विदेशी मेहमान की चाहत
सुबह की धूप अभी-अभी खिड़की से झांक रही थी, जब मैं रसोई में चाय की केतली चढ़ा रही थी। हमारा घर दिल्ली के एक शांत इलाके में है, जहां हर रोज की शुरुआत ऐसी ही होती है—बेटा ऑफिस के लिए तैयार होता है, बहू नेहा बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी करती है, और मेरी बेटी पूजा अपने कमरे से निकलकर कॉफी मांगती है। आज भी वैसा ही था, मैंने सोचा कि दिन सामान्य गुजरेगा, बस शाम को बाजार जाना है कुछ सब्जियां लाने।
मैं रमा हूं, पचास की उम्र पार कर चुकी हूं, लेकिन घर संभालने में अभी भी वही जोश है। मेरे पति कुछ साल पहले गुजर चुके हैं, इसलिए अब मैं ही सबकी देखभाल करती हूं। मेरा बेटा राहुल इंजीनियर है, नेहा उसकी पत्नी है—एक प्यारी-सी लड़की, जो घर और बाहर दोनों संभालती है। पूजा मेरी बेटी है, अभी-अभी कॉलेज खत्म किया है, नौकरी की तलाश में है। हम सब मिलकर एक खुशहाल परिवार हैं, जहां हंसी-मजाक और छोटी-मोटी नोंकझोंक चलती रहती है।
उस दिन दोपहर को राहुल ने फोन किया और बताया कि उसका एक विदेशी क्लाइंट जॉन भारत आ रहा है, और कुछ दिन हमारे घर रुकेगा। "मां, वो अमेरिका से है, होटल में नहीं रहना चाहता, असली भारतीय संस्कृति देखना चाहता है," राहुल ने कहा। मैंने हामी भरी, क्योंकि मेहमान तो भगवान का रूप होते हैं। शाम को जॉन आया—लंबा-चौड़ा, गोरा चिट्टा आदमी, नीली आंखें और मुस्कान ऐसी कि कोई भी प्रभावित हो जाए। उसने हाथ जोड़कर नमस्ते किया और कहा, "हैलो, आई एम जॉन। थैंक यू फॉर होस्टिंग मी।"
नेहा ने उसे कमरा दिखाया, और पूजा ने चाय पिलाई। रात के खाने पर हम सब बैठे, जॉन ने भारत के बारे में ढेर सारे सवाल पूछे। मैंने देखा कि नेहा और पूजा दोनों थोड़ा शर्मा रही थीं, शायद विदेशी मेहमान की वजह से। जॉन की हिंदी टूटी-फूटी थी, लेकिन वो कोशिश करता रहा। खाना खत्म होने के बाद राहुल ने कहा, "मां, कल मैं जॉन को शहर घुमाऊंगा।" मैंने हंसकर कहा, "ठीक है, लेकिन ध्यान रखना, वो हमारे मेहमान हैं।"
अगले दिन सुबह मैं उठी तो देखा जॉन पहले से ही बगीचे में टहल रहा था। मैंने उसे कॉफी दी और पूछा, "सब ठीक है न?" वो मुस्कुराया और बोला, "हां, आपका घर बहुत सुंदर है।" पूजा भी नीचे आई, योगा करने। मैंने नोटिस किया कि जॉन की नजरें कभी-कभी पूजा पर रुक जाती थीं, लेकिन मैंने सोचा ये सामान्य है। नेहा रसोई में थी, बच्चों को नाश्ता दे रही थी। दिन ऐसे ही बीता, शाम को जॉन ने हमें अमेरिका की कहानियां सुनाईं।
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धीरे-धीरे जॉन हमारे परिवार का हिस्सा-सा लगने लगा। एक शाम बारिश हो रही थी, हम सब बालकनी में बैठे थे। जॉन ने पूजा से पूछा, "तुम क्या करती हो?" पूजा ने शर्माते हुए बताया कि वो डिजाइनिंग सीख रही है। नेहा हंसकर बोली, "पूजा बहुत क्रिएटिव है।" मैंने देखा कि जॉन की आंखों में एक अलग चमक थी, लेकिन मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। रात को जब सब सो गए, मैं अपने कमरे में लेटी सोच रही थी कि विदेशी मेहमान होना कितना अच्छा लगता है, घर में नई ऊर्जा आ जाती है।
