होटल की वो रात

सुबह की धूप कमरे में धीरे-धीरे फैल रही थी, और मैं अपनी किताब के पन्ने पलटते हुए कॉफी का घूंट ले रहा था। घर की बालकनी में बैठा, शहर की हलचल को दूर से देखना मेरी रोज की आदत थी। आज का दिन भी वैसा ही लग रहा था, बस थोड़ा सा अलग क्योंकि बुआ आने वाली थीं।

रीना बुआ मेरे पापा की छोटी बहन हैं, और पिछले साल उनके पति का देहांत हो गया था। वो अकेली रहती हैं, लेकिन परिवार से जुड़ी रहती हैं। मैं रोहन हूं, इंजीनियरिंग की नौकरी करता हूं, और घर पर अकेला ही रहता हूं क्योंकि मम्मी-पापा गांव चले गए हैं। बुआ अक्सर फोन करतीं, और आज वो शहर आ रही थीं कुछ काम से।

मैंने घड़ी देखी, ट्रेन आने का समय हो रहा था। स्टेशन पर पहुंचा तो बुआ ट्रेन से उतरती नजर आईं, उनके हाथ में छोटा सा बैग था। उन्होंने मुझे देखकर मुस्कुराया, और मैंने उनका बैग लिया। "कैसी हो बुआ? सफर ठीक रहा?" मैंने पूछा, जबकि हम टैक्सी की तरफ बढ़े।

बुआ ने सिर हिलाया, "हां रोहन, सब ठीक। बस थोड़ी थकान है।" घर पहुंचकर मैंने उन्हें आराम करने को कहा, और खुद किचन में चाय बनाई। वो सोफे पर बैठीं, और हमने पुरानी बातें कीं – बचपन की, पापा की शरारतों की।

शाम को बुआ ने कहा कि उन्हें एक कांफ्रेंस अटेंड करनी है, जो शहर के बाहर एक होटल में है। "तुम्हें चलना चाहिए मेरे साथ, अकेले बोरिंग लगेगा," उन्होंने मजाक में कहा। मैंने हामी भरी, क्योंकि छुट्टी थी। हमने अगले दिन का प्लान बनाया, और मैंने होटल बुक कर लिया।

अगली सुबह हम कार से निकले। रास्ते में बुआ ने अपने पति की यादें साझा कीं, उनकी आंखें थोड़ी नम हो गईं। मैंने उनका हाथ थामा, "बुआ, सब ठीक हो जाएगा।" वो चुप रहीं, लेकिन मुस्कुराईं। होटल पहुंचे तो वो काफी लग्जरी था, स्विमिंग पूल और गार्डन के साथ।

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चेक-इन के बाद हम अपने रूम में गए। एक ही रूम बुक हुआ था, दो बेड वाला। बुआ ने अपना सामान रखा, और मैंने खिड़की से बाहर का नजारा देखा। शाम को कांफ्रेंस थी, तो हमने लंच किया। डाइनिंग हॉल में बैठे, बुआ ने अपनी जिंदगी के बारे में और बताया – कैसे वो अब अकेलेपन से जूझ रही हैं।

मैंने सुना, और दिल में एक अजीब सी भावना उभरी। बुआ हमेशा से केयरिंग रही हैं, लेकिन आज उनकी बातों में एक उदासी थी। कांफ्रेंस के बाद हम वापस रूम में आए। रात हो चुकी थी, और बाहर बारिश शुरू हो गई। बुआ ने कहा, "रोहन, आज बहुत अच्छा लगा तुम्हारे साथ।"

मैंने मुस्कुराकर जवाब दिया, "मुझे भी बुआ। आप खुश रहो, बस।" हम बेड पर बैठे, टीवी ऑन किया। लेकिन मेरी नजरें बार-बार बुआ पर जा रही थीं। उनकी साड़ी की सिलवटें, वो थकी हुई मुस्कान – सब कुछ सामान्य था, लेकिन मेरे मन में कुछ हलचल थी।

बारिश तेज हो गई, और बुआ ने खिड़की बंद की। "कितनी ठंड है," उन्होंने कहा, और कंबल ओढ़ लिया। मैं उनके बगल में बैठा, और बातें करने लगे। उनकी आंखों में एक अकेलापन था, जो मुझे छू गया। धीरे से मैंने उनका हाथ पकड़ा, और वो चुप रहीं।

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उस पल में कुछ बदल गया। बुआ ने मेरी तरफ देखा, उनकी सांसें थोड़ी तेज थीं। "रोहन, क्या ये सही है?" उन्होंने धीमी आवाज में पूछा। मैंने कुछ नहीं कहा, बस उन्हें गले लगा लिया। वो मेरे सीने से लगी रहीं, और हमारी सांसें मिल गईं।

धीरे-धीरे मैंने उनके गाल पर हाथ फेरा, और वो आंखें बंद कर लीं। हमारा पहला चुंबन इतना नरम था, जैसे सालों का बोझ उतर रहा हो। बुआ की उंगलियां मेरे बालों में घूमीं, और मैंने उनकी साड़ी का पल्लू सरकाया।

