी चूत गीली हो रही है। ससुर जी ने धीरे से उंगलियां फेरनी शुरू कीं, और मैं सिसक उठी। "ससुर जी, ऐसे ही," मैंने कहा, और वो बोले, "रिया, तुम बहुत सुंदर हो।" उनकी उंगलियां अंदर गईं, और दर्द के साथ सुख मिला। मैंने अपने पैर फैलाए, और वो ऊपर आए।

उनका लिंग मेरी चूत पर रगड़ा, और मैंने आह भरी। धीरे से वो अंदर घुसे, और मैंने अपनी कमर उठाई। हर धक्के में एक नई लहर आती, भावनाओं की लहर। मैंने सोचा कि अमित कभी इतना धैर्य नहीं दिखाता, लेकिन ससुर जी हर पल को जी रहे थे। मेरी सांसें तेज़ हुईं, और मैं उनके सीने से चिपक गई।

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कुछ देर बाद हम अलग हुए, लेकिन फिर से करीब आए। इस बार मैं ऊपर थी, और उनकी आंखों में देखकर मैंने खुद को हिलाया। हर मूवमेंट में एक नई भावना थी – प्यार, वासना, गिल्ट। ससुर जी ने मेरे स्तनों को सहलाया, और मैंने अपनी रफ्तार बढ़ाई। क्लाइमैक्स के करीब पहुंचकर मैं चिल्ला उठी, और वो भी मेरे साथ झड़ गए।

उस रात हम कई बार एक हुए, हर बार कुछ नया अनुभव। सुबह होने से पहले मैंने सोचा कि यह रहस्य रहेगा, लेकिन दिल में एक बंधन बन गया था। ससुर जी ने मुझे गले लगाया, और मैंने महसूस किया कि अकेलापन दूर हो गया है।

अगले दिन सब सामान्य लग रहा था, लेकिन हमारी नजरें मिलतीं तो कुछ कह जातीं। शाम को जब अमित का फोन आया, मैंने सामान्य बात की, लेकिन मन में उथल-पुथल थी। ससुर जी ने रात को फिर बुलाया, और मैं गई। इस बार हमने और गहराई से एक-दूसरे को जाना।

उनकी जीभ मेरी चूत पर फिरी, और मैं पागल हो गई। हर चाट में एक नई सिहरन, और मैंने उनके बाल पकड़ लिए। फिर मैंने उनका लिंग मुंह में लिया, और वो कराह उठे। हमने पोजीशन्स बदलीं, हर बार इमोशन्स को जोड़कर।

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समय बीतता गया, और यह रिश्ता गहराता गया। मैं जानती थी कि यह गलत है, लेकिन भावनात्मक सुकून इससे मिल रहा था। एक रात हम बाहर आंगन में थे, चांदनी रात में, और वहीं हमने प्यार किया। हवा की ठंडक और उनकी गर्माहट का मिश्रण अविस्मरणीय था।

अब हर रात एक कहानी बन गई है। ससुर जी की मदद से मैंने खुद को खोजा, और यह बंधन मजबूत होता जा रहा है। मैं सोचती हूं कि अमित आएगा तो क्या होगा, लेकिन अभी तो यह पल जी रही हूं।

रात गहरा रही है, और ससुर जी मेरे कमरे में हैं। हम फिर से एक होने वाले हैं, उनकी बाहों में।