किरायेदार की चाहत
सुबह की पहली किरण कमरे में घुस रही थी, और मैं बिस्तर पर लेटी हुई आलस से उठी। रोज की तरह, सबसे पहले रसोई में जाकर चाय का पानी चढ़ाया, फिर बालकनी में खड़ी होकर बाहर की सड़क पर नजर दौड़ाई। शहर की भागदौड़ अभी शुरू ही हो रही थी, और मैं सोच रही थी कि आज का दिन कैसा गुजरेगा।
मेरा नाम रिया है, और मैं अपने छोटे से फ्लैट में रहती हूं। अमित, मेरा पति, पिछले छह महीनों से दिल्ली में नौकरी कर रहा है, और मैं यहां अकेली हूं। घर चलाने के लिए हमने एक कमरा किराए पर दिया है। राहुल, वो लड़का जो यहां रहता है, कॉलेज स्टूडेंट है और पार्ट-टाइम जॉब करता है। वो सुबह जल्दी निकल जाता है, इसलिए हमारी ज्यादा बात नहीं होती।
आज सुबह मैंने चाय बनाई और अपनी किताब लेकर सोफे पर बैठ गई। बाहर बारिश की बूंदें गिरने लगीं, जो मौसम को और ठंडा बना रही थीं। मैंने सोचा कि शाम को बाजार से कुछ सब्जियां लानी हैं, क्योंकि फ्रिज लगभग खाली हो चुका है। ऐसे ही छोटे-मोटे कामों में दिन निकल जाता है।
राहुल का कमरा मेरे बेडरूम के बगल में है, और कभी-कभी रात को उसकी आवाजें सुनाई देती हैं, जैसे फोन पर बात करना या म्यूजिक सुनना। लेकिन मैं ज्यादा ध्यान नहीं देती। अमित से फोन पर बात होती है, वो कहता है कि जल्दी लौटेगा, लेकिन काम की वजह से देर हो जाती है। मैंने कभी शिकायत नहीं की, क्योंकि मैं जानती हूं कि वो हमारे लिए मेहनत कर रहा है।
दोपहर में मैंने घर साफ किया और लंच बनाया। राहुल आमतौर पर बाहर से खाकर आता है, लेकिन आज वो जल्दी लौट आया। मैं रसोई में थी जब उसने दरवाजा खटखटाया। "भाभी, क्या मैं एक ग्लास पानी ले सकता हूं?" उसने पूछा। मैंने मुस्कुराकर हां कहा और उसे पानी दिया। वो थका हुआ लग रहा था, शायद क्लास से आया था।
हमारी बातचीत छोटी-छोटी चीजों पर होती है, जैसे मौसम या शहर की खबरें। आज उसने बताया कि उसकी परीक्षा नजदीक है और पढ़ाई में व्यस्त है। मैंने कहा कि अगर मदद चाहिए तो बताना। वो हंसा और बोला, "आप तो हमेशा मदद करती हैं, भाभी।" उसकी मुस्कान में कुछ गर्माहट थी, जो मुझे अच्छी लगी।
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शाम को अमित का फोन आया, और हमने रोज की तरह बात की। वो थका हुआ लग रहा था, और मैंने उसे आराम करने को कहा। फोन रखने के बाद मैं अकेलापन महसूस करने लगी। घर इतना खाली लगता है जब वो नहीं होता। मैंने टीवी ऑन किया, लेकिन मन नहीं लगा।
रात के खाने के समय राहुल कमरे से निकला। "भाभी, आज मैंने बाहर से खाना नहीं लिया, अगर आपके साथ खा लूं?" उसने पूछा। मैंने हां कह दिया, क्योंकि अकेले खाना अच्छा नहीं लगता। हमने साथ बैठकर खाना खाया, और बातें कीं। उसने अपने गांव की कहानियां सुनाईं, कैसे वो शहर आया पढ़ाई के लिए। मैंने भी अपने कॉलेज के दिनों के बारे में बताया।
खाने के बाद हम सोफे पर बैठे रहे। बाहर बारिश तेज हो गई थी, और बिजली की आवाजें आ रही थीं। राहुल ने कहा, "भाभी, आपको अकेले डर नहीं लगता?" मैंने हंसकर कहा, "अब आदत हो गई है।" लेकिन अंदर से मैं जानती थी कि अकेलापन कभी-कभी भारी पड़ता है।