कुछ दिन बाद राहुल को ऑफिस के काम से बाहर जाना पड़ा। जॉन अभी भी हमारे घर था, क्योंकि उसका प्रोजेक्ट चल रहा था। मैंने नेहा से कहा, "बेटा, जॉन का ख्याल रखना।" नेहा ने हां में सिर हिलाया। उस रात डिनर के बाद जॉन ने पूजा को अपने फोन पर अमेरिका की तस्वीरें दिखाईं। पूजा उत्साहित होकर देख रही थी, और नेहा भी पास बैठ गई। मैं रसोई साफ कर रही थी, लेकिन मुझे लगा कि कमरे में हवा थोड़ी गर्म हो गई है। जॉन की हंसी और लड़कियों की बातें सुनकर मैं मुस्कुराई।
अगली सुबह मैं बाजार से लौटी तो घर शांत था। नेहा बच्चों को स्कूल छोड़ने गई थी, पूजा कमरे में थी। जॉन लिविंग रूम में बैठा किताब पढ़ रहा था। मैंने चाय बनाई और उसे दी। वो बोला, "रमा, आपकी बेटी और बहू बहुत सुंदर हैं।" मैंने हंसकर कहा, "हां, वो मेरी जान हैं।" लेकिन उसके शब्दों में कुछ था जो मुझे सोचने पर मजबूर कर रहा था। शाम को जब नेहा लौटी, वो थकी लग रही थी। जॉन ने उससे बात की, "नेहा, तुम्हें रेस्ट करना चाहिए।" नेहा शर्मा गई।
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रात गहराने लगी थी। राहुल अभी नहीं लौटा था, फोन पर बताया कि कल आएगा। हमने खाना खाया, फिर जॉन ने कहा कि वो हमें एक अमेरिकन गेम सिखाएगा। हम सब बैठे, कार्ड्स खेलने लगे। पूजा और नेहा हंस रही थीं, जॉन की हर बात पर। मैंने नोटिस किया कि जॉन का हाथ कभी-कभी पूजा के कंधे पर रख जाता था, जैसे संयोग से। नेहा की नजरें भी जॉन पर टिकी थीं। मेरे मन में एक अजीब-सी उथल-पुथल हो रही थी—क्या ये सही है? लेकिन मैं चुप रही, सोच रही थी कि शायद मैं ज्यादा सोच रही हूं।
खेल खत्म होने के बाद पूजा और नेहा अपने कमरों में चली गईं। जॉन मेरे पास आया और बोला, "रमा, थैंक यू। आपका परिवार अद्भुत है।" मैंने मुस्कुराकर कहा, "तुम्हारा स्वागत है।" लेकिन रात को नींद नहीं आ रही थी। मैं उठकर पानी पीने गई तो देखा जॉन का कमरा खुला था। अंदर से हल्की-सी बातें सुनाई दीं। मैं रुक गई, दिल धड़कने लगा। क्या हो रहा है?
धीरे से दरवाजे के पास गई तो देखा जॉन अंदर था, और पूजा उसके पास बैठी थी। नेहा भी वहां थी, तीनों बातें कर रहे थे। जॉन कह रहा था, "भारत में लड़कियां इतनी खूबसूरत क्यों होती हैं?" पूजा हंस रही थी, नेहा शर्मा रही थी। मेरे मन में एक तूफान उठा—ये क्या हो रहा है? लेकिन मैं वहां से चली गई, सोच रही थी कि शायद ये सिर्फ दोस्ती है। अगले दिन सब सामान्य लग रहा था, लेकिन मैंने नेहा की आंखों में एक अलग चमक देखी।
शाम को बारिश फिर शुरू हो गई। जॉन ने कहा, "चलो, कुछ म्यूजिक लगाते हैं।" हम सब लिविंग रूम में थे। म्यूजिक बज रहा था, जॉन ने पूजा को डांस के लिए कहा। पूजा ने मना किया, लेकिन नेहा ने उसे खींच लिया। तीनों डांस करने लगे, मैं हंस रही थी। लेकिन धीरे-धीरे डांस closeness में बदल गया। जॉन का हाथ पूजा की कमर पर था, नेहा उसके करीब। मेरे मन में संघर्ष हो रहा था—रोकूं या न रोकूं? लेकिन एक हिस्सा उत्सुक भी था।
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रात देर हो गई। बच्चे सो चुके थे। जॉन ने कहा, "रमा, जॉइन अस।" मैं मना नहीं कर पाई। हम बातें करने लगे। जॉन ने अमेरिका की लाइफस्टाइल बताई, कैसे वहां फ्रीडम है। पूजा ने पूछा, "क्या वहां रिश्ते इतने ओपन होते हैं?" जॉन मुस्कुराया, "हां, अगर सब सहमत हों।" नेहा की सांसें तेज हो गईं। मैंने महसूस किया कि कमरे में टेंशन बढ़ रही है।
