Hindi Sex Stories - Antarvasna - हिंदी सेक्स कहानियाँ

Read new Hindi sex stories free. Daily Indian sexy stories of hot girls, bhabhi & aunties. रोज़ नई गर्मागर्म सेक्सी कहानियाँ असली अन्तर्वासना साइट पर।

बहन और ननद की छुपी चाहतें

सुबह के नौ बजे का समय था, जब मैं अपने घर की बालकनी में खड़ा होकर चाय की चुस्की ले रहा था। दिल्ली की इस व्यस्त कॉलोनी में, हर रोज की तरह गाड़ियों की आवाज़ और पड़ोसियों की बातचीत का शोर सुनाई दे रहा था।...

दीदी के साथ अनकही चाहत

सुबह की धूप खिड़की से छनकर कमरे में फैल रही थी, और मैं अपनी किताबों के ढेर के बीच बैठा कॉलेज की तैयारी कर रहा था। घर छोटा सा था, दिल्ली के एक पुराने मोहल्ले में, जहाँ माँ रोज़ सुबह चाय बनातीं और पापा ...

खेल की शुरुआत

सुबह की धूप कमरे में हल्की-हल्की चुपके से घुस रही थी, और मैं अपनी किताब के पन्ने पलटते हुए बिस्तर पर बैठी थी। आज छुट्टी का दिन था, कॉलेज बंद था, और घर में सब अपनी-अपनी दिनचर्या में व्यस्त थे। माँ रसोई...

मुंहबोली बेटी की चाहत

सुबह की धूप मेरे कमरे की खिड़की से छनकर आ रही थी, और मैं अपनी पुरानी कुर्सी पर बैठा चाय की चुस्की ले रहा था। रोज की तरह आज भी घर में शांति थी, बस रसोई से आने वाली आवाजें बता रही थीं कि दिन शुरू हो चुक...

माँ की साये में

सुबह की पहली किरण कमरे में घुस रही थी, जब मैंने आंखें खोलीं। बाहर बालकनी से चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई दे रही थी, और रसोई से माँ की आवाज़ आ रही थी – चाय की केतली का सिटी बजना और बर्तनों की हल्की-हल्की ...

विदेशी मेहमान की चाहत

सुबह की धूप अभी-अभी खिड़की से झांक रही थी, जब मैं रसोई में चाय की केतली चढ़ा रही थी। हमारा घर दिल्ली के एक शांत इलाके में है, जहां हर रोज की शुरुआत ऐसी ही होती है—बेटा ऑफिस के लिए तैयार होता है, बहू न...

मौसी और मौसा के साथ अनोखा बंधन

सुबह की धूप कमरे की खिड़की से छनकर आ रही थी, और मैं बिस्तर पर लेटा हुआ चाय की प्याली हाथ में थामे अखबार पढ़ रहा था। ये मेरी रोज की दिनचर्या थी – नौकरी पर जाने से पहले थोड़ा समय खुद के लिए निकालना। मौस...

दीदी के साथ वो अनोखी शाम

उस दिन शाम को कॉलेज से लौटकर मैं घर पहुंचा था। बाहर हल्की बारिश हो रही थी, और घर की खिड़कियां बंद करके कमरे में ठंडक फैली हुई थी। मैंने अपना बैग सोफे पर रखा और किचन में जाकर पानी पिया, रोज की तरह।...

अम्मी की आस्था का छल

सुबह की पहली किरण घर की खिड़की से अंदर झांक रही थी। मैं उठा और रोज की तरह चाय बनाने के लिए रसोई की ओर चला। अम्मी पहले से ही वहां थीं, सब्जियां काट रही थीं। बाहर गली में बच्चों की आवाजें आ रही थीं, और ...

नए फ्लैट में अनकही चाहत

मैं राहुल हूँ, और उस दिन सुबह की धूप मेरे कमरे की खिड़की से छनकर आ रही थी। कॉलेज का नया सेमेस्टर शुरू होने वाला था, इसलिए मैंने शहर में एक छोटा सा फ्लैट किराए पर लिया था। सामान अभी पूरी तरह अनपैक्ड नह...