उस रात मैं बिस्तर पर लेटी सोच रही थी। अमित की याद आ रही थी, कैसे हम साथ समय बिताते थे। राहुल का कमरा बगल में था, और मैंने सुना वो भी जाग रहा है। शायद पढ़ाई कर रहा हो। मैंने खुद को समझाया कि सब ठीक है, और सोने की कोशिश की।
अगले दिन सुबह फिर वही रूटीन। लेकिन आज राहुल ने कहा कि उसकी क्लास कैंसिल हो गई है, तो वो घर पर रहेगा। मैंने सोचा कि कंपनी अच्छी रहेगी। दोपहर में मैंने चाय बनाई और उसे भी दी। हम बालकनी में खड़े होकर बात कर रहे थे। उसकी नजरें कभी-कभी मेरी ओर घूम जातीं, लेकिन मैंने ध्यान नहीं दिया।
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शाम को जब मैं कपड़े धो रही थी, राहुल आया और बोला, "भाभी, क्या मैं मदद कर दूं?" मैंने मना किया, लेकिन वो हंसकर बोला कि वो अच्छा धोता है। हम साथ काम करने लगे, और उसका हाथ गलती से मेरे हाथ से छू गया। वो पल अजीब सा था, लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा।
रात हुई, और अमित का फोन नहीं आया। मैं उदास हो गई। राहुल ने देखा और पूछा कि क्या हुआ। मैंने बताया कि अमित व्यस्त है। वो बोला, "भाभी, आप बहुत अच्छी हैं, अमित भैया लकी हैं।" उसकी तारीफ से मुझे अच्छा लगा, और मैंने मुस्कुरा दिया।
धीरे-धीरे हमारी बातें बढ़ने लगीं। वो अपने सपनों के बारे में बताता, और मैं सुनती। एक शाम हम साथ फिल्म देख रहे थे। फिल्म में एक रोमांटिक सीन आया, और मैंने महसूस किया कि राहुल मेरी ओर देख रहा है। मेरी सांसें तेज हो गईं, लेकिन मैंने खुद को संभाला।
उस रात मैं सो नहीं पाई। अकेलापन अब कुछ और रूप ले रहा था। राहुल का होना घर को जीवंत बना रहा था। अगले दिन जब वो कमरे में था, मैंने उसके लिए नाश्ता बनाया। वो खुश हुआ और बोला, "भाभी, आपका खाना बहुत स्वादिष्ट है।" उसकी आंखों में कुछ था जो मुझे छू गया।
शाम को बारिश फिर शुरू हो गई। हम साथ बैठे थे, और बातों-बातों में उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा। "भाभी, आप ठीक हैं?" उसने पूछा। मैंने हां कहा, लेकिन अंदर एक हलचल थी। वो हाथ वहां रहा, और मैंने हटाया नहीं।
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उस पल से कुछ बदल गया। रात को जब मैं बिस्तर पर थी, राहुल का दरवाजा खुला। वो आया और बोला, "भाभी, नींद नहीं आ रही। क्या बात कर सकते हैं?" मैंने हां कहा, और हम बैठकर बात करने लगे। उसकी नजरें मेरे चेहरे पर थीं, और धीरे-धीरे नीचे सरकीं।
मैंने महसूस किया कि मेरा शरीर प्रतिक्रिया दे रहा है। अमित की कमी अब असहनीय लग रही थी। राहुल करीब आया, और उसने मेरे हाथ को छुआ। "भाभी, आप बहुत खूबसूरत हैं," उसने धीरे से कहा। मैं चुप रही, लेकिन मेरा दिल तेज धड़क रहा था।
उसकी उंगलियां मेरे हाथ पर घूमीं, और फिर मेरे चेहरे को छुआ। मैंने आंखें बंद कर लीं। वो और करीब आया, और उसके होंठ मेरे होंठों से मिले। वो चुंबन नरम था, लेकिन गहरा। मैंने विरोध नहीं किया, बल्कि खुद को उसमें खो दिया।