फिर जॉन ने पूजा के बालों में हाथ फेरा। पूजा रुक नहीं पाई, उसने आंखें बंद कर लीं। नेहा देख रही थी, उसकी आंखें चमक रही थीं। मैं स्तब्ध थी, लेकिन मेरे अंदर भी कुछ जाग रहा था। जॉन ने पूजा को अपनी ओर खींचा, उसके होंठों पर吻 किया। पूजा की सांसें भारी हो गईं। नेहा ने मेरी तरफ देखा, जैसे पूछ रही हो। मैं चुप रही।
जॉन का हाथ पूजा की कमीज पर गया, धीरे से बटन खोले। पूजा की छाती उभरी, उसकी सांसें तेज। नेहा भी पास आ गई, जॉन ने उसे भी छुआ। मैं देख रही थी, मन में उथल-पुथल। जॉन का शरीर मजबूत था, विदेशी ताकत। पूजा ने उसके सीने पर हाथ रखा, महसूस किया। नेहा की आंखें बंद थीं, जॉन का हाथ उसकी जांघों पर।
कमरे में अंधेरा था, सिर्फ लैंप की रोशनी। जॉन ने पूजा को सोफे पर लिटाया, उसके शरीर पर吻 करता रहा। पूजा कराह रही थी, "ओह जॉन..." नेहा ने अपनी साड़ी ढीली की, जॉन की तरफ बढ़ी। मैं अब शामिल हो गई, मेरे मन में दबे欲望 जागे। जॉन का लंड उभरा हुआ था, विदेशी आकार। पूजा ने उसे छुआ, आश्चर्य से।
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जॉन ने पूजा की बुर पर हाथ फेरा, वो गीली हो चुकी थी। धीरे से अंदर डाला, पूजा की चीख निकली, लेकिन सुख की। नेहा देख रही थी, अपनी उंगलियां इस्तेमाल कर रही थी। जॉन ने पूजा को चोदा, तेज-तेज। पूजा की आंखें बंद, शरीर कांप रहा था। फिर नेहा की बारी आई, जॉन ने उसे पीछे से पकड़ा, उसकी बुर में घुसा। नेहा की कराहें कमरे में गूंजीं।
मैं देख रही थी, मेरी अपनी इच्छाएं उबल रही थीं। जॉन ने मुझे देखा, मुस्कुराया। उसने मुझे पास बुलाया, मेरी साड़ी उतारी। उसका लंड मेरे सामने था, बड़ा और मजबूत। मैंने उसे मुंह में लिया, स्वाद अलग था। पूजा और नेहा देख रही थीं, उत्साहित। जॉन ने मुझे लिटाया, मेरी बुर में घुसा। दर्द और सुख मिला, सालों बाद।
हम तीनों जॉन के साथ थे, बारी-बारी। पूजा की बुर फिर से भरी, नेहा की चीखें। जॉन का स्टेमिना अद्भुत था, वो रुका नहीं। रात भर चला, भावनाएं उफान पर। पूजा ने कहा, "मां, ये अद्भुत है।" नेहा सहमति में सिर हिलाई। जॉन ने हमें नई दुनिया दिखाई, विदेशी स्पर्श।
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सुबह होने को थी, लेकिन हम रुके नहीं। जॉन ने पूजा को फिर से लिया, इस बार नेहा के साथ। उनकी बॉडीज एक हो गईं, सुख की लहरें। मैं उनके बीच थी, महसूस कर रही थी हर स्पर्श। जॉन का लंड पूजा की बुर में गहरा, नेहा की में तेज। कराहें, पसीना, इमोशन्स।
फिर जॉन ने नेहा को ऊपर बिठाया, वो उछल रही थी। पूजा मेरे पास आई, हमने एक-दूसरे को छुआ। जॉन देख रहा था, उत्साहित। ये नया अनुभव था, परिवार की बॉन्डिंग। सुख की ऊंचाई पर पहुंचे, सब थक गए लेकिन संतुष्ट।
जॉन ने पूजा की बुर को फिर से भरा, इस बार धीरे-धीरे, इमोशनल। नेहा देख रही थी, अपनी उंगलियां इस्तेमाल कर। मैं जॉन के सीने पर लेटी, महसूस कर रही थी उसकी धड़कन। रात अभी बाकी थी, हम फिर शुरू हो गए।