बंजारे की आगोश में
सुबह की धूप धीरे-धीरे मेरे कमरे में घुस रही थी, और मैं अपनी पुरानी डायरी में कुछ नोट्स लिख रही थी। शहर की भागदौड़ से दूर, इस छोटे से गांव में छुट्टियां बिताने का फैसला मैंने कुछ महीने पहले ही किया था। रोज की तरह, मैं चाय की प्याली हाथ में लेकर बालकनी में खड़ी हो गई, जहां से दूर पहाड़ों की सिलसिला दिखाई देता था। हवा में ठंडक थी, और गांव की सड़क पर कुछ लोग अपनी दिनचर्या में लगे हुए थे।
मेरा नाम रिया है, और मैं दिल्ली में एक ग्राफिक डिजाइनर हूं। पच्चीस साल की उम्र में, काम की थकान से बचने के लिए मैंने इस गांव को चुना, जहां मेरी नानी का पुराना घर है। यहां आकर मुझे शांति मिलती है। सुबह उठकर किताब पढ़ना, गांव घूमना, और शाम को नानी से पुरानी कहानियां सुनना—यही मेरी दिनचर्या बन गई है। आज भी वैसा ही दिन था; मैंने नाश्ता किया और बाहर टहलने निकल पड़ी।
गांव की गलियां संकरी थीं, लेकिन हर कोने से प्रकृति की सुंदरता झलकती थी। मैं नदी किनारे की ओर जा रही थी, जहां पानी की कलकलाहट हमेशा मुझे तरोताजा कर देती है। रास्ते में कुछ बच्चे खेल रहे थे, और दूर से बैलगाड़ी की आवाज आ रही थी। मेरे मन में कोई खास विचार नहीं था, बस इस शांत माहौल को जीना चाहती थी।
नदी के पास पहुंचकर मैं एक पेड़ के नीचे बैठ गई। किताब खोलकर पढ़ने लगी, लेकिन ध्यान बार-बार आसपास की आवाजों पर जाता। तभी दूर से कुछ गाने की धुन सुनाई दी। मैंने सिर उठाकर देखा—एक समूह था, जो घुमंतू लग रहे थे। वे बंजारे थे, अपने तंबुओं और सामान के साथ। मैंने सुना था कि ये लोग जगह-जगह घूमते हैं, कभी यहां, कभी वहां।
उनमें से एक लड़का मेरी तरफ देख रहा था। उसका नाम रवि था, जैसा कि बाद में पता चला। वह लंबा, काला-कलूटा लेकिन आकर्षक चेहरा वाला था। उसके कपड़े साधारण थे, लेकिन उसकी आंखों में एक जंगली चमक थी। मैंने नजरें हटा लीं और किताब पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की। लेकिन वह धीरे-धीरे मेरी ओर आ रहा था।
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"नमस्ते, क्या आप यहां की हैं?" उसने पूछा, उसकी आवाज में एक अजीब सी मिठास थी। मैं चौंक गई, लेकिन मुस्कुराकर बोली, "नहीं, शहर से आई हूं छुट्टियां मनाने। आप?" वह हंसा और बोला, "हम बंजारे हैं, जगह-जगह घूमते हैं। यहां कुछ दिन रुकेंगे।" हमारी बातचीत शुरू हो गई। वह अपनी जिंदगी के बारे में बताने लगा—कैसे वे जंगलों में रहते हैं, लोकगीत गाते हैं, और आजादी की जिंदगी जीते हैं।
मैंने कभी ऐसे लोगों से बात नहीं की थी। मेरी जिंदगी तो शहर की रौशनी और ऑफिस की डेडलाइन्स से भरी थी। रवि की कहानियां सुनकर मुझे एक नई दुनिया का अहसास हो रहा था। वह बताता रहा, और मैं सुनती रही। समय कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला। शाम होने से पहले मैंने विदा ली, लेकिन उसके चेहरे की छवि मेरे मन में रह गई।
अगले दिन मैं फिर नदी किनारे गई। इस बार उम्मीद थी कि शायद रवि मिले। और वह मिला भी। हम फिर बातें करने लगे। उसने मुझे अपने तंबू के पास बुलाया, जहां उसके परिवार के लोग थे। वे सब इतने मेहमाननवाज थे। मैंने उनके साथ चाय पी, और रवि ने मुझे एक लोकगीत सुनाया। उसकी आवाज में एक जादू था, जो मुझे खींच रहा था।
दिन बीतते गए, और हमारी मुलाकातें बढ़ती गईं। रवि मुझे गांव के छिपे हुए रास्ते दिखाता, जंगल की सैर कराता। मैं उसके साथ हंसती, बातें करती। लेकिन अंदर ही अंदर एक उथल-पुथल थी। मैं शहर की लड़की, और वह बंजारा—हमारी दुनिया अलग थी। फिर भी, उसकी नजरों में कुछ था जो मुझे असहज कर देता था, एक गहराई जो मेरे दिल को छूती थी।
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एक शाम हम जंगल में घूम रहे थे। सूरज डूब रहा था, और हवा में ठंडक बढ़ रही थी। रवि ने मेरे हाथ को छुआ, और मैं सिहर गई। "रिया, तुम्हारी आंखों में क्या राज है?" उसने पूछा। मैं चुप रही, लेकिन मेरे मन में विचार उमड़ रहे थे। क्या ये सिर्फ आकर्षण है, या कुछ ज्यादा? मैंने खुद को संभाला, लेकिन उसका स्पर्श मुझे अंदर तक हिला गया।
रात को घर लौटकर मैं सो नहीं पाई। नानी सो चुकी थीं, और मैं बालकनी में खड़ी चांद को देख रही थी। रवि की यादें घूम रही थीं—उसकी मुस्कान, उसकी बातें। मैंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया था। शहर में रिश्ते सतही होते हैं, लेकिन यहां सब कुछ इतना जीवंत लगता था।
अगली सुबह मैंने फैसला किया कि आज रवि से मिलूंगी और अपनी भावनाओं को समझूंगी। नदी किनारे पहुंची, तो वह पहले से वहां था। हमने बात की, लेकिन इस बार हवा में कुछ अलग था। वह मेरे करीब आया, और मैंने विरोध नहीं किया। उसकी आंखों में देखकर मैंने कहा, "रवि, मुझे तुम्हारी दुनिया अच्छी लगती है।" वह मुस्कुराया और बोला, "और मुझे तुम्हारी।"
हम जंगल की ओर चले। रास्ते में वह मेरे कंधे पर हाथ रखता, और मैं महसूस करती कि मेरे शरीर में एक कंपन है। लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ था। हम एक छोटी सी गुफा के पास रुके, जहां से पानी की धारा बह रही थी। वहां बैठकर हमने बातें कीं—मेरी जिंदगी के बारे में, उसके सपनों के बारे में।
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धीरे-धीरे शाम हुई, और अंधेरा छाने लगा। रवि ने मुझे गले लगाया, और मैंने खुद को रोक नहीं पाई। उसका स्पर्श गर्म था, जैसे आग की लपटें। मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं, और उसके होंठ मेरे होंठों से मिले। वो चुंबन इतना गहरा था कि मैं सब कुछ भूल गई।
उस रात हम गुफा में ही रुके। रवि ने मुझे अपनी बाहों में लिया, और मैंने महसूस किया कि मेरी सांसें तेज हो रही हैं। उसने मेरे कपड़े धीरे-धीरे उतारे, और मैंने उसके। उसका शरीर मजबूत था, जैसे जंगल का कोई योद्धा। मैंने उसके सीने पर हाथ फेरा, और वह सिहर उठा।
हमारी बॉडी एक-दूसरे से सट गईं। रवि ने मेरे स्तनों को छुआ, और मैं कराह उठी। उसकी उंगलियां मेरी त्वचा पर घूम रही थीं, हर स्पर्श में एक नई संवेदना। मैंने उसके कंधे पर काटा, और वह और जोर से मुझे चूमा। हमारा मिलन इतना तीव्र था कि समय रुक सा गया।
रवि ने मुझे नीचे लिटाया, और धीरे से प्रवेश किया। दर्द और सुख का मिश्रण था, लेकिन मैंने खुद को समर्पित कर दिया। उसकी हर गति में एक लय थी, जैसे कोई गीत। मैंने अपनी कमर उठाई, और हम एक हो गए। वो पल अविस्मरणीय थे—उसकी सांसें मेरी गर्दन पर, मेरी कराहें हवा में घुलती हुईं।
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रात भर हमने एक-दूसरे को खोजा। कभी वह ऊपर, कभी मैं। हर बार कुछ नया—कभी धीमा, कभी तेज। मैंने कभी ऐसा अनुभव नहीं किया था। उसकी आंखों में देखकर मैंने कहा, "रवि, ये पल हमेशा याद रहेंगे।" वह मुस्कुराया और मुझे फिर से चूमा।
सुबह हुई, लेकिन हम अलग नहीं होना चाहते थे। रवि ने मुझे फिर से अपनी बाहों में लिया, और हमने दिन की शुरुआत उसी उत्साह से की। उसका स्पर्श अब और परिचित लगता था, लेकिन हर बार नई उत्तेजना लाता। मैंने उसके शरीर के हर हिस्से को छुआ, और वह मेरे।
दिन बीतते गए, और हमारी मुलाकातें गुप्त हो गईं। कभी जंगल में, कभी नदी किनारे। हर बार हमारा मिलन गहरा होता जाता। एक शाम हम एक झरने के नीचे थे। पानी की बूंदें हमारी बॉडी पर गिर रही थीं, और रवि ने मुझे दीवार से सटा लिया। उसकी हर थ्रस्ट में एक जुनून था, और मैं चीख उठी।
मेरे मन में अब डर भी था—ये रिश्ता कहां जाएगा? लेकिन उस पल में सब कुछ भूल जाती। रवि की आगोश में मैं खुद को खो देती, और वो हर बार मुझे नई ऊंचाइयों पर ले जाता।
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एक रात हम उसके तंबू में थे। परिवार सो चुका था, और हम चुपके से मिले। रवि ने मुझे लिटाया, और इस बार बहुत धीरे-धीरे सब किया। उसकी जीभ मेरे शरीर पर घूमी, और मैं पागल हो गई। हमने घंटों एक-दूसरे को संतुष्ट किया, हर भावना को जीया।
समय बीत रहा था, और मेरी छुट्टियां खत्म होने वाली थीं। लेकिन रवि के साथ बिताए पल मुझे रोक रहे थे। हम फिर मिले, और इस बार मिलन और भावुक था। उसने मुझे कसकर पकड़ा, और मैंने महसूस किया कि ये आखिरी हो सकता है।
उसकी हर गति में विदाई का दर्द था, लेकिन सुख भी। मैंने अपनी आंखें बंद कीं, और उसके साथ बह गई। वो पल जब हम चरम पर पहुंचे, तो लगा जैसे दुनिया रुक गई।
रवि ने मुझे चूमा, और मैंने उसकी आंखों में देखा।