उनका शरीर गर्म था, और मैंने धीरे से उनके ब्लाउज के बटन खोले। बुआ ने सिसकी भरी, "रोहन, मुझे डर लग रहा है।" लेकिन उनकी आंखों में इच्छा थी। मैंने उन्हें बेड पर लिटाया, और उनके होंठों को चूमा।

हमारे शरीर एक-दूसरे से सटे, और मैंने उनके स्तनों को सहलाया। बुआ की सांसें तेज हो गईं, वो मेरे नाम पुकार रही थीं। मैंने अपनी शर्ट उतारी, और वो मेरे सीने पर हाथ फेरने लगीं। उस रात होटल का कमरा हमारी दुनिया बन गया।

धीरे-धीरे मैंने उनकी साड़ी पूरी उतार दी, और वो मेरे सामने नग्न थीं। उनकी त्वचा इतनी मुलायम थी, जैसे रेशम। मैंने उनके पूरे शरीर को चूमा, हर हिस्से को महसूस किया। बुआ ने मुझे कसकर पकड़ा, उनकी आंखें बंद थीं।

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जब मैं उनके अंदर प्रवेश किया, तो एक मीठा दर्द हम दोनों को महसूस हुआ। बुआ की कराहें कमरे में गूंजीं, और मैंने धीमे-धीमे गति बढ़ाई। हमारी बॉडीज एक लय में चल रही थीं, पसीने से भीगी हुई।

उस पल में भावनाएं उफान पर थीं – प्यार, अकेलापन, और एक नई शुरुआत। बुआ ने मेरे कंधे पर नाखून गड़ाए, और मैंने उनकी कमर पकड़ी। हर थ्रस्ट के साथ हम करीब आते गए।

क्लाइमेक्स के बाद हम एक-दूसरे से लिपटे रहे, सांसें सामान्य होने लगीं। बुआ ने मेरी आंखों में देखा, और एक मुस्कान दी। बारिश बाहर जारी थी, लेकिन हमारे बीच एक शांति थी।

सुबह हुई तो हम फिर से एक-दूसरे के करीब आए। इस बार ज्यादा पैशन के साथ, बुआ ने ऊपर आकर कंट्रोल लिया। उनकी हरकतें इतनी नैचुरल थीं, जैसे सालों की प्यास बुझ रही हो।

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मैंने उनके कूल्हों को पकड़ा, और वो ऊपर-नीचे होती रहीं। हमारी आंखें मिलीं, और वो बोलीं, "रोहन, ये मत भूलना।" मैंने वादा किया, जबकि हम फिर से चरम पर पहुंचे।

दोपहर को हम होटल से निकले, लेकिन वो रात हमेशा याद रहेगी। बुआ की मुस्कान अब पहले से ज्यादा चमकदार थी। हम घर की तरफ चले, बातें करते हुए।

घर पहुंचकर सब सामान्य लग रहा था, लेकिन हमारे बीच एक राज था। शाम को बुआ ने कहा, "रोहन, थैंकユ।" मैंने उन्हें गले लगाया, और हम फिर से करीब आए।

इस बार सोफे पर, धीरे-धीरे। बुआ की सांसें मेरे कान में गूंजीं, और मैंने उन्हें प्यार किया। हर पल नया था, भावनाओं से भरा।

रात को बुआ सो गईं, और मैं उन्हें देखता रहा। हमारी जिंदगी बदल चुकी थी, लेकिन ये हमारा राज था। सुबह वो चली गईं, लेकिन वादा किया कि जल्द मिलेंगी।

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अब जब भी बारिश होती है, मुझे वो होटल की रात याद आती है। बुआ का स्पर्श, उनकी आंखें – सब कुछ जीवंत है। हम फोन पर बात करते हैं, और कभी-कभी मिलते हैं।

एक बार फिर होटल गए, और वो पल दोहराए। इस बार ज्यादा इंटेंस, ज्यादा भावुक। बुआ ने मेरे शरीर को एक्सप्लोर किया, और मैंने उनका।

हमारे बीच का बंधन मजबूत हो गया है, प्यार और इच्छा का मिश्रण। हर मुलाकात नई कहानी बनाती है।

अब मैं अपनी बालकनी में बैठा सोचता हूं, जीवन कितना अप्रत्याशित है। बुआ का फोन आया, "रोहन, मिलने आ रही हूं।" मैं मुस्कुराया, इंतजार में।

जब वो आईं, हम फिर से एक हुए। इस बार घर पर, धीमे संगीत के साथ। बुआ की बॉडी मेरी थी, और मैं उनकी।

हमारे प्यार में कोई रोक नहीं, बस बहाव है। हर स्पर्श में भावनाएं हैं, हर चुंबन में सच्चाई।

और वो रात जारी है, हमारे दिलों में।