उसके हाथ मेरी कमर पर सरके, और उसने मुझे अपनी ओर खींचा। मेरा शरीर गर्म हो रहा था, और मैंने उसके सीने को छुआ। वो मुझे बिस्तर पर लिटाया, और धीरे-धीरे मेरे कपड़े उतारने लगा। उसकी हर छुअन में एक नई संवेदना थी, जैसे लंबे समय से दबी हुई आग जल उठी हो।
मैंने उसके शरीर को महसूस किया, उसकी मांसपेशियां मजबूत थीं। वो मेरे स्तनों को सहलाने लगा, और मैं सिसकी भर उठी। उसका मुंह नीचे सरका, और उसने मेरी गर्दन पर चुंबन किए। हर पल में भावनाएं उमड़ रही थीं – अपराधबोध, इच्छा, और एक अजीब सी मुक्ति।
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राहुल ने मुझे पूरी तरह नग्न किया, और खुद भी कपड़े उतार दिए। उसका शरीर मेरे ऊपर था, और मैंने उसके लिंग को महसूस किया। वो कठोर था, और मेरी योनि में प्रवेश करने को तैयार। मैंने अपनी टांगें फैलाईं, और वो धीरे से अंदर आया। दर्द और सुख का मिश्रण था, जो मुझे狂 बना रहा था।
उसकी गतियां धीमी थीं, फिर तेज हुईं। मैंने अपनी कमर उठाई, और उसके साथ ताल मिलाया। हर धक्के में एक नई लहर उठती, और मैं उसके नाम पुकार रही थी। वो मेरे कान में फुसफुसाया, "भाभी, आप अद्भुत हैं।" उसकी आवाज ने मुझे और उत्तेजित कर दिया।
हमने पोजीशन बदली, अब मैं ऊपर थी। मैंने अपनी गति से उसे महसूस किया, उसके सीने पर हाथ रखकर। उसकी आंखें मेरी आंखों में थीं, और वो पल शुद्ध आनंद का था। मेरी योनि उसके लिंग को कसकर पकड़ रही थी, और मैं चरम पर पहुंच रही थी।
फिर वो नीचे आया, और उसने मुझे पीछे से पकड़ा। उसकी गतियां अब野 थीं, और मैं चीख रही थी। सुख की लहरें पूरे शरीर में फैल रही थीं, और आखिरकार हम दोनों एक साथ चरम पर पहुंचे। उसका वीर्य मेरे अंदर बहा, और मैं थककर उसके बगल में लेट गई।
उस रात के बाद हमारी मुलाकातें गहरी हो गईं। हर शाम वो मेरे कमरे में आता, और हम एक-दूसरे को खोजते। एक दिन हमने शावर में साथ नहाया। पानी की बौछार के नीचे उसने मुझे दीवार से सटाया, और मेरी योनि में उंगलियां डालीं। मैं गीली हो गई, और फिर उसने मुझे वहां चोदा। वो अनुभव अलग था, पानी और उसकी छुअन का संयोजन।
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मैं जानती थी कि ये गलत है, लेकिन रोक नहीं पा रही थी। अमित की अनुपस्थिति में राहुल मेरी जरूरत बन गया था। एक रात हमने खेल खेला, जहां उसने मेरी आंखों पर पट्टी बांधी। अंधेरे में उसकी हर छुअन惊喜 थी, और मैंने खुद को पूरी तरह सौंप दिया।
समय बीतता गया, और हमारी अंतरंगता बढ़ती गई। लेकिन अंदर एक डर था कि अमित लौटेगा तो क्या होगा। फिर भी, वो पल जीना जरूरी लगता था। राहुल अब मेरे लिए सिर्फ किरायेदार नहीं था, बल्कि कुछ और।
एक शाम हम बिस्तर पर लेटे थे, और उसने मुझे गले लगाया। उसकी सांसें मेरी गर्दन पर थीं, और मैंने महसूस किया कि ये भावनाएं अब सिर्फ शारीरिक नहीं हैं। वो बोला, "भाभी, मैं आपको खोना नहीं चाहता।" मैं चुप रही, लेकिन मेरी आंखें नम हो गईं।
उस रात हमने फिर प्यार किया, लेकिन इस बार धीमे और भावुक तरीके से। उसके हाथ मेरे पूरे शरीर पर घूमे, और मैंने हर हिस्से को महसूस किया। चरम पर पहुंचकर मैंने खुद को उसके हवाले कर दिया, और वो पल अनंत लग रहा था।