मेरे पति की गुप्त इच्छा
सुबह की हल्की धूप खिड़की से कमरे में आ रही थी, और मैं अपनी आदत के मुताबिक सबसे पहले उठी। घड़ी में अभी सात बजे थे, और बाहर से पक्षियों की चहचहाहट सुनाई दे रही थी। मैंने बिस्तर से उठकर किचन की तरफ कदम बढ़ाए, जहां रोज की तरह चाय की केतली चढ़ाई और ब्रेड टोस्ट करने लगी।
मेरा नाम रिया है, और मैं तीस साल की हूं। अक्षय से मेरी शादी को पांच साल हो चुके हैं। हम दिल्ली के एक छोटे से अपार्टमेंट में रहते हैं, जहां अक्षय एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता है, और मैं घर से ही फ्रीलांस ग्राफिक डिजाइनिंग करती हूं। हमारी जिंदगी काफी साधारण है – सुबह साथ नाश्ता, शाम को कभी-कभी बाहर घूमना, और वीकेंड पर फिल्म देखना।
आज भी वैसा ही दिन था। अक्षय अभी बिस्तर पर करवटें बदल रहा था, और मैंने चाय की दो कप बनाकर ट्रे में रखी। "अक्षय, उठो ना, लेट हो जाएगा ऑफिस," मैंने हल्के से आवाज दी, ट्रे लेकर कमरे में आई। वह मुस्कुराया और उठकर बैठ गया, चाय का कप थामते हुए।
हम दोनों ने साथ बैठकर नाश्ता किया, और बातें कीं – कल की मीटिंग के बारे में, मौसम के बारे में। अक्षय हमेशा की तरह शांत और प्यार करने वाला था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से मैंने उसमें एक हल्की सी बेचैनी महसूस की थी। वह कभी-कभी फोन पर किसी से लंबी बातें करता, और रात को सोते समय थोड़ा चुप रहता।
नाश्ते के बाद अक्षय तैयार होकर ऑफिस चला गया, और मैंने अपना लैपटॉप खोलकर काम शुरू किया। दिन बीता, और शाम को वह वापस आया, हाथ में कुछ ग्रॉसरी लेकर। "आज रात विक्रम आ रहा है, डिनर साथ करेंगे," उसने कहा, और मैंने हामी भरी। विक्रम अक्षय का पुराना दोस्त था, कॉलेज के दिनों से, और कभी-कभी घर आता था।
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शाम को मैंने किचन में डिनर तैयार किया – चिकन करी और रोटी, साथ में सलाद। विक्रम ठीक सात बजे आया, अपनी मुस्कान और जोरदार हेलो के साथ। वह लंबा-चौड़ा था, तीस के आसपास, और एक मार्केटिंग फर्म में काम करता था। हम तीनों ने साथ बैठकर बातें कीं, पुरानी यादें ताजा कीं।
डिनर के बाद हम लिविंग रूम में बैठे, और अक्षय ने वाइन की बोतल खोली। विक्रम हमेशा की तरह मजाकिया था, और मैं हंस रही थी। लेकिन अक्षय थोड़ा अलग लग रहा था – उसकी नजरें कभी मुझ पर, कभी विक्रम पर जातीं। "रिया, तुम्हें पता है विक्रम कितना एडवेंचरस है," अक्षय ने कहा, और विक्रम ने हंसकर सहमति दी।
रात गहराने लगी, और बातें गहरी होने लगीं। अक्षय ने अचानक कहा, "रिया, मैं तुमसे कुछ बात करना चाहता हूं।" उसकी आवाज में एक गंभीरता थी, जो मुझे चौंका गई। विक्रम चुपचाप बैठा रहा, जैसे वह पहले से जानता हो।
मैंने अक्षय की तरफ देखा, और वह बोला, "पिछले कुछ समय से मेरे मन में एक इच्छा है, जो मैं तुम्हें बताना चाहता हूं। यह हमारी शादी को और मजबूत बना सकती है, लेकिन मुझे डर है कि तुम गुस्सा हो जाओगी।" मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई, और मैंने पूछा, "क्या बात है अक्षय? बताओ ना।"
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उसने गहरी सांस ली और कहा, "मैं चाहता हूं कि तुम विक्रम के साथ... एक रात बिताओ। मैंने उसके बारे में सुना है, और मुझे लगता है कि यह हमें नई ऊर्जा देगा।" मैं स्तब्ध रह गई, मेरी आंखें फैल गईं। विक्रम ने कुछ नहीं कहा, बस मेरी तरफ देखा।
मेरे मन में उथल-पुथल मच गई। अक्षय मेरा पति था, जिसे मैं प्यार करती थी, लेकिन यह बात इतनी अजीब थी। "क्या कह रहे हो तुम? यह मजाक है ना?" मैंने कहा, लेकिन उसकी आंखों में गंभीरता थी। विक्रम ने हल्के से कहा, "रिया, अगर तुम नहीं चाहो तो कोई बात नहीं।"
रात भर मैं सो नहीं पाई। अक्षय ने मुझे गले लगाया, लेकिन मेरे मन में सवाल घूमते रहे। अगले दिन सुबह, जब विक्रम चला गया, अक्षय ने फिर बात की। "रिया, मैं तुम्हें मजबूर नहीं कर रहा, लेकिन सोचो तो सही। हमारी जिंदगी में कुछ नया ट्राई करना चाहिए।"
दिन बीतते गए, और अक्षय की बात मेरे मन में घूमती रही। मैं कन्फ्यूज थी – एक तरफ पति का प्यार, दूसरी तरफ नैतिकता। लेकिन धीरे-धीरे, मैंने खुद को समझाया कि अगर यह हमें खुश रखे, तो शायद ठीक है। एक शाम, मैंने अक्षय से कहा, "ठीक है, लेकिन केवल एक बार।"
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अक्षय खुश हो गया, और उसने विक्रम को बुलाया। उस रात, हम तीनों फिर साथ बैठे। वाइन ने माहौल को हल्का किया, और अक्षय ने कहा, "रिया, तुम रिलैक्स हो जाओ।" विक्रम मेरे पास आया, और उसने मेरे हाथ को छुआ। उसका स्पर्श गर्म था, और मैंने खुद को रोका नहीं।
अक्षय बाहर चला गया, और विक्रम ने मुझे अपनी बाहों में लिया। उसकी छाती चौड़ी थी, और मैंने महसूस किया कि वह कितना मजबूत है। "रिया, तुम खूबसूरत हो," उसने कहा, और मेरे होंठों पर किस किया। मेरे शरीर में एक झुरझुरी दौड़ी, और मैंने खुद को उसके हवाले कर दिया।
वह मुझे बेडरूम में ले गया, और धीरे-धीरे मेरे कपड़े उतारे। उसका शरीर एथलेटिक था, और जब उसने अपने कपड़े उतारे, तो मैंने देखा कि वह वाकई बड़ा था – जैसा अक्षय ने कहा था। मेरे मन में डर और उत्साह दोनों थे। वह मेरे शरीर पर किस करता रहा, मेरे स्तनों को सहलाता, और मैं सिसकियां भरने लगी।
उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया, और अपनी जीभ से मेरे पूरे शरीर को चाटा। सेंसेशन इतना तीव्र था कि मैं कांप रही थी। फिर, वह मेरे अंदर घुसा, धीरे से, लेकिन उसकी मोटाई ने मुझे भर दिया। दर्द और सुख का मिश्रण था, और मैं चीख पड़ी।
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वह रुक-रुक कर धक्के मारता रहा, और मैंने महसूस किया कि यह अनुभव कितना अलग था। अक्षय कभी इतना इंटेंस नहीं था। विक्रम के हर मूवमेंट में एक रिदम था, जो मुझे पागल कर रहा था। मैंने अपनी टांगें उसके कमर पर लपेटीं, और हम दोनों एक साथ क्लाइमेक्स पर पहुंचे।
उस रात के बाद, अक्षय ने मुझे गले लगाया, और कहा कि वह खुश है। लेकिन मेरे मन में एक नई भावना जागी – क्या यह सही था? अगले कुछ दिन हम सामान्य रहे, लेकिन विक्रम फिर आया। इस बार, अक्षय भी साथ था, देखते हुए।
विक्रम ने मुझे फिर से छुआ, लेकिन अब अक्षय की नजरें हमें देख रही थीं। यह और भी एक्साइटिंग था। विक्रम ने मुझे डॉगी स्टाइल में लिया, उसकी मोटाई ने मुझे फिर से भर दिया। अक्षय की आंखों में जलन और खुशी दोनों थे, और मैंने महसूस किया कि यह हमारी बॉन्डिंग को मजबूत कर रहा था।
हर बार, अनुभव नया होता। एक बार विक्रम ने मुझे किचन में पकड़ा, जब अक्षय बाहर था। उसने मुझे काउंटर पर बिठाया, और खड़े-खड़े अंदर घुसा। उसकी ताकत ने मुझे हिलाकर रख दिया, और मैं जोर-जोर से मोअन कर रही थी।
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धीरे-धीरे, यह हमारी रूटीन बन गई। अक्षय की इच्छा पूरी हो रही थी, और मैं भी इसमें मजा लेने लगी। विक्रम का बड़ा लंड हर बार मुझे नई ऊंचाइयों पर ले जाता, और अक्षय का प्यार और मजबूत होता।
एक शाम, हम तीनों बेड पर थे। विक्रम मुझे चोद रहा था, और अक्षय मेरे स्तनों को चूस रहा था। सेंसेशन इतना ज्यादा था कि मैं कंट्रोल नहीं कर पाई। विक्रम के धक्के तेज होते गए, और मैंने महसूस किया कि मेरा शरीर पूरी तरह उसके कब्जे में है।
उस पल में, मैंने अक्षय की आंखों में देखा, और वह मुस्कुरा रहा था। हमारा रिश्ता अब पहले से कहीं ज्यादा गहरा हो गया था, और मैं खुद को इस नई दुनिया में खो चुकी